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जलमंडल और मानव स्वास्थ्य (Hydrosphere and Human Health)

1. परिचय: जल ही जीवन है

जलमंडल और मानव स्वास्थ्य के बीच का संबंध अविभाज्य है। “जल ही जीवन है” यह उक्ति इस गहरे संबंध को दर्शाती है। स्वच्छ और सुरक्षित पानी अच्छे स्वास्थ्य की आधारशिला है, जबकि दूषित पानी बीमारियों और मृत्यु का एक प्रमुख स्रोत हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, असुरक्षित पानी, स्वच्छता और हाथ की स्वच्छता की कमी के कारण हर साल लाखों मौतें होती हैं।

[Image of sources of water pollution]

2. जल जनित रोग (Water-Borne Diseases)

ये वे बीमारियाँ हैं जो रोगजनक सूक्ष्मजीवों से दूषित पानी पीने से फैलती हैं। ये बीमारियाँ विशेष रूप से उन क्षेत्रों में प्रचलित हैं जहाँ स्वच्छता की कमी है और सुरक्षित पेयजल तक पहुँच नहीं है।

A. जीवाणु (Bacterial) रोग

  • हैजा (Cholera): यह विब्रियो कोलेरी जीवाणु के कारण होता है और गंभीर दस्त और निर्जलीकरण का कारण बनता है।
  • टाइफाइड (Typhoid): यह साल्मोनेला टाइफी जीवाणु के कारण होता है और तेज बुखार, कमजोरी और पेट दर्द का कारण बनता है।
  • पेचिश (Dysentery): यह मुख्य रूप से शिगेला जीवाणु के कारण होता है और खूनी दस्त का कारण बनता है।

B. विषाणु (Viral) रोग

  • हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A): यह वायरस यकृत को प्रभावित करता है और पीलिया का कारण बनता है।
  • पोलियो (Polio): पोलियोवायरस के कारण होने वाली यह बीमारी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकती है और पक्षाघात का कारण बन सकती है।

C. प्रोटोजोआ (Protozoan) रोग

  • अमीबियासिस (Amoebiasis): यह एंटअमीबा हिस्टोलिटिका के कारण होता है और पेट में ऐंठन और दस्त का कारण बनता है।

3. रासायनिक संदूषण और स्वास्थ्य पर प्रभाव

जल स्रोतों में औद्योगिक और कृषि रसायनों के मिलने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

A. भारी धातु (Heavy Metals)

  • पारा (Mercury): औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाला पारा पानी में मिथाइलमरकरी में बदल जाता है, जो जैव आवर्धन (Biomagnification) के माध्यम से मछलियों में जमा हो जाता है। इसके सेवन से मिनामाता रोग होता है, जो एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार है।
  • आर्सेनिक (Arsenic): भूजल में प्राकृतिक रूप से मौजूद आर्सेनिक के लंबे समय तक संपर्क में रहने से त्वचा रोग, कैंसर और ब्लैकफुट रोग हो सकता है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में यह एक बड़ी समस्या है।
  • सीसा (Lead): पुराने पाइपों से पानी में घुलने वाला सीसा बच्चों में सीखने की अक्षमता और विकासात्मक समस्याओं का कारण बन सकता है।

B. नाइट्रेट (Nitrates)

कृषि में नाइट्रोजन उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से नाइट्रेट भूजल में रिस जाता है। उच्च नाइट्रेट स्तर वाले पानी का सेवन शिशुओं में “ब्लू बेबी सिंड्रोम” (मेथेमोग्लोबिनेमिया) का कारण बन सकता है, जिसमें रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है।

C. कीटनाशक (Pesticides)

कृषि अपवाह से पानी में मिलने वाले कीटनाशक कैंसर, तंत्रिका संबंधी विकारों और प्रजनन समस्याओं सहित कई दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हैं।

4. स्वच्छ जल और स्वच्छता का महत्व

स्वच्छ जल तक पहुँच मानव स्वास्थ्य में सुधार के लिए अपर्याप्त है यदि स्वच्छता प्रथाएँ खराब हैं। खुले में शौच (Open Defecation) जैसी प्रथाएँ जल स्रोतों को मल संदूषण से दूषित करती हैं, जिससे जल जनित रोगों का चक्र बना रहता है। इसलिए, स्वच्छ जल प्रदान करने के प्रयासों के साथ-साथ स्वच्छ भारत मिशन जैसे स्वच्छता और स्वच्छता सुधार कार्यक्रम चलाना महत्वपूर्ण है। भारत सरकार का जल जीवन मिशन हर ग्रामीण घर में नल से जल पहुँचाने का लक्ष्य रखता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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