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जैव विविधता: परिभाषा, स्तर और महत्त्व

जैव विविधता (Biodiversity), जो ‘जैविक विविधता’ (Biological Diversity) का संक्षिप्त रूप है, पृथ्वी पर मौजूद जीवन की विविधता और परिवर्तनशीलता को संदर्भित करती है। इसमें एक क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु, पौधे, कवक और सूक्ष्मजीव शामिल हैं। यह शब्द समाजशास्त्री एडवर्ड विल्सन (Edward Wilson) द्वारा लोकप्रिय किया गया था। जैव विविधता केवल प्रजातियों की संख्या नहीं है, बल्कि यह जीवन के सभी स्तरों पर मौजूद विविधता को समाहित करती है, जो एक स्वस्थ और कार्यात्मक पारिस्थितिकी तंत्र का आधार है।
प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
  • अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस: 22 मई को मनाया जाता है।
  • जैव विविधता के स्तर: आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिकी तंत्र।
  • हॉटस्पॉट की अवधारणा: नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) द्वारा 1988 में दी गई।
  • भारत के जैव विविधता हॉटस्पॉट: हिमालय, पश्चिमी घाट और श्री लंका, इंडो-बर्मा क्षेत्र, और सुंडालैंड।
  • जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD): यह 1992 में रियो डी जनेरियो में हुए पृथ्वी शिखर सम्मेलन का परिणाम है।
  • भारत का जैव विविधता अधिनियम: 2002 में पारित किया गया।

जैव विविधता के स्तर (Levels of Biodiversity)

जैव विविधता को तीन मुख्य स्तरों पर समझा जा सकता है:

1. आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity)

यह एक ही प्रजाति के विभिन्न जीवों के बीच जीनों में पाई जाने वाली विविधता को संदर्भित करती है। यह विविधता प्रजातियों को बदलते पर्यावरण के प्रति अनुकूलन करने में सक्षम बनाती है। अधिक आनुवंशिक विविधता का अर्थ है कि प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा कम है।
  • उदाहरण: भारत में चावल की 50,000 से अधिक आनुवंशिक रूप से भिन्न किस्में और आम की 1,000 से अधिक किस्में पाई जाती हैं।

2. प्रजातीय विविधता (Species Diversity)

यह किसी दिए गए क्षेत्र में मौजूद विभिन्न प्रजातियों की संख्या और उनकी सापेक्ष बहुतायत को संदर्भित करती है। यह जैव विविधता का सबसे आम स्तर है।
  • उदाहरण: पश्चिमी घाट में उभयचर (Amphibian) प्रजातियों की विविधता पूर्वी घाट की तुलना में बहुत अधिक है।

3. पारिस्थितिकी तंत्र विविधता (Ecosystem Diversity)

यह एक भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिकी तंत्रों की विविधता को संदर्भित करती है। इसमें आवासों, जैविक समुदायों और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं की विविधता शामिल है।
  • उदाहरण: भारत में रेगिस्तान, वर्षावन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ, घास के मैदान और अल्पाइन घास के मैदान जैसे विविध पारिस्थितिकी तंत्र हैं।

जैव विविधता का महत्व (Importance of Biodiversity)

जैव विविधता मानव अस्तित्व और कल्याण के लिए अपरिहार्य है। इसका महत्व पारिस्थितिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझा जा सकता है।

पारिस्थितिक सेवाएं (Ecological Services)

  • पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन: प्रत्येक प्रजाति की पारिस्थितिकी तंत्र में एक भूमिका होती है, जो खाद्य जाल को स्थिर रखती है।
  • परागण (Pollination): मधुमक्खियाँ, तितलियाँ और अन्य कीड़े फसलों के परागण के लिए आवश्यक हैं, जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • जलवायु विनियमन: वन कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके जलवायु को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
  • मृदा निर्माण और संरक्षण: सूक्ष्मजीव और पौधे मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और कटाव को रोकते हैं।

आर्थिक लाभ (Economic Benefits)

  • भोजन, चारा, ईंधन: मानव अपनी अधिकांश आवश्यकताओं के लिए सीधे तौर पर जैव विविधता पर निर्भर है।
  • औषधीय संसाधन: कई आधुनिक दवाएं (जैसे एस्पिरिन, मॉर्फिन) पौधों से प्राप्त की जाती हैं।
  • पारिस्थितिकी पर्यटन (Ecotourism): राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य पर्यटन के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करते हैं।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व (Social and Cultural Importance)

जैव विविधता का सौंदर्य और आध्यात्मिक मूल्य है। कई संस्कृतियों में, पौधों और जानवरों को पवित्र माना जाता है (जैसे भारत में पीपल और बाघ)।

जैव विविधता के लिए खतरे (Threats to Biodiversity)

मानवीय गतिविधियों के कारण जैव विविधता अभूतपूर्व दर से कम हो रही है। प्रमुख खतरों को “The Evil Quartet” के रूप में जाना जाता है:
  1. आवासीय क्षति और विखंडन (Habitat Loss and Fragmentation): वनों की कटाई, शहरीकरण और कृषि विस्तार के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
  2. अति-दोहन (Over-exploitation): भोजन, दवा और व्यापार के लिए प्रजातियों का अत्यधिक शिकार और कटाई उन्हें विलुप्त होने के कगार पर ले जा रही है।
  3. विदेशी प्रजातियों का आक्रमण (Alien Species Invasion): बाहरी प्रजातियां स्थानीय प्रजातियों के लिए खतरा बन जाती हैं। उदाहरण: जलकुंभी (Water Hyacinth)।
  4. सह-विलुप्तता (Co-extinctions): जब एक प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो उस पर निर्भर अन्य प्रजातियां भी विलुप्त हो जाती हैं।
इनके अलावा, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण भी जैव विविधता के लिए गंभीर खतरे हैं।

जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biodiversity)

जैव विविधता के संरक्षण के लिए दो मुख्य रणनीतियाँ हैं:

1. स्व-स्थाने संरक्षण (In-situ Conservation)

इसमें प्रजातियों का उनके प्राकृतिक आवास में ही संरक्षण किया जाता है। यह सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
  • उदाहरण: राष्ट्रीय उद्यान (National Parks), वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries), जीवमंडल भंडार (Biosphere Reserves), और पवित्र उपवन (Sacred Groves)।

2. बाह्य-स्थाने संरक्षण (Ex-situ Conservation)

इसमें संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर एक विशेष स्थान पर संरक्षित किया जाता है।
  • उदाहरण: चिड़ियाघर (Zoos), वानस्पतिक उद्यान (Botanical Gardens), जीन बैंक (Gene Banks), और बीज बैंक (Seed Banks)।

आगे की राह

जैव विविधता का संरक्षण एक वैश्विक जिम्मेदारी है। जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD), आइची लक्ष्य (Aichi Targets) और अब कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौते इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। भारत ने भी जैव विविधता अधिनियम, 2002 के माध्यम से एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार किया है। संरक्षण के प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना और सतत विकास को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।
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