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कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस: जीवाश्म ईंधन

कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, जिन्हें सामूहिक रूप से जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) कहा जाता है, औद्योगिक क्रांति के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था की ऊर्जा प्रणाली की आधारशिला रहे हैं। ये अनवीकरणीय संसाधन हैं जो लाखों वर्षों में प्राचीन जैविक पदार्थों के अपघटन से बनते हैं। अपने उच्च ऊर्जा घनत्व और सापेक्षिक सुलभता के कारण, उन्होंने आधुनिक सभ्यता को शक्ति प्रदान की है। हालांकि, उनके दहन से होने वाले गंभीर पर्यावरणीय परिणाम, विशेष रूप से वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन, आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं, जो एक स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर संक्रमण को अनिवार्य बनाते हैं।
प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
  • कोयले के प्रकार: कार्बन सामग्री के आधार पर – एन्थ्रेसाइट (सर्वश्रेष्ठ), बिटुमिनस, लिग्नाइट, और पीट (निम्नतम)।
  • भारत का कोयला: भारत का अधिकांश कोयला गोंडवाना प्रकार का है, जो गैर-कोकिंग ग्रेड का बिटुमिनस कोयला है।
  • पेट्रोलियम रिफाइनिंग: कच्चे तेल को आंशिक आसवन (Fractional Distillation) द्वारा पेट्रोल, डीजल, केरोसिन जैसे विभिन्न उत्पादों में अलग किया जाता है।
  • प्राकृतिक गैस: मुख्य रूप से मीथेन (CH4) से बनी होती है और इसे जीवाश्म ईंधनों में सबसे स्वच्छ माना जाता है।
  • प्रमुख भारतीय क्षेत्र: मुंबई हाई (अपतटीय पेट्रोलियम), डिगबोई, असम (सबसे पुराना तेल क्षेत्र), और झरिया, झारखंड (प्रमुख कोयला क्षेत्र)।

कोयला (Coal)

कोयला एक ठोस, काला या भूरा-काला अवसादी चट्टान है जो मुख्य रूप से कार्बन और हाइड्रोकार्बन से बना होता है।

निर्माण और प्रकार

कोयले का निर्माण तब हुआ जब लाखों साल पहले दलदली वनस्पतियां मर गईं और तलछट की परतों के नीचे दब गईं, जहाँ गर्मी और दबाव ने उन्हें धीरे-धीरे कोयले में बदल दिया।
  • एन्थ्रेसाइट: सबसे कठोर और उच्चतम कार्बन सामग्री वाला कोयला। यह सबसे स्वच्छ जलता है।
  • बिटुमिनस: सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला प्रकार, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन और कोकिंग कोल के रूप में इस्पात निर्माण में किया जाता है।
  • लिग्नाइट: नरम, भूरे रंग का कोयला जिसमें नमी की मात्रा अधिक होती है।
  • पीट: कोयला निर्माण का प्रारंभिक चरण, इसमें कार्बन की मात्रा सबसे कम होती है।

भारत में वितरण

भारत के कोयला भंडार मुख्य रूप से दो भूवैज्ञानिक युगों में पाए जाते हैं: गोंडवाना (~200 मिलियन वर्ष पुराना) और तृतीयक (~55 मिलियन वर्ष पुराना)। गोंडवाना कोयला, जो भारत के कुल भंडार का 98% है, मुख्य रूप से दामोदर, महानदी और गोदावरी नदी घाटियों में स्थित है।

पेट्रोलियम (Petroleum)

पेट्रोलियम, जिसे कच्चा तेल भी कहा जाता है, एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला, पीला-काला तरल है जो हाइड्रोकार्बन जमा में पाया जाता है।

निर्माण और निष्कर्षण

इसका निर्माण प्राचीन समुद्री सूक्ष्मजीवों (जैसे शैवाल और प्लवक) के अवशेषों से होता है जो समुद्र तल पर दब गए और लाखों वर्षों में गर्मी और दबाव के कारण तेल और गैस में परिवर्तित हो गए। इसे जमीन या समुद्र तल के नीचे ड्रिलिंग करके निकाला जाता है।

उपयोग

कच्चे तेल को रिफाइनरियों में संसाधित करके विभिन्न उत्पादों में बदला जाता है, जिनमें शामिल हैं:
  • परिवहन ईंधन: पेट्रोल, डीजल, जेट ईंधन।
  • घरेलू उपयोग: LPG (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस), केरोसिन।
  • औद्योगिक उत्पाद: प्लास्टिक, स्नेहक (lubricants), पेट्रोकेमिकल्स।

प्राकृतिक गैस (Natural Gas)

प्राकृतिक गैस एक हाइड्रोकार्बन गैस मिश्रण है जिसमें मुख्य रूप से मीथेन होता है, लेकिन इसमें आमतौर पर अन्य उच्च एल्केन की अलग-अलग मात्रा और कभी-कभी कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन और हाइड्रोजन सल्फाइड का एक छोटा प्रतिशत शामिल होता है।

लाभ और उपयोग

  • स्वच्छ ईंधन: जलने पर यह कोयले या तेल की तुलना में बहुत कम CO2 और प्रदूषक उत्सर्जित करती है, इसलिए इसे अक्सर एक ‘ब्रिज फ्यूल’ (bridge fuel) के रूप में देखा जाता है जो नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण में मदद करता है।
  • उपयोग: बिजली उत्पादन, औद्योगिक और घरेलू हीटिंग, और वाहनों के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) के रूप में।

पर्यावरणीय प्रभाव और आगे की राह

जीवाश्म ईंधनों का निष्कर्षण और दहन वायु प्रदूषण (PM2.5, SOx, NOx), जल प्रदूषण (तेल रिसाव, एसिड माइन ड्रेनेज), भूमि क्षरण और सबसे महत्वपूर्ण रूप से, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का प्रमुख स्रोत है, जो ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है।

इन प्रभावों को देखते हुए, दुनिया भर में जीवाश्म ईंधन से दूर एक ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में बड़े पैमाने पर निवेश, ऊर्जा दक्षता में सुधार, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक है। भारत के पंचामृत लक्ष्य इस वैश्विक प्रयास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर देश की निर्भरता को व्यवस्थित रूप से कम करना है।
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