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वन्यजीव और प्रजातियां (Wildlife and Species)

उत्तराखंड के वन्यजीव और प्रजातियां (UPSC/PCS केंद्रित नोट्स)

उत्तराखंड, अपनी विविध भौगोलिक संरचना, समृद्ध वन संपदा और विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के कारण, वन्यजीवों और वनस्पतियों की एक विशाल विविधता का घर है। यह राज्य भारत के प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट में से एक है। यहाँ के राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और संरक्षण आरक्षित क्षेत्र अनेक दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों को आश्रय प्रदान करते हैं।

उत्तराखंड के वन्यजीव और प्रजातियां: एक सिंहावलोकन

कुछ त्वरित तथ्य (Quick Facts):
  • उत्तराखंड में 6 राष्ट्रीय उद्यान, 7 वन्यजीव अभयारण्य, 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और 1 उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान हैं।
  • राज्य का राज्य पशु कस्तूरी मृग, राज्य पक्षी मोनाल, राज्य वृक्ष बुरांश और राज्य तितली कॉमन पीकॉक है।
  • जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जिसकी स्थापना 1936 में हुई थी।
  • नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  • राज्य में प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफैंट जैसी महत्वपूर्ण संरक्षण परियोजनाएँ चल रही हैं।

1. प्रमुख संरक्षित क्षेत्र (Major Protected Areas)

क. राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)

  • जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान:
    • स्थापना: 1936 (हेली नेशनल पार्क के रूप में)। 1952-57 तक रामगंगा नेशनल पार्क, 1957 से कॉर्बेट नेशनल पार्क।
    • क्षेत्रफल: 520.82 वर्ग किमी।
    • जिले: पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल।
    • प्रमुख वन्यजीव: बाघ (रॉयल बंगाल टाइगर), हाथी, तेंदुआ, हिरण (चीतल, सांभर, काकड़), मगरमच्छ, घड़ियाल।
    • विशेष: भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान और पहला टाइगर रिजर्व (1 अप्रैल 1973 को घोषित)। इसका प्रवेश द्वार ढिकाला (नैनीताल) है।
  • गोविंद राष्ट्रीय उद्यान:
    • स्थापना: 1980 (वन्यजीव विहार के रूप में 1955)।
    • क्षेत्रफल: 472 वर्ग किमी।
    • जिला: उत्तरकाशी।
    • प्रमुख वन्यजीव: हिम तेंदुआ, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, भरल, थार।
    • विशेष: स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट यहाँ संचालित है।
  • नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान:
    • स्थापना: 1982।
    • क्षेत्रफल: 624 वर्ग किमी।
    • जिला: चमोली।
    • प्रमुख वन्यजीव: हिम तेंदुआ, हिमालयी भालू, कस्तूरी मृग, भरल, मोनाल।
    • विशेष: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (1988)। यह नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है।
  • फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park):
    • स्थापना: 1982।
    • क्षेत्रफल: 87.5 वर्ग किमी।
    • जिला: चमोली।
    • प्रमुख विशेषता: अल्पाइन फूलों की विभिन्न प्रजातियाँ।
    • विशेष: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (2005)। खोज का श्रेय पर्वतारोही फ्रैंक स्माइथ को (1931)।
  • राजाजी राष्ट्रीय उद्यान:
    • स्थापना: 1983 (तीन वन्यजीव विहारों – राजाजी, मोतीचूर और चीला – को मिलाकर)।
    • क्षेत्रफल: 820.42 वर्ग किमी।
    • जिले: देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल।
    • प्रमुख वन्यजीव: हाथी, बाघ, तेंदुआ, हिरण, विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ।
    • विशेष: राज्य का दूसरा टाइगर रिजर्व (2015 में घोषित)।
  • गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान:
    • स्थापना: 1989।
    • क्षेत्रफल: 2390 वर्ग किमी।
    • जिला: उत्तरकाशी।
    • प्रमुख वन्यजीव: हिम तेंदुआ, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, भरल, हिमालयी थार।
    • विशेष: राज्य का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान।

