परिभाषा
वाक्य शब्दों का ऐसा सार्थक समूह है जो किसी भाव या विचार को पूर्णतः व्यक्त करता है। वाक्य में कर्ता, कर्म और क्रिया का सही क्रम तथा व्याकरणिक शुद्धता आवश्यक है।
उदाहरण: राम खाना खाता है।
वाक्य के अंग: उद्देश्य और विधेय
प्रत्येक वाक्य के मुख्य रूप से दो अंग होते हैं:
-
उद्देश्य (Subject): वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाए, उसे उद्देश्य कहते हैं। इसमें कर्ता और कर्ता का विस्तार (विशेषण, संबंधवाचक आदि) शामिल होता है।
उदाहरण: मोहन खेल रहा है। (मोहन उद्देश्य)
उदाहरण: मेरा भाई मोहन खेल रहा है। (मेरा भाई मोहन उद्देश्य) -
विधेय (Predicate): उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाए, उसे विधेय कहते हैं। इसमें क्रिया, कर्म, पूरक और क्रिया-विशेषण आदि शामिल होते हैं।
उदाहरण: मोहन खेल रहा है। (खेल रहा है विधेय)
उदाहरण: मेरा भाई मोहन मैदान में क्रिकेट खेल रहा है। (मैदान में क्रिकेट खेल रहा है विधेय)
वाक्य के भेद (रचना के आधार पर)
रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं:
1. सरल वाक्य (Simple Sentence)
जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय हो (अर्थात एक ही मुख्य क्रिया हो), उसे सरल वाक्य कहते हैं।
उदाहरण:
- बच्चा खेलता है।
- सूर्य उग रहा है।
- मोहन किताब पढ़ रहा है।
2. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence)
जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य किसी समानाधिकरण योजक (जैसे और, एवं, तथा, या, अथवा, इसलिए, अतः, फिर भी, किंतु, परंतु, लेकिन, मगर, बल्कि, पर) से जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं। प्रत्येक उपवाक्य अपने आप में पूर्ण अर्थ रखता है।
उदाहरण:
- राम आया और श्याम चला गया।
- वह बीमार था इसलिए स्कूल नहीं आया।
- तुम पढ़ो या सो जाओ।
3. मिश्र वाक्य (Complex Sentence)
जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य हो और एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य हों, जो किसी व्यधिकरण योजक (जैसे कि, जो, क्योंकि, जितना, उतना, जैसा, वैसा, जब, तब, जहाँ, वहाँ, जिधर, उधर, यदि, तो, यद्यपि, तथापि) से जुड़े हों, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के बिना पूर्ण अर्थ नहीं देते।
उपवाक्य के प्रकार (मिश्र वाक्य में):
-
संज्ञा उपवाक्य: जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया के कर्म या पूरक के रूप में आता है और ‘कि’ से जुड़ा होता है।
उदाहरण: मैं जानता हूँ कि वह बहुत परिश्रमी है। (क्या जानता हूँ? वह बहुत परिश्रमी है) -
विशेषण उपवाक्य: जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है और ‘जो’, ‘जिसे’, ‘जिसका’, ‘जिसमें’ आदि से जुड़ा होता है।
उदाहरण: यह वही लड़का है जो कल आया था। (कौन सा लड़का? जो कल आया था) -
क्रिया-विशेषण उपवाक्य: जो उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की क्रिया की विशेषता (स्थान, काल, रीति, परिमाण, कारण, उद्देश्य, शर्त) बताता है और ‘जब’, ‘जहाँ’, ‘जैसा’, ‘जितना’, ‘क्योंकि’, ‘यदि’ आदि से जुड़ा होता है।
