परिचय: पौधों में नियंत्रण और समन्वय
जंतुओं के विपरीत, पौधों में तंत्रिका तंत्र या मांसपेशियां नहीं होती हैं। फिर भी, वे बाहरी उद्दीपनों (Stimuli) जैसे प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण, स्पर्श और रसायनों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं। पौधों में यह नियंत्रण और समन्वय मुख्य रूप से रासायनिक संकेतों (पादप हॉर्मोन) और वृद्धि-आधारित गतियों के माध्यम से होता है।
पौधों में गतियाँ (Movements in Plants)
पौधों की गतियों को दो मुख्य प्रकारों में बांटा जा सकता है:
1. अनुवर्ती गतियाँ (Tropic Movements)
ये वृद्धि-आधारित गतियाँ हैं जो उद्दीपन की दिशा पर निर्भर करती हैं। यदि गति उद्दीपन की ओर होती है, तो यह धनात्मक (positive) होती है, और यदि विपरीत होती है, तो ऋणात्मक (negative) होती है।
- प्रकाशानुवर्तन (Phototropism): प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया। पौधे का तना धनात्मक प्रकाशानुवर्ती (प्रकाश की ओर बढ़ता है) और जड़ ऋणात्मक प्रकाशानुवर्ती होती है। यह ऑक्सिन हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित होता है।
- गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism): गुरुत्वाकर्षण के प्रति प्रतिक्रिया। जड़ें धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती (नीचे की ओर बढ़ती हैं) और तना ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती होता है।
- जलानुवर्तन (Hydrotropism): जल के प्रति प्रतिक्रिया। जड़ें हमेशा जल स्रोत की ओर बढ़ती हैं, इसलिए वे धनात्मक जलानुवर्ती होती हैं।
- स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism): स्पर्श के प्रति प्रतिक्रिया। बेलों के प्रतान (tendrils) किसी सहारे को छूते ही उसके चारों ओर लिपट जाते हैं।
- रसानुवर्तन (Chemotropism): रसायनों के प्रति प्रतिक्रिया। परागण के दौरान पराग नलिका का बीजांड की ओर बढ़ना इसका एक उदाहरण है।
2. अनुकुंचनी गतियाँ (Nastic Movements)
ये गतियाँ वृद्धि पर निर्भर नहीं करतीं और उद्दीपन की दिशा से स्वतंत्र होती हैं। ये कोशिकाओं में जल की मात्रा में परिवर्तन (स्फीति दाब) के कारण होती हैं।
- कंपानुकुंचन (Thigmonasty): स्पर्श के प्रति प्रतिक्रिया। छुई-मुई (Mimosa pudica) के पौधे की पत्तियों को छूने पर वे तुरंत सिकुड़ जाती हैं।
- निशानुवर्तन (Nyctinasty): दिन और रात के चक्र के प्रति प्रतिक्रिया। कुछ पौधों की पत्तियाँ रात में मुड़ जाती हैं और दिन में खुल जाती हैं।
समन्वय में पादप हॉर्मोन की भूमिका
पादप हॉर्मोन (फाइटोहोर्मोन) रासायनिक संदेशवाहक हैं जो पौधों की वृद्धि, विकास और उद्दीपनों के प्रति प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं।
- ऑक्सिन: कोशिका वृद्धि और प्रकाशानुवर्तन को नियंत्रित करता है।
- जिबरेलिन: तने की वृद्धि और बीज अंकुरण को बढ़ावा देता है।
- साइटोकाइनिन: कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है।
- एब्सिसिक एसिड (ABA): वृद्धि को रोकता है, रंध्रों को बंद करता है और तनाव की स्थिति में पौधे की रक्षा करता है।
- एथिलीन: फलों को पकाता है और पत्तियों के झड़ने को नियंत्रित करता है।
दीप्तिकालिता (Photoperiodism)
यह पौधों की दिन और रात की अवधि (प्रकाश काल) के प्रति प्रतिक्रिया है, जो विशेष रूप से पुष्पन को प्रभावित करती है। इसके आधार पर पौधे तीन प्रकार के होते हैं:
- अल्प-प्रदीप्तकाली पौधे (Short-Day Plants): इन्हें फूलने के लिए एक निश्चित अवधि से कम प्रकाश की आवश्यकता होती है (जैसे, गुलदाउदी, सोयाबीन)।
- दीर्घ-प्रदीप्तकाली पौधे (Long-Day Plants): इन्हें फूलने के लिए एक निश्चित अवधि से अधिक प्रकाश की आवश्यकता होती है (जैसे, पालक, गेहूं)।
- दिवस-निरपेक्ष पौधे (Day-Neutral Plants): इनमें पुष्पन प्रकाश की अवधि पर निर्भर नहीं करता (जैसे, टमाटर, सूरजमुखी)।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (GK for Exams)
- पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता है।
- प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) ऑक्सिन हॉर्मोन के असमान वितरण के कारण होता है।
- छुई-मुई (Mimosa pudica) में गति कंपानुकुंचन (Thigmonasty) का उदाहरण है, जो स्फीति दाब में परिवर्तन के कारण होती है।
- जड़ों का नीचे की ओर बढ़ना धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन है।
- दीप्तिकालिता (Photoperiodism) पौधों में पुष्पन को नियंत्रित करने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
- तने का प्रकाश की ओर बढ़ना धनात्मक प्रकाशानुवर्तन है।