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रिहंद परियोजना (Rihand Project)

परिचय: रिहंद परियोजना

रिहंद परियोजना उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना सोन नदी की प्रमुख सहायक नदी, रिहंद नदी पर बनाई गई है। इसका मुख्य घटक रिहंद बांध है, जो उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में पिपरी नामक स्थान पर स्थित है। इस परियोजना की आधारशिला 1954 में रखी गई थी और इसका उद्घाटन 1962 में हुआ था।

1. परियोजना के मुख्य घटक

A. रिहंद बांध (Rihand Dam)

  • स्थान: पिपरी, सोनभद्र जिला, उत्तर प्रदेश।
  • प्रकार: यह एक ठोस गुरुत्वाकर्षण बांध (Concrete Gravity Dam) है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य कार्य जलविद्युत उत्पादन और सिंचाई के लिए पानी का भंडारण करना है।

B. गोविंद बल्लभ पंत सागर (Govind Ballabh Pant Sagar)

  • रिहंद बांध द्वारा बनाए गए विशाल जलाशय को ‘गोविंद बल्लभ पंत सागर’ के नाम से जाना जाता है। इसका नाम उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री, पंडित गोविंद बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया है।
  • यह आयतन (volume) की दृष्टि से भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
  • इसका विस्तार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में है।

2. परियोजना के उद्देश्य और प्रभाव

यह एक बहुउद्देशीय परियोजना है जिसके निम्नलिखित मुख्य उद्देश्य और प्रभाव हैं:

उद्देश्य प्रभाव और महत्व
जलविद्युत उत्पादन परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य बिजली का उत्पादन करना है। बांध के आधार पर स्थित पावर स्टेशन की स्थापित क्षमता 300 मेगावाट है। यह बिजली क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
सिंचाई यह परियोजना सोन नहर प्रणाली के माध्यम से उत्तर प्रदेश और बिहार के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति करती है।
औद्योगिक जल आपूर्ति गोविंद बल्लभ पंत सागर जलाशय इस क्षेत्र में स्थित कई तापीय विद्युत संयंत्रों (Thermal Power Plants) को ठंडा करने के लिए पानी की आपूर्ति करता है।
अन्य लाभ यह बाढ़ नियंत्रण में मदद करता है और मत्स्य पालन तथा पर्यटन के लिए अवसर प्रदान करता है।

3. भारत की ‘ऊर्जा राजधानी’ (Power Capital of India)

रिहंद परियोजना के कारण सोनभद्र और सिंगरौली (मध्य प्रदेश) का निकटवर्ती क्षेत्र भारत की ‘ऊर्जा राजधानी’ के रूप में उभरा है।

  • रिहंद बांध से उत्पादित सस्ती जलविद्युत और गोविंद बल्लभ पंत सागर से पानी की उपलब्धता ने इस क्षेत्र में कई बड़े उद्योगों को आकर्षित किया है, विशेष रूप से एल्यूमीनियम (हिंडाल्को), सीमेंट और रासायनिक उद्योग।
  • इसके अलावा, जलाशय के पानी का उपयोग NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) के कई बड़े कोयला आधारित सुपर थर्मल पावर स्टेशनों (जैसे सिंगरौली, विंध्याचल, रिहंद) में किया जाता है, जो देश के पावर ग्रिड में हजारों मेगावाट बिजली का योगदान करते हैं।

इस प्रकार, रिहंद परियोजना ने न केवल सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण में योगदान दिया है, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास की नींव भी रखी है।

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