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पर्यावरण मानक और सूचकांक: निगरानी और विनियमन

पर्यावरण की गुणवत्ता की निगरानी करने, प्रदूषण को नियंत्रित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए वैज्ञानिक रूप से निर्धारित मानक और सूचकांक महत्वपूर्ण उपकरण हैं। ये मानक उद्योगों, वाहनों और अन्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन के लिए कानूनी रूप से लागू करने योग्य सीमाएँ निर्धारित करते हैं। वहीं, सूचकांक (Indices) जटिल पर्यावरणीय डेटा को सरल और समझने योग्य प्रारूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे नीति निर्माताओं और आम जनता को पर्यावरण की स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है। भारत ने अपने विनियामक ढांचे के हिस्से के रूप में विभिन्न पर्यावरणीय मानकों और सूचकांकों को अपनाया है।
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  • वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI): 2014 में ‘एक संख्या-एक रंग-एक विवरण’ के आदर्श वाक्य के साथ लॉन्च किया गया। यह 8 प्रदूषकों को मापता है।
  • NAAQS (राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक): इसमें 12 प्रदूषकों के लिए मानक निर्धारित हैं।
  • CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड): एक सांविधिक संगठन, जिसका गठन जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत किया गया था।
  • BS-VI उत्सर्जन मानक: 1 अप्रैल, 2020 से पूरे भारत में लागू किए गए, जो BS-IV से सीधे एक बड़ी छलांग थी।
  • AQI श्रेणियाँ: 6 श्रेणियाँ हैं – अच्छी, संतोषजनक, मध्यम प्रदूषित, खराब, बहुत खराब, और गंभीर।

पर्यावरण मानक क्या हैं? (What are Environmental Standards?)

पर्यावरण मानक वे स्वीकृत सीमाएँ हैं जो पर्यावरण के विभिन्न घटकों (वायु, जल, मृदा) में प्रदूषकों की अनुमेय सांद्रता को परिभाषित करती हैं। इनका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य, कल्याण और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है। इन मानकों को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 जैसे विभिन्न कानूनों के तहत अधिसूचित और लागू किया जाता है।

भारत में वायु गुणवत्ता मानक (Air Quality Standards in India)

1. राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS)

ये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा निर्धारित मानक हैं जो पूरे देश में परिवेशी वायु (ambient air) की गुणवत्ता के लिए लक्ष्य निर्धारित करते हैं।
  • NAAQS के तहत 12 प्रदूषकों को अधिसूचित किया गया है: PM10, PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), ओजोन (O3), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), अमोनिया (NH3), लेड (Pb), बेंजीन (C6H6), बेंजो(a)पाइरीन, आर्सेनिक (As), और निकल (Ni)।
  • इन मानकों को औद्योगिक, आवासीय और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अलग-अलग निर्धारित किया गया है।

2. भारत स्टेज (BS) उत्सर्जन मानक

ये वे मानक हैं जो मोटर वाहनों सहित आंतरिक दहन इंजनों से प्रदूषकों के उत्पादन को नियंत्रित करते हैं।
  • ये यूरोपीय (Euro) उत्सर्जन मानकों पर आधारित हैं।
  • भारत ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक बड़े कदम के रूप में 1 अप्रैल, 2020 को BS-IV से सीधे BS-VI मानकों को अपनाया। BS-VI ईंधन में सल्फर की मात्रा बहुत कम (10 पीपीएम) होती है, जिससे वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में भारी कमी आती है।

भारत में जल गुणवत्ता मानक (Water Quality Standards in India)

जल की गुणवत्ता के लिए मानक मुख्य रूप से उसके उपयोग पर आधारित होते हैं, जैसे पीने योग्य पानी, नहाने का पानी, और सिंचाई के लिए पानी।
  • पेयजल मानक: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने ‘IS 10500:2012’ के तहत पीने के पानी के लिए मानक निर्धारित किए हैं, जिसमें भौतिक (जैसे रंग, गंध), रासायनिक (जैसे pH, कठोरता, भारी धातु) और जीवाणुवैज्ञानिक (जैसे कोलिफॉर्म) पैरामीटर शामिल हैं।
  • सतही जल मानक: CPCB ने विभिन्न उपयोगों के लिए सतही जल निकायों को वर्गीकृत किया है और प्रत्येक वर्ग के लिए मानदंड निर्धारित किए हैं, जिसमें घुलित ऑक्सीजन (DO), बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD), और कोलिफॉर्म की मात्रा प्रमुख संकेतक हैं।

प्रमुख पर्यावरणीय सूचकांक (Major Environmental Indices)

वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index – AQI)

AQI एक उपकरण है जिसका उपयोग आम जनता को हवा की गुणवत्ता की स्थिति को सरल तरीके से बताने के लिए किया जाता है।
  • यह आठ प्रमुख प्रदूषकों की सांद्रता को एक ही संख्या और रंग में परिवर्तित करता है: PM10, PM2.5, NO2, SO2, CO, O3, NH3, और Pb।
  • इसकी छह श्रेणियाँ हैं: अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), मध्यम प्रदूषित (101-200), खराब (201-300), बहुत खराब (301-400), और गंभीर (401-500)। प्रत्येक श्रेणी के अपने स्वास्थ्य प्रभाव होते हैं।

मानकों के कार्यान्वयन में संस्थागत ढाँचा

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC): यह भारत में पर्यावरण से संबंधित कानूनों और नीतियों के निर्माण के लिए नोडल एजेंसी है।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): यह MoEFCC को तकनीकी सलाह देता है, मानक निर्धारित करता है और राज्य बोर्डों की गतिविधियों का समन्वय करता है।
  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs): ये अपने-अपने राज्यों में पर्यावरण कानूनों को लागू करने और निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह

मानकों और सूचकांकों के होने के बावजूद, भारत में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है। मुख्य चुनौतियों में अपर्याप्त निगरानी नेटवर्क, प्रवर्तन की कमजोरी, राज्यों के बीच समन्वय की कमी और सार्वजनिक जागरूकता का अभाव शामिल है। आगे की राह के लिए एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, वास्तविक समय निगरानी नेटवर्क का विस्तार, प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना और ‘नागरिक विज्ञान’ (Citizen Science) के माध्यम से सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देना आवश्यक है।
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