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नागार्जुनसागर परियोजना (Nagarjuna Sagar Project)

परिचय: नागार्जुन सागर परियोजना

नागार्जुन सागर परियोजना भारत की प्रमुख और ऐतिहासिक बहुउद्देशीय परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी, कृष्णा नदी पर बनाई गई है। यह तेलंगाना और आंध्र प्रदेश राज्यों की एक संयुक्त परियोजना है, जो इन दोनों राज्यों के लिए सिंचाई और बिजली का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इस परियोजना की आधारशिला 1955 में रखी गई थी और इसे 1967 में खोला गया था। यह परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग का एक चमत्कार होने के साथ-साथ भारत के ऐतिहासिक गौरव का भी प्रतीक है।

1. परियोजना की मुख्य विशेषता और नामकरण

A. दुनिया का सबसे बड़ा चिनाई बांध (World’s Largest Masonry Dam)

नागार्जुन सागर बांध की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा चिनाई वाला बांध (Masonry Dam) है। इसका निर्माण सीमेंट और कंक्रीट के बजाय पत्थरों से किया गया है, जो इसे प्राचीन भारतीय निर्माण कौशल का एक आधुनिक उदाहरण बनाता है।

B. नामकरण का महत्व

  • इस परियोजना का नाम प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान, आचार्य नागार्जुन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने दूसरी शताब्दी में इस क्षेत्र में एक शिक्षण केंद्र की स्थापना की थी।
  • बांध द्वारा बनाए गए जलाशय ने एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल, नागार्जुनकोंडा को जलमग्न कर दिया, जो इक्ष्वाकु वंश की राजधानी थी। यहाँ से प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों को जलाशय के बीच एक द्वीप संग्रहालय में संरक्षित किया गया है।

2. परियोजना के मुख्य घटक

  • नागार्जुन सागर बांध: यह तेलंगाना के नलगोंडा जिले और आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की सीमा पर स्थित है। इसकी ऊंचाई 124 मीटर और लंबाई लगभग 1.6 किलोमीटर है।
  • नागार्जुन सागर जलाशय: यह बांध द्वारा निर्मित भारत की तीसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित झील है।
  • नहर प्रणाली:
    • जवाहरलाल नेहरू नहर (दाहिनी नहर): यह आंध्र प्रदेश के गुंटूर और प्रकाशम जिलों को सिंचित करती है।
    • लाल बहादुर शास्त्री नहर (बाईं नहर): यह तेलंगाना के नलगोंडा, सूर्यापेट, खम्मम और कृष्णा जिलों को सिंचित करती है।
  • विद्युत गृह: बांध में एक मुख्य जलविद्युत संयंत्र है जिसकी स्थापित क्षमता 815.6 मेगावाट है।

3. उद्देश्य और प्रभाव: दक्षिण भारत में हरित क्रांति

उद्देश्य प्रभाव और महत्व
सिंचाई यह परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य था। इसने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लगभग 10 लाख हेक्टेयर सूखाग्रस्त क्षेत्र को सिंचित किया, जिससे यह क्षेत्र ‘आंध्र प्रदेश का चावल का कटोरा’ (Rice Bowl of Andhra Pradesh) बन गया। इसने क्षेत्र में हरित क्रांति लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जलविद्युत उत्पादन परियोजना से उत्पादित बिजली ने क्षेत्र के औद्योगिक और कृषि विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान की।
बाढ़ नियंत्रण इसने कृष्णा नदी के डेल्टा क्षेत्र में बाढ़ को नियंत्रित करने में मदद की है।
अन्य लाभ यह परियोजना पेयजल आपूर्ति, मत्स्य पालन और एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी महत्वपूर्ण है।
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