1. परिचय: सुनामी क्या है?
सुनामी (Tsunami) एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ है “बंदरगाह की लहर” (Harbour Wave)। यह सामान्य समुद्री लहरों से बहुत अलग है, जो हवा द्वारा उत्पन्न होती हैं। सुनामी समुद्र के पानी के बड़े पैमाने पर अचानक विस्थापन के कारण उत्पन्न होने वाली विशाल लहरों की एक श्रृंखला है। ये लहरें खुले महासागर में बहुत तेज गति से यात्रा कर सकती हैं और तटीय क्षेत्रों में पहुंचने पर अत्यधिक विनाशकारी हो सकती हैं।
2. सुनामी के कारण (Causes of Tsunami)
सुनामी का मूल कारण समुद्र तल पर अचानक होने वाली कोई बड़ी हलचल है।
A. समुद्र के नीचे भूकंप (Submarine Earthquakes)
यह सुनामी का सबसे आम कारण है। जब सबडक्शन ज़ोन (Subduction Zones) में, जहाँ एक विवर्तनिक प्लेट दूसरी के नीचे खिसकती है, एक बड़ा भूकंप आता है, तो समुद्र तल ऊर्ध्वाधर रूप से विस्थापित हो सकता है। यह अचानक हलचल अपने ऊपर के पानी के पूरे स्तंभ को ऊपर उठाती है, जिससे सुनामी की लहरें उत्पन्न होती हैं।
B. पानी के नीचे भूस्खलन (Underwater Landslides)
महाद्वीपीय ढाल पर या ज्वालामुखियों के किनारों पर होने वाले बड़े पैमाने पर भूस्खलन भी भारी मात्रा में पानी को विस्थापित कर सकते हैं, जिससे स्थानीय सुनामी उत्पन्न हो सकती है।
C. ज्वालामुखी विस्फोट (Volcanic Eruptions)
समुद्र के भीतर या तट के पास बड़े, विस्फोटक ज्वालामुखी विस्फोट पानी को विस्थापित कर सकते हैं या विस्फोट के कारण काल्डेरा के ढहने से सुनामी आ सकती है। 1883 में क्राकाटोआ का विस्फोट इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण है।
3. सुनामी की विशेषताएँ और तंत्र
A. खुले महासागर में
खुले, गहरे महासागर में, सुनामी की गति बहुत अधिक (एक जेट विमान के बराबर, 800 किमी/घंटा तक) होती है। हालांकि, इसकी तरंग दैर्ध्य (wavelength) सैकड़ों किलोमीटर लंबी होती है, और इसकी ऊंचाई (amplitude) बहुत कम (एक मीटर से भी कम) होती है। इस कारण, गहरे समुद्र में मौजूद जहाजों के नीचे से यह अक्सर बिना पता चले गुजर जाती है।
B. तट के पास
जैसे ही सुनामी उथले तटीय जल में प्रवेश करती है, समुद्र तल के साथ घर्षण के कारण इसकी गति कम हो जाती है। ऊर्जा के संरक्षण के लिए, यह गति में कमी लहर की ऊंचाई में नाटकीय वृद्धि का कारण बनती है (इस प्रक्रिया को वेव शोलिंग (Wave Shoaling) कहा जाता है)। यह एक छोटी, तेज लहर से एक विशाल, विनाशकारी जल दीवार में बदल जाती है। अक्सर, लहर के आने से पहले समुद्र का पानी असामान्य रूप से पीछे हटता है, जिसे ‘ड्रॉबैक’ (Drawback) कहते हैं।
4. वैश्विक वितरण और जोखिम वाले क्षेत्र
- प्रशांत महासागर का ‘रिंग ऑफ फायर’: दुनिया की लगभग 80% सुनामी प्रशांत महासागर में आती है, क्योंकि यह “रिंग ऑफ फायर” से घिरा हुआ है, जो तीव्र भूकंपीय और ज्वालामुखी गतिविधि का एक क्षेत्र है। जापान, चिली, और संयुक्त राज्य अमेरिका का पश्चिमी तट उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में हैं।
- हिंद महासागर: 2004 की हिंद महासागर सुनामी ने इस क्षेत्र की भेद्यता को उजागर किया। यह सुनामी इंडोनेशिया के सुमात्रा के तट पर एक बड़े भूकंप के कारण उत्पन्न हुई थी और इसने 14 देशों में 230,000 से अधिक लोगों की जान ले ली थी।
5. सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Tsunami Early Warning Systems)
सुनामी के विनाशकारी प्रभाव को कम करने के लिए, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ महत्वपूर्ण हैं। इन प्रणालियों में भूकंपों का पता लगाने के लिए सिस्मोमीटर और समुद्र में सुनामी की लहरों की पुष्टि करने के लिए DART (डीप-ओशन असेसमेंट एंड रिपोर्टिंग ऑफ सुनामी) बुआ प्रणाली का एक नेटवर्क शामिल है। जानकारी को तुरंत तटीय क्षेत्रों तक पहुँचाया जाता है ताकि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का समय मिल सके। 2004 की आपदा के बाद, भारत ने हैदराबाद में भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (ITEWS) स्थापित की है।