उदाहरण: जब मैं घर पहुँचा, तब बारिश हो रही थी। (कब बारिश हो रही थी? जब मैं घर पहुँचा)
उदाहरण: जहाँ राम रहता है, वहाँ शांति है। (कहाँ शांति है? जहाँ राम रहता है)
अर्थ के आधार पर वाक्य भेद
वाक्य भाषा की वह लघुतम इकाई है जो किसी विचार को पूर्ण रूप से प्रकट करती है। अर्थ के आधार पर हिंदी व्याकरण में वाक्यों को मुख्य रूप से 8 भागों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक भेद वाक्य के भाव और अर्थ की विशिष्टता को दर्शाता है।
वाक्यों के आठ प्रकार
1. विधानवाचक वाक्य
जिस वाक्य में किसी क्रिया के करने या होने की सामान्य सूचना मिलती है, उसे विधानवाचक वाक्य कहते हैं। इन्हें सरल या सूचनात्मक वाक्य भी कहा जाता है।
- सूर्य पूर्व से निकलता है।
- भारत एक विशाल देश है।
- राम पुस्तक पढ़ रहा है।
2. निषेधवाचक वाक्य
जिन वाक्यों से किसी कार्य के न होने या निषेध का बोध होता है, उन्हें निषेधवाचक वाक्य कहते हैं। इनमें प्रायः नहीं, न, मत जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
- मैंने खाना नहीं खाया।
- आज वर्षा नहीं होगी।
- वहाँ मत जाओ।
3. प्रश्नवाचक वाक्य
वे वाक्य जिनका प्रयोग किसी से प्रश्न पूछने के लिए किया जाता है, प्रश्नवाचक वाक्य कहलाते हैं। इन वाक्यों के अंत में प्रश्नवाचक चिह्न (?) का प्रयोग अनिवार्य है।
- आपका नाम क्या है?
- तुम कहाँ जा रहे हो?
- क्या उसने अपना गृहकार्य कर लिया?
4. आज्ञावाचक वाक्य
जिन वाक्यों से आज्ञा, आदेश, प्रार्थना, अनुमति या उपदेश का बोध होता है, उन्हें आज्ञावाचक वाक्य कहते हैं।
- एक गिलास पानी लाओ।
- चुपचाप बैठो।
- कृपया मेरी सहायता करें।
5. इच्छावाचक वाक्य
वक्ता की इच्छा, आशा, शुभकामना या आशीर्वाद को प्रकट करने वाले वाक्य इच्छावाचक वाक्य कहलाते हैं।
- नव वर्ष मंगलमय हो।
- भगवान तुम्हारा भला करे।
- आज तो कहीं से मिठाई मिल जाए।
6. संदेहवाचक वाक्य
जिन वाक्यों से कार्य के होने में संदेह या संभावना प्रकट होती है, उन्हें संदेहवाचक वाक्य कहते हैं। इनमें शायद, संभवतः, हो सकता है जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
- शायद आज शाम को वर्षा हो।
- संभवतः वह कल आए।
- अब तक वह सो चुका होगा।
7. विस्मयादिवाचक वाक्य
जिन वाक्यों से आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा या भय जैसे मनोभाव प्रकट होते हैं, उन्हें विस्मयादिवाचक वाक्य कहते हैं।
- वाह! कितना सुंदर दृश्य है।
- हाय! बेचारा मारा गया।
- छिः! यहाँ कितनी गंदगी है।
8. संकेतवाचक वाक्य
जिन वाक्यों में एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया पर निर्भर करता है, उन्हें संकेतवाचक वाक्य कहते हैं। इनमें शर्त का भाव निहित होता है।
- यदि परिश्रम करोगे तो सफल होगे।
- अगर वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।
- तुम आते तो मैं चलता।
परीक्षा में भ्रमित करने वाले बिंदु और छात्रों के लिए सुझाव
वाक्य रचना और उपवाक्य से संबंधित कुछ ऐसे बिंदु हैं जो परीक्षा में अक्सर भ्रम पैदा करते हैं, साथ ही कुछ महत्वपूर्ण सुझाव:
