परिचय: भाखड़ा-नांगल परियोजना
भाखड़ा-नांगल परियोजना भारत की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। यह सतलुज नदी पर स्थित है और पंजाब, हरियाणा और राजस्थान राज्यों की एक संयुक्त उद्यम है। इस परियोजना की कल्पना ब्रिटिश काल में ही कर ली गई थी, लेकिन इसका निर्माण स्वतंत्रता के बाद शुरू हुआ और इसे 1963 में राष्ट्र को समर्पित किया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे ‘पुनरुत्थित भारत का नवीन मंदिर’ कहकर इसके महत्व को रेखांकित किया था।
1. परियोजना के मुख्य घटक
यह परियोजना मुख्य रूप से दो बांधों, एक जलाशय और एक व्यापक नहर प्रणाली से मिलकर बनी है:
A. भाखड़ा बांध (Bhakra Dam)
- स्थान: यह हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में भाखड़ा गॉर्ज पर बनाया गया है।
- प्रकार: यह एक ठोस गुरुत्वाकर्षण बांध (Concrete Gravity Dam) है।
- ऊंचाई: 226 मीटर की ऊंचाई के साथ, यह टिहरी बांध के बाद भारत का दूसरा सबसे ऊंचा बांध है।
- जलाशय: भाखड़ा बांध एक विशाल जलाशय का निर्माण करता है जिसे ‘गोबिंद सागर झील’ कहा जाता है। इसका नाम सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के नाम पर रखा गया है। यह भारत की तीसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित झील है।
B. नांगल बांध (Nangal Dam)
- स्थान: यह भाखड़ा बांध से लगभग 13 किमी नीचे की ओर पंजाब के नांगल शहर में स्थित है।
- भूमिका: यह मुख्य रूप से एक सहायक और संतुलन जलाशय (Balancing Reservoir) के रूप में कार्य करता है। इसका मुख्य कार्य भाखड़ा बांध से छोड़े गए पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना और उसे नांगल हाइडल चैनल में मोड़ना है।
2. परियोजना के उद्देश्य
यह एक बहुउद्देशीय परियोजना है जिसके निम्नलिखित मुख्य उद्देश्य हैं:
- सिंचाई (Irrigation): पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के लाखों हेक्टेयर सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना।
- जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Power): बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करना।
- बाढ़ नियंत्रण (Flood Control): सतलुज नदी में आने वाली विनाशकारी बाढ़ को नियंत्रित करना।
- अन्य उद्देश्य: पेयजल आपूर्ति, मत्स्य पालन को बढ़ावा देना और पर्यटन का विकास करना।
3. विद्युत उत्पादन और सिंचाई प्रणाली
A. विद्युत उत्पादन
इस परियोजना से जुड़े कई बिजली घर हैं जो उत्तरी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हैं।
- भाखड़ा बांध पावर हाउस: बांध के दोनों ओर (बाएं और दाएं किनारे पर) पावर प्लांट स्थित हैं।
- गंगूवाल और कोटला पावर हाउस: ये नांगल हाइडल चैनल पर स्थित हैं।
- कुल क्षमता: इस परियोजना की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 1325 मेगावाट है।
B. सिंचाई प्रणाली
भाखड़ा-नांगल परियोजना में लगभग 1100 किमी लंबी नहरों और 3400 किमी लंबी वितरिकाओं का एक विशाल नेटवर्क है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी सिंचाई प्रणालियों में से एक बनाता है।
4. लाभान्वित राज्य और प्रभाव
इस परियोजना ने उत्तरी भारत, विशेषकर तीन मुख्य राज्यों के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदल दिया है।
| राज्य | मुख्य लाभ |
|---|---|
| पंजाब और हरियाणा | सिंचाई के लिए पानी की सुनिश्चित आपूर्ति ने इन राज्यों को भारत का ‘अन्न भंडार’ बना दिया और हरित क्रांति की सफलता में केंद्रीय भूमिका निभाई। |
| राजस्थान | इस परियोजना से निकलने वाली नहरों ने राजस्थान के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे मरुस्थलीय जिलों में कृषि को संभव बनाया है। |
| हिमाचल प्रदेश | राज्य को बिजली उत्पादन से रॉयल्टी प्राप्त होती है और गोबिंद सागर झील के कारण पर्यटन और मत्स्य पालन को बढ़ावा मिला है। |
| दिल्ली और चंडीगढ़ | इन केंद्र शासित प्रदेशों को भी इस परियोजना से बिजली की आपूर्ति होती है। |
संक्षेप में, भाखड़ा-नांगल परियोजना सिर्फ एक बांध नहीं है, बल्कि यह कृषि आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय समृद्धि का प्रतीक है।