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ज्वालामुखी का परिचय (Introduction to Volcanoes)

1. परिचय (Introduction)

मुख्य भूमि भारत काफी हद तक ज्वालामुखीय गतिविधि से रहित है क्योंकि यह किसी सक्रिय प्लेट सीमा पर स्थित नहीं है। हालांकि, भारत में ज्वालामुखीय गतिविधि का एक महत्वपूर्ण इतिहास और कुछ वर्तमान सक्रियता भी है, जो मुख्य रूप से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और दक्कन के पठार के भूवैज्ञानिक अतीत से जुड़ी है।

2. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ज्वालामुखी

भारत के एकमात्र सक्रिय और प्रसुप्त ज्वालामुखी इसी द्वीप श्रृंखला में स्थित हैं। इन ज्वालामुखियों का निर्माण भारतीय प्लेट के बर्मी प्लेट के नीचे प्रविष्ठन (Subduction) के कारण हुआ है, जिससे एक ज्वालामुखीय चाप (Volcanic Arc) का निर्माण हुआ है।

A. बैरन द्वीप (Barren Island)

  • स्थिति: यह अंडमान सागर में, पोर्ट ब्लेयर से लगभग 135 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित है।
  • स्थिति: यह भारत का एकमात्र प्रमाणित सक्रिय ज्वालामुखी (Confirmed Active Volcano) है।
  • प्रकार: यह एक मिश्रित ज्वालामुखी (Stratovolcano) है।
  • विस्फोट का इतिहास: लगभग 150 वर्षों तक निष्क्रिय रहने के बाद, यह 1991 में फिर से फट गया। तब से, इसमें समय-समय पर रुक-रुक कर गतिविधि होती रही है, जिसमें लावा और राख का उत्सर्जन शामिल है।

B. नारकोंडम द्वीप (Narcondam Island)

  • स्थिति: यह बैरन द्वीप के उत्तर में स्थित है।
  • स्थिति: इसे एक प्रसुप्त ज्वालामुखी (Dormant Volcano) माना जाता है। भूवैज्ञानिक अतीत में इसके फटने के प्रमाण हैं, लेकिन हाल के इतिहास में कोई विस्फोट दर्ज नहीं किया गया है।
  • महत्व: यह द्वीप नारकोंडम हॉर्नबिल नामक एक स्थानिक पक्षी प्रजाति का घर होने के लिए भी प्रसिद्ध है।

3. भारत की अन्य ज्वालामुखीय स्थलाकृतियाँ

A. दक्कन ट्रैप (Deccan Traps)

  • स्थान: यह महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों (गुजरात, मध्य प्रदेश) में फैला एक विशाल आग्नेय प्रांत है।
  • निर्माण: इसका निर्माण आज से लगभग 66 मिलियन वर्ष पूर्व क्रिटेशियस काल के अंत में बड़े पैमाने पर हुए दरारी उद्भेदन (Fissure Eruptions) से हुआ था।
  • प्रक्रिया: अत्यधिक तरल बेसाल्टिक लावा की कई परतें जमा होकर एक सीढ़ीदार (Trap) संरचना का निर्माण करती हैं। माना जाता है कि यह गतिविधि रियूनियन हॉटस्पॉट (Reunion Hotspot) के ऊपर से भारतीय प्लेट के गुजरने के कारण हुई थी।
  • महत्व: इन बेसाल्टिक चट्टानों के अपक्षय से उपजाऊ काली मिट्टी (Regur Soil) का निर्माण हुआ, जो कपास की खेती के लिए आदर्श है।

B. अन्य विलुप्त ज्वालामुखी

  • धिनोधर हिल्स (Dhinodhar Hills), गुजरात: कच्छ क्षेत्र में स्थित, यह एक विलुप्त ज्वालामुखी का अवशेष है।
  • तोशाम हिल्स (Tosham Hills), हरियाणा: अरावली पर्वतमाला का एक हिस्सा, जिसे एक विलुप्त ज्वालामुखी का अवशेष माना जाता है।

4. निगरानी और महत्व (Monitoring and Significance)

  • निगरानी: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India – GSI) और अन्य एजेंसियां बैरन द्वीप पर उपग्रहों और सामयिक यात्राओं के माध्यम से नियमित रूप से नजर रखती हैं।
  • वैज्ञानिक महत्व: ये ज्वालामुखी स्थल वैज्ञानिकों को प्लेट विवर्तनिकी, मैग्मा निर्माण और प्रविष्ठन क्षेत्र की प्रक्रियाओं का अध्ययन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं।
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