1. परिचय
भारत में जनजातीय समुदायों का वितरण अत्यधिक विषम है। 2011 की जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों (ST) की कुल जनसंख्या 10.43 करोड़ है, जो भारत की कुल जनसंख्या का 8.6% है। यह आबादी मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्रित है और देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में फैली हुई है, जो उनकी विविध सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक स्थितियों को दर्शाती है।
2. राज्य-वार जनजातीय जनसंख्या का वितरण (2011)
सर्वाधिक जनजातीय आबादी वाले राज्य (पूर्ण संख्या में)
| रैंक | राज्य | जनजातीय जनसंख्या | राज्य की कुल ST आबादी का प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| 1 | मध्य प्रदेश | 1.53 करोड़ | 14.7% |
| 2 | महाराष्ट्र | 1.05 करोड़ | 10.1% |
| 3 | ओडिशा | 95.9 लाख | 9.2% |
| 4 | राजस्थान | 92.4 लाख | 8.9% |
| 5 | गुजरात | 89.2 लाख | 8.5% |
सर्वाधिक जनजातीय आबादी वाले राज्य (जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में)
| रैंक | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | जनजातीय जनसंख्या का प्रतिशत |
|---|---|---|
| 1 | लक्षद्वीप | 94.8% |
| 2 | मिजोरम | 94.4% |
| 3 | नागालैंड | 86.5% |
| 4 | मेघालय | 86.1% |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | 68.8% |
3. क्षेत्रीय संकेंद्रण (Regional Concentration)
भारत की जनजातीय आबादी कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में केंद्रित है:
- मध्य भारत: यह सबसे बड़ा जनजातीय क्षेत्र है, जिसमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। यहाँ गोंड, भील, संथाल और मुंडा जैसी प्रमुख जनजातियाँ निवास करती हैं।
- पूर्वोत्तर भारत: इस क्षेत्र में अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मेघालय जैसे राज्यों में जनजातीय आबादी का प्रभुत्व है। यहाँ नागा, खासी, गारो और मिजो जैसी जनजातियाँ रहती हैं।
- पश्चिमी भारत: इसमें राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी मध्य प्रदेश शामिल हैं, जहाँ भील जनजाति का मुख्य निवास है।
- दक्षिण भारत: यहाँ जनजातीय आबादी मुख्य रूप से नीलगिरि पहाड़ियों और पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में पाई जाती है। टोडा और चेंचू यहाँ की प्रमुख जनजातियाँ हैं।
- द्वीप समूह: अंडमान और निकोबार में जारवा और सेंटिनलीज जैसी प्राचीन जनजातियाँ हैं, जबकि लक्षद्वीप में अधिकांश आबादी मुस्लिम जनजाति की है।
4. विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs)
PVTGs वे जनजातीय समुदाय हैं जिनकी आबादी घट रही है या स्थिर है, साक्षरता दर बहुत कम है, और वे प्रौद्योगिकी के पूर्व-कृषि स्तर पर हैं।
- भारत में कुल 75 PVTGs को मान्यता दी गई है।
- ओडिशा में PVTGs की संख्या सबसे अधिक (13) है।
5. प्रमुख जनसांख्यिकीय संकेतक
- ग्रामीण-शहरी वितरण: जनजातीय आबादी का लगभग 90% हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में और केवल 10% शहरी क्षेत्रों में निवास करता है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अलग है।
- लिंगानुपात: अनुसूचित जनजातियों में लिंगानुपात 990 (प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाएं) है, जो राष्ट्रीय औसत (943) से काफी बेहतर है।
- साक्षरता दर: जनजातीय आबादी की साक्षरता दर 59% है, जो राष्ट्रीय औसत (73%) से कम है। पुरुष साक्षरता 68.5% और महिला साक्षरता 49.4% है।
6. निष्कर्ष
भारत में जनजातीय जनसंख्या का वितरण देश की सामाजिक और भौगोलिक विविधता को उजागर करता है। जबकि मध्य भारत में जनजातियों की सबसे बड़ी संख्या है, पूर्वोत्तर राज्यों में उनका प्रतिशत सबसे अधिक है। इन समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों, जैसे कम साक्षरता और ग्रामीण अलगाव, को दूर करने के लिए लक्षित विकास कार्यक्रमों की आवश्यकता है ताकि उनका समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।