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कोयला (Coal)

कोयला भारत का सबसे महत्वपूर्ण जीवाश्म ईंधन है। यह देश की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करता है। इसे अक्सर काला सोना कहा जाता है। भारत में कोयले का उपयोग मुख्य रूप से तापीय विद्युत उत्पादन और लोहा एवं इस्पात उद्योग में प्रगलन के लिए किया जाता है।
Map of Coal Reserves in India Placeholder

चित्र: भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्र (जल्द ही अपलोड किया जाएगा)

परीक्षा की दृष्टि से त्वरित तथ्य
  • स्थान: भारत विश्व में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है।
  • भंडार: भारत के पास विश्व का 5वां सबसे बड़ा कोयला भंडार है।
  • प्रमुख युग: भारत का 98% से अधिक कोयला गोंडवाना काल का है।
  • कोयला राजधानी: धनबाद (झारखंड) को भारत की कोयला राजधानी कहा जाता है।

कोयले के प्रकार

कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयले को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
  • एंथ्रेसाइट: यह सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला कोयला है जिसमें 80-95% कार्बन होता है। यह जलते समय बहुत कम धुआं देता है। भारत में यह केवल जम्मू-कश्मीर में पाया जाता है।
  • बिटुमिनस: यह भारत में सबसे अधिक पाया जाने वाला कोयला है। इसमें 60-80% कार्बन होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से इस्पात संयंत्रों और बिजली उत्पादन में होता है।
  • लिग्नाइट: इसे भूरा कोयला भी कहा जाता है। इसमें 40-55% कार्बन होता है और नमी की मात्रा अधिक होती है। इसके प्रमुख भंडार नेवेली (तमिलनाडु) में हैं।
  • पीट: यह कोयले के निर्माण का पहला चरण है। इसमें 40% से कम कार्बन होता है और यह जलते समय बहुत अधिक धुआं और राख छोड़ता है।

भारत में कोयले का वितरण

भारत में कोयले के भंडार दो मुख्य भूवैज्ञानिक युगों की चट्टान श्रृंखलाओं में पाए जाते हैं:

1. गोंडवाना कोयला क्षेत्र

यह भारत के कुल कोयला भंडार का लगभग 98% हिस्सा है। यह कोयला लगभग 250 मिलियन वर्ष पुराना है। यह मुख्य रूप से नदी घाटियों में पाया जाता है:
  • दामोदर घाटी: यह सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है। इसमें झरिया, रानीगंज, बोकारो और गिरिडीह शामिल हैं।
  • महानदी घाटी: तलचर (ओडिशा) और कोरबा (छत्तीसगढ़)।
  • गोदावरी घाटी: सिंगरैनी (तेलंगाना)।
  • सोन घाटी: सिंगरौली (मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश)।

2. टर्शियरी कोयला क्षेत्र

यह कोयला केवल 15-60 मिलियन वर्ष पुराना है। यह मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत में पाया जाता है:
  • मेघालय: चेरापूंजी, मौलांग।
  • असम: माकूम, नजीरा।
  • अरुणाचल प्रदेश: नामचिक-नामफुक।

भारत में कोयला क्षेत्र की समस्याएं

  • उच्च राख सामग्री: भारतीय कोयले में राख की मात्रा बहुत अधिक (30-45%) होती है, जिससे इसकी दक्षता कम हो जाती है।
  • आयात पर निर्भरता: अच्छी गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की कमी के कारण भारत को इस्पात उद्योग के लिए इसका आयात करना पड़ता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: कोयला खनन और जलाने से प्रदूषण बढ़ता है और भूमि क्षरण होता है।
  • परिवहन बाधाएं: खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयले का परिवहन एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है।
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