ख. वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries)

  • गोविंद वन्यजीव विहार: (राष्ट्रीय उद्यान बनने से पूर्व) स्थापना 1955, उत्तरकाशी, क्षेत्रफल 485 वर्ग किमी (राष्ट्रीय उद्यान के अतिरिक्त)।
  • केदारनाथ वन्यजीव विहार: स्थापना 1972, चमोली एवं रुद्रप्रयाग, क्षेत्रफल 975 वर्ग किमी (राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव विहार)। कस्तूरी मृग के संरक्षण हेतु प्रसिद्ध।
  • अस्कोट वन्यजीव विहार: स्थापना 1986, पिथौरागढ़, क्षेत्रफल 599.93 वर्ग किमी। सर्वाधिक कस्तूरी मृग यहीं पाए जाते हैं।
  • सोनानदी वन्यजीव विहार: स्थापना 1987, पौड़ी गढ़वाल, क्षेत्रफल 301 वर्ग किमी। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का हिस्सा।
  • बिनसर वन्यजीव विहार: स्थापना 1988, अल्मोड़ा, क्षेत्रफल 47 वर्ग किमी।
  • मसूरी वन्यजीव विहार (विनोग माउंटेन क्वेल अभयारण्य): स्थापना 1993, देहरादून, क्षेत्रफल 10.82 वर्ग किमी (राज्य का सबसे छोटा)। पहाड़ी बटेर (माउंटेन क्वेल) के लिए प्रसिद्ध, जो अब विलुप्तप्राय है।
  • नंधौर वन्यजीव विहार: स्थापना 2012, नैनीताल एवं चम्पावत, क्षेत्रफल 269.95 वर्ग किमी।

ग. संरक्षण आरक्षित क्षेत्र (Conservation Reserves)

  • आसन वेटलैंड संरक्षण आरक्षित क्षेत्र: देहरादून (2005), प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण, राज्य का पहला रामसर स्थल (2020)।
  • झिलमिल झील संरक्षण आरक्षित क्षेत्र: हरिद्वार (2005), बारहसिंगा के लिए प्रसिद्ध।
  • पवलगढ़ संरक्षण आरक्षित क्षेत्र: नैनीताल (2012)।
  • नैना देवी हिमालयन बर्ड कंजर्वेशन रिजर्व: नैनीताल (2015)।

घ. उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान (High Altitude Zoo)

  • पं. गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान, नैनीताल: स्थापना 1984, जनता के लिए 1995 में खोला गया।

2. उत्तराखंड के प्रमुख वन्यजीव (Fauna)

क. स्तनधारी (Mammals)

  • बाघ (Royal Bengal Tiger): कॉर्बेट और राजाजी राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख आवास।
  • हाथी (Asiatic Elephant): कॉर्बेट, राजाजी और सोनानदी में।
  • तेंदुआ (Leopard): राज्य के अधिकांश वन क्षेत्रों में।
  • हिम तेंदुआ (Snow Leopard): उच्च हिमालयी क्षेत्रों में (गोविंद, नंदा देवी, गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान)।
  • कस्तूरी मृग (Musk Deer): राज्य पशु, अपनी कस्तूरी के लिए प्रसिद्ध, केदारनाथ, अस्कोट, गोविंद विहार में। कस्तूरी मृग प्रजनन एवं संरक्षण केंद्र कांचुला खर्क (चमोली, 1982) और महारुड़ी कस्तूरी मृग अनुसंधान केंद्र (बागेश्वर, 1977)।
  • हिमालयी काला भालू (Himalayan Black Bear) और भूरा भालू (Brown Bear)।
  • घुरल/गोरल (Goral), भरल/नीली भेड़ (Bharal/Blue Sheep), काकड़ (Barking Deer), सांभर, चीतल (Spotted Deer), थार (Himalayan Tahr)।
  • अन्य: लंगूर, बंदर, सियार, लोमड़ी, जंगली सुअर, सेही, उड़न गिलहरी।

