प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
- प्रमुख संघर्ष प्रजातियां: भारत में हाथी, बाघ, तेंदुआ, नीलगाय, जंगली सूअर और बंदर संघर्ष में सबसे अधिक शामिल हैं।
- प्रोजेक्ट RE-HAB (मधुमक्खी बाड़): यह मानव बस्तियों में हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए मधुमक्खियों के बक्से की बाड़ का उपयोग करने की एक पहल है, जिसे खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा शुरू किया गया है।
- राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL): वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय। यह वन्यजीव संरक्षण से संबंधित सभी मामलों पर शीर्ष सलाहकार निकाय है।
- मुआवजा योजनाएं: राज्य सरकारें HWC के पीड़ितों (फसल क्षति, पशुधन की हानि, मानव मृत्यु या चोट) को वित्तीय मुआवजा प्रदान करती हैं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण (Causes of HWC)
1. आवास का क्षरण और विखंडन
यह HWC का सबसे प्रमुख कारण है। कृषि, शहरीकरण, खनन और सड़क तथा रेलवे जैसी रैखिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वनों की कटाई से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं और छोटे, अलग-थलग टुकड़ों में बंट रहे हैं। इससे वन्यजीव भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों में आने के लिए मजबूर हो जाते हैं।2. मानव और पशुधन की जनसंख्या में वृद्धि
मानव आबादी बढ़ने से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता है। साथ ही, संरक्षित क्षेत्रों के आसपास पशुधन की बढ़ती आबादी तेंदुओं जैसे शिकारियों को आकर्षित करती है, जिससे संघर्ष होता है।3. वन्यजीव गलियारों का विनाश
वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors) वे संकीर्ण भू-पट्टियाँ हैं जो दो बड़े वन क्षेत्रों को जोड़ती हैं, जिससे जानवरों की आवाजाही संभव होती है। इन गलियारों पर अतिक्रमण या अवरोध जानवरों को मानव बस्तियों से गुजरने के लिए मजबूर करता है।4. कृषि पद्धतियों में बदलाव
संरक्षित क्षेत्रों के पास नकदी फसलों (जैसे गन्ना, केला) की खेती जानवरों को आकर्षित करती है, जिससे फसल पर हमले की घटनाएं बढ़ जाती हैं।5. वन्यजीवों की आबादी में वृद्धि
सफल संरक्षण प्रयासों के कारण, कुछ प्रजातियों (जैसे हाथी, बाघ) की आबादी बढ़ी है। सीमित आवास में बढ़ती आबादी उन्हें संरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकलने के लिए मजबूर करती है, जिससे संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है।संघर्ष के प्रभाव (Impacts of Conflict)
- मानव जीवन और संपत्ति का नुकसान: हर साल HWC के कारण कई लोग मारे जाते हैं या घायल हो जाते हैं। फसल क्षति और पशुधन का शिकार ग्रामीण समुदायों के लिए गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बनता है।
- वन्यजीवों की प्रतिशोधात्मक हत्या: अपनी संपत्ति की रक्षा के लिए या भय के कारण, लोग अक्सर जानवरों को जहर देकर, फंदा लगाकर या मारकर बदला लेते हैं, जिससे संकटग्रस्त प्रजातियों को और भी अधिक खतरा होता है।
- संरक्षण के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण: बार-बार होने वाले संघर्ष स्थानीय समुदायों में संरक्षण प्रयासों के प्रति आक्रोश और विरोध पैदा कर सकते हैं, जिससे उनकी भागीदारी कम हो जाती है।
शमन और प्रबंधन रणनीतियाँ
HWC का प्रबंधन करने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो मानव सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों को संतुलित करे।- आवास सुधार: वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवासों के भीतर रखने के लिए संरक्षित क्षