1. परिचय (Introduction)
परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) परमाणुओं के नाभिक (nucleus) में संग्रहीत ऊर्जा है। इस ऊर्जा को परमाणु विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया द्वारा छोड़ा जाता है, जिसमें एक भारी परमाणु के नाभिक (जैसे यूरेनियम) को विभाजित किया जाता है, जिससे भारी मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है। इस ऊष्मा का उपयोग पानी को भाप में बदलने के लिए किया जाता है, जो फिर टर्बाइन चलाकर बिजली पैदा करती है। यह ऊर्जा का एक गैर-नवीकरणीय, लेकिन स्वच्छ (Clean) स्रोत है क्योंकि यह ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करता है।
2. भारत में परमाणु ईंधन (Nuclear Fuels in India)
- यूरेनियम (Uranium): यह भारत में परमाणु ऊर्जा का मुख्य ईंधन है। इसके प्रमुख भंडार झारखंड की जादुगुड़ा खदानों, आंध्र प्रदेश और मेघालय में पाए जाते हैं। हालांकि, भारत के घरेलू भंडार इसकी जरूरतों के लिए अपर्याप्त हैं, इसलिए इसे कजाकिस्तान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आयात करना पड़ता है।
- थोरियम (Thorium): भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा थोरियम का भंडार है। यह मुख्य रूप से केरल के तटीय रेत में मोनाजाइट (Monazite) के रूप में पाया जाता है। भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा रणनीति थोरियम के उपयोग पर आधारित है।
3. भारत का तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (India’s Three-Stage Nuclear Power Programme)
इस कार्यक्रम की परिकल्पना डॉ. होमी जहांगीर भाभा द्वारा की गई थी ताकि भारत के विशाल थोरियम भंडारों का उपयोग करके देश को ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
- चरण 1: दाबित भारी जल रिएक्टर (Pressurized Heavy Water Reactors – PHWRs) का उपयोग, जो प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में और भारी जल को मॉडरेटर के रूप में उपयोग करते हैं। इस चरण से उप-उत्पाद के रूप में प्लूटोनियम-239 प्राप्त होता है।
- चरण 2: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (Fast Breeder Reactors – FBRs) का उपयोग। ये रिएक्टर ईंधन के रूप में प्लूटोनियम-239 और थोरियम का उपयोग करेंगे। ये खपत से अधिक ईंधन (प्लूटोनियम) का उत्पादन (“ब्रीड”) करते हैं।
- चरण 3: उन्नत भारी जल रिएक्टर (Advanced Heavy Water Reactors – AHWRs) का विकास। ये रिएक्टर मुख्य रूप से थोरियम-आधारित ईंधन चक्र पर चलेंगे।
4. भारत के प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Major Nuclear Power Plants in India)
| संयंत्र का नाम | राज्य | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| तारापुर (Tarapur) | महाराष्ट्र | भारत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र (1969)। |
| रावतभाटा (Rawatbhata) | राजस्थान | ‘राजस्थान परमाणु ऊर्जा केंद्र’ के रूप में भी जाना जाता है। |
| कलपक्कम (Kalpakkam) | तमिलनाडु | ‘मद्रास परमाणु ऊर्जा केंद्र’ के रूप में भी जाना जाता है। यहीं पर फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) स्थित है। |
| नरोरा (Narora) | उत्तर प्रदेश | गंगा नदी के किनारे स्थित है। |
| काकरापार (Kakrapar) | गुजरात | तापी नदी के पास स्थित है। |
| कैगा (Kaiga) | कर्नाटक | काली नदी के पास स्थित है। |
| कुडनकुलम (Kudankulam) | तमिलनाडु | रूस के सहयोग से निर्मित। यह भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। |
5. संबंधित संस्थान (Related Institutions)
- परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy – DAE): यह भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिए जिम्मेदार नोडल एजेंसी है।
- भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (Bhabha Atomic Research Centre – BARC): यह भारत का प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र है, जो मुंबई में स्थित है।
- न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL): यह भारत में सभी परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के डिजाइन, निर्माण और संचालन के लिए जिम्मेदार सरकारी उपक्रम है।
6. लाभ और चुनौतियाँ (Advantages and Challenges)
- लाभ: यह स्वच्छ ऊर्जा का एक विश्वसनीय स्रोत है जो 24×7 बिजली प्रदान कर सकता है। कम मात्रा में ईंधन से भारी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।
- चुनौतियाँ: परमाणु कचरे का सुरक्षित निपटान एक बड़ी चुनौती है। संयंत्रों की सुरक्षा, उच्च प्रारंभिक लागत और यूरेनियम ईंधन के लिए आयात पर निर्भरता अन्य प्रमुख चिंताएँ हैं।
7. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- परमाणु ऊर्जा परमाणु विखंडन पर आधारित है।
- डॉ. होमी जे. भाभा को ‘भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक’ कहा जाता है।
- भारत के पास थोरियम का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है।
- तारापुर (महाराष्ट्र) भारत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
- कुडनकुलम (तमिलनाडु) भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
- NPCIL भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का संचालन करता है।