ख. पक्षी (Birds/Avifauna)

  • मोनाल (Himalayan Monal): राज्य पक्षी, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। नर मोनाल को “डफिया” और मादा को “डफिना” कहते हैं।
  • कोकलास तीतर (Koklass Pheasant), चीड़ तीतर (Cheer Pheasant), हिमालयी कस्तूरी (Himalayan Snowcock)।
  • गिद्ध (Vultures): हिमालयी ग्रिफॉन, सिनेरियस वल्चर।
  • बाज, चील, उल्लू की विभिन्न प्रजातियाँ।
  • आसन बैराज और अन्य आर्द्रभूमियाँ प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • राज्य में पक्षियों की 600 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

ग. सरीसृप एवं उभयचर (Reptiles and Amphibians)

  • किंग कोबरा, भारतीय कोबरा, रसेल वाइपर, पिट वाइपर जैसे विषैले सर्प।
  • अजगर (Python)।
  • घड़ियाल और मगरमच्छ (कॉर्बेट की रामगंगा नदी में)।
  • विभिन्न प्रकार की छिपकलियाँ, कछुए और मेंढक।

3. उत्तराखंड की प्रमुख वनस्पतियाँ (Flora)

  • बुरांश (Rhododendron arboreum): राज्य वृक्ष, इसके फूल औषधीय गुणों से युक्त होते हैं और जूस बनाने में प्रयुक्त होते हैं।
  • देवदार (Deodar), चीड़ (Pine), साल (Sal), बांज (Oak), कैल (Kail), सुरई (Cypress) प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ।
  • अल्पाइन वनस्पतियाँ: उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ब्रह्मकमल (राज्य पुष्प), फेनकमल, भोजपत्र, विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियाँ।
  • औषधीय पौधे: अतीस, कुटकी, जटामांसी, सर्पगंधा, तेजपत्ता, घृतकुमारी आदि। राज्य में लगभग 500 प्रकार के औषधीय पौधे पाए जाते हैं।
  • फूलों की घाटी अपनी पुष्प विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

4. वन्यजीव संरक्षण के प्रयास एवं चुनौतियाँ

क. संरक्षण प्रयास

  • प्रोजेक्ट टाइगर: कॉर्बेट (1973) और राजाजी (2015) टाइगर रिजर्व।
  • प्रोजेक्ट एलीफैंट: 1992 से, हाथियों के संरक्षण के लिए।
  • स्नो लेपर्ड कंजर्वेशन प्रोजेक्ट: गोविंद राष्ट्रीय उद्यान में।
  • कस्तूरी मृग संरक्षण परियोजनाएँ: कांचुला खर्क और महारुड़ी में।
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून वन्यजीव अनुसंधान और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • वन विभाग द्वारा गश्त, अवैध शिकार विरोधी अभियान और जागरूकता कार्यक्रम।
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी (जैसे संयुक्त वन प्रबंधन)।

ख. चुनौतियाँ

  • अवैध शिकार (Poaching): बाघ, तेंदुए, कस्तूरी मृग आदि का उनके अंगों के लिए।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष: फसलों को नुकसान, पशुधन पर हमले और मानव जीवन को खतरा।
  • पर्यावास का विखंडन और नुकसान: सड़क निर्माण, जलविद्युत परियोजनाएँ, शहरीकरण और कृषि विस्तार के कारण।
  • वनाग्नि: वनों और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा।
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के वितरण और व्यवहार में परिवर्तन।
  • अवैध वन कटान और खनन।
  • जागरूकता और संसाधनों की कमी।

निष्कर्ष (Conclusion)

उत्तराखंड की समृद्ध वन्यजीव और वनस्पति विविधता एक अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है। इसका संरक्षण न केवल राज्य के पारिस्थितिक संतुलन के लिए, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। सतत विकास, प्रभावी संरक्षण रणनीतियों और जन भागीदारी के माध्यम से ही इस विरासत को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

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