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सरल वाक्य में एक से अधिक क्रियाएँ:
एक सरल वाक्य में एक से अधिक क्रियाएँ हो सकती हैं, लेकिन मुख्य क्रिया एक ही होगी। अन्य क्रियाएँ पूर्वकालिक क्रियाएँ या कृदंत रूप हो सकती हैं।
उदाहरण: राम खाना खाकर सो गया। (यहाँ ‘खाकर’ पूर्वकालिक क्रिया है, मुख्य क्रिया ‘सो गया’ है। यह सरल वाक्य है।)
उदाहरण: हँसता हुआ बच्चा आया। (यहाँ ‘हँसता हुआ’ कृदंत विशेषण है, मुख्य क्रिया ‘आया’ है। यह सरल वाक्य है।) -
संयुक्त और मिश्र वाक्य में योजक शब्दों का भ्रम:
‘और’, ‘एवं’, ‘तथा’ जैसे योजक समानाधिकरण होते हैं (संयुक्त वाक्य)। ‘कि’, ‘जो’, ‘क्योंकि’, ‘जब-तब’ जैसे योजक व्यधिकरण होते हैं (मिश्र वाक्य)।
भ्रम: कभी-कभी ‘और’ का प्रयोग मिश्र वाक्य में भी हो सकता है यदि वह दो आश्रित उपवाक्यों को जोड़ रहा हो, लेकिन यह दुर्लभ है और मुख्य पहचान प्रधान उपवाक्य की उपस्थिति से होती है। -
संज्ञा उपवाक्य और विशेषण उपवाक्य की पहचान:
संज्ञा उपवाक्य अक्सर ‘कि’ से शुरू होता है और प्रधान उपवाक्य की क्रिया के कर्म या पूरक के रूप में आता है (क्या? या किसको? का उत्तर)।
विशेषण उपवाक्य ‘जो’ या ‘जिस’ परिवार के शब्दों से शुरू होता है और प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है (कौन सा? या कैसा? का उत्तर)।
उदाहरण: उसने कहा कि वह कल आएगा। (संज्ञा उपवाक्य – क्या कहा?)
उदाहरण: वह लड़का जो कल आया था, मेरा भाई है। (विशेषण उपवाक्य – कौन सा लड़का?) -
क्रिया-विशेषण उपवाक्य की सूक्ष्मताएँ:
कालवाचक (जब, तब), स्थानवाचक (जहाँ, वहाँ), रीतिवाचक (जैसा, वैसा), परिमाणवाचक (जितना, उतना), कारणवाचक (क्योंकि), उद्देश्यवाचक (ताकि), शर्तवाचक (यदि, तो) आदि भेद महत्वपूर्ण हैं। योजक शब्द की पहचान से ही इसका प्रकार तय होता है। -
वाक्य रूपांतरण:
वाक्य रूपांतरण का अर्थ है एक प्रकार के वाक्य को दूसरे प्रकार के वाक्य में बदलना, जैसे सरल वाक्य को संयुक्त या मिश्र वाक्य में, या इसके विपरीत। इस प्रक्रिया में वाक्य का अर्थ नहीं बदलना चाहिए, केवल उसकी संरचना बदलनी चाहिए। परीक्षा में यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है।
उदाहरण:- सरल: राम पढ़कर सो गया।
- संयुक्त: राम ने पढ़ा और वह सो गया।
- मिश्र: जब राम ने पढ़ा, तब वह सो गया।
वाक्य रूपांतरण के लिए महत्वपूर्ण युक्तियाँ:
- योजक शब्दों पर ध्यान दें: संयुक्त वाक्य के लिए समानाधिकरण योजक (और, या, किंतु), मिश्र वाक्य के लिए व्यधिकरण योजक (कि, जो, जब, जहाँ, क्योंकि) का सही प्रयोग करें।
- मुख्य क्रिया पहचानें: सरल वाक्य में एक ही मुख्य क्रिया होती है। संयुक्त और मिश्र वाक्य में एक से अधिक क्रियाएँ हो सकती हैं, लेकिन मिश्र वाक्य में एक प्रधान और अन्य आश्रित होती हैं।
- अर्थ न बदलें: रूपांतरण करते समय वाक्य का मूल अर्थ नहीं बदलना चाहिए।
- उपवाक्यों को पहचानें: मिश्र वाक्य में प्रधान और आश्रित उपवाक्यों को अलग-अलग पहचानना सीखें।
- अभ्यास करें: विभिन्न प्रकार के वाक्यों का रूपांतरण करने का अधिक से अधिक अभ्यास करें।
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