1. परिचय (Introduction)
भारत एक लंबी तटरेखा वाला देश है। प्रायद्वीपीय पठार के किनारों पर स्थित ये संकीर्ण तटीय मैदान, पश्चिम में अरब सागर और पूर्व में बंगाल की खाड़ी के बीच फैले हुए हैं। इन्हें मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है: पश्चिमी तटीय मैदान और पूर्वी तटीय मैदान।
2. तटरेखा: मुख्य तथ्य
- कुल तटरेखा: भारत की कुल तटरेखा (द्वीपों सहित) लगभग 7,516.6 किलोमीटर है।
- मुख्य भूमि तटरेखा: लगभग 6,100 किलोमीटर है।
- सबसे लंबी तटरेखा वाला राज्य: गुजरात (लगभग 1,214 किमी)।
- सबसे छोटी तटरेखा वाला राज्य: गोवा (लगभग 101 किमी)।
- सबसे लंबी तटरेखा वाला केंद्र शासित प्रदेश: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह।
3. भारत के समुद्री क्षेत्र (Maritime Zones)
संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के अनुसार, भारत के समुद्री क्षेत्रों को इस प्रकार परिभाषित किया गया है:
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प्रादेशिक सागर (Territorial Sea)
यह आधार रेखा से 12 समुद्री मील (लगभग 22.2 किमी) तक फैला है। इस क्षेत्र में भारत को अपनी भूमि की तरह ही पूर्ण संप्रभुता प्राप्त है।
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संलग्न क्षेत्र (Contiguous Zone)
यह आधार रेखा से 24 समुद्री मील (लगभग 44.4 किमी) तक फैला है। इस क्षेत्र में भारत को सीमा शुल्क, कराधान, आप्रवासन और प्रदूषण से संबंधित कानूनों को लागू करने का अधिकार है।
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अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ)
यह आधार रेखा से 200 समुद्री मील (लगभग 370.4 किमी) तक फैला है। इस क्षेत्र में भारत को समुद्री संसाधनों (जीवित और निर्जीव) के सर्वेक्षण, अन्वेषण, संरक्षण और प्रबंधन का संप्रभु अधिकार है। इसमें नए द्वीपों का निर्माण और वैज्ञानिक अनुसंधान करना भी शामिल है।
4. पश्चिमी तटीय मैदान
यह मैदान गुजरात के कच्छ के रण से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। यह एक जलमग्न तटीय मैदान का उदाहरण है, जिसके कारण यह संकीर्ण है और बंदरगाहों और पत्तनों के विकास के लिए प्राकृतिक परिस्थितियाँ प्रदान करता है।
क्षेत्रीय विभाजन:
- कच्छ और काठियावाड़ तट: यह गुजरात में स्थित है।
- कोंकण तट: यह दमन से गोवा तक फैला हुआ है।
- कन्नड़ मैदान: यह गोवा से मंगलुरु तक फैला है।
- मालाबार तट: यह मंगलुरु से कन्याकुमारी तक विस्तृत है। इस तट की एक विशेष स्थलाकृति ‘कयाल’ (Kayals) या पश्चजल (Backwaters) है।
5. पूर्वी तटीय मैदान
यह मैदान पश्चिम बंगाल से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। यह एक उभरता हुआ (emergent) तट है, जिसके कारण यह पश्चिमी तट की तुलना में अधिक चौड़ा है और यहाँ विशाल डेल्टा बनते हैं।
क्षेत्रीय विभाजन:
- उत्कल तट: यह ओडिशा में स्थित है। चिल्का झील यहीं है।
- उत्तरी सरकार / आंध्र तट: यह उत्कल मैदान के दक्षिण से पुलिकट झील तक फैला है।
- कोरोमंडल तट: यह पुलिकट झील से कन्याकुमारी तक फैला हुआ है।
6. तटीय मैदानों का महत्व
- कृषि: ये मैदान चावल, नारियल, सुपारी, केला और मसालों की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं।
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प्रमुख बंदरगाह (Major Ports):
- पश्चिमी तट: कांडला (गुजरात), मुंबई और न्हावा शेवा-JNP (महाराष्ट्र), मर्मुगाओ (गोवा), न्यू मंगलौर (कर्नाटक), कोच्चि (केरल)।
- पूर्वी तट: तूतीकोरिन, चेन्नई, और एन्नोर (तमिलनाडु), विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), पारादीप (ओडिशा), हल्दिया-कोलकाता (पश्चिम बंगाल)।
- आर्थिक संसाधन: इन क्षेत्रों में मछली पकड़ना एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है। इसके अलावा, यहाँ नमक उत्पादन और खनिज तेल (मुंबई हाई) के भंडार भी हैं।
- पर्यटन: केरल के कयाल, गोवा के समुद्र तट और अन्य तटीय क्षेत्र पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं।
7. निष्कर्ष
भारत के तटीय मैदान देश के आर्थिक और रणनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये न केवल कृषि और व्यापार के केंद्र हैं, बल्कि एक समृद्ध सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत को भी संजोते हैं।