परिचय: सिग्मा (σ) बंध
सिग्मा (σ) बंध सबसे प्रबल प्रकार का सहसंयोजी बंध है। इसका निर्माण तब होता है जब दो परमाणुओं के कक्षक (orbitals) अंतर्नाभिकीय अक्ष (internuclear axis) पर सीधे (head-on) अतिव्यापन (overlap) करते हैं। यह अतिव्यापन अधिकतम होता है, जिससे यह एक बहुत मजबूत बंध बनता है।
सिग्मा बंध का निर्माण
सिग्मा बंध का निर्माण विभिन्न प्रकार के कक्षकों के अक्षीय अतिव्यापन से हो सकता है:
1. s-s अतिव्यापन (s-s Overlap)
यह तब बनता है जब दो परमाणुओं के अर्ध-भरे s-कक्षक अक्षीय रूप से अतिव्यापन करते हैं।
उदाहरण: हाइड्रोजन अणु (H₂) का बनना।
H (1s¹) + H (1s¹) → H-H (s-s σ बंध)
2. s-p अतिव्यापन (s-p Overlap)
यह तब बनता है जब एक परमाणु का अर्ध-भरा s-कक्षक दूसरे परमाणु के अर्ध-भरे p-कक्षक के साथ अक्षीय रूप से अतिव्यापन करता है।
उदाहरण: हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) अणु का बनना।
H (1s¹) + Cl (…3p⁵) → H-Cl (s-p σ बंध)
3. p-p अतिव्यापन (p-p Overlap)
यह तब बनता है जब दो परमाणुओं के अर्ध-भरे p-कक्षक अक्षीय रूप से (head-on) अतिव्यापन करते हैं।
उदाहरण: क्लोरीन अणु (Cl₂) का बनना।
Cl (…3p⁵) + Cl (…3p⁵) → Cl-Cl (p-p σ बंध)
सिग्मा बंध के गुण
- प्रबलता: यह पाई (π) बंध की तुलना में अधिक प्रबल होता है क्योंकि इसमें कक्षकों का अतिव्यापन अधिक होता है।
- स्वतंत्र घूर्णन: सिग्मा बंध के चारों ओर परमाणु या समूहों का स्वतंत्र घूर्णन (free rotation) संभव है।
- आणविक ज्यामिति: सिग्मा बंध अणु की मूल संरचना और ज्यामिति का निर्धारण करते हैं।
- अस्तित्व: किसी भी दो परमाणुओं के बीच बनने वाला पहला बंध हमेशा सिग्मा बंध होता है। एक द्विबंध में एक सिग्मा और एक पाई बंध होता है, जबकि एक त्रिबंध में एक सिग्मा और दो पाई बंध होते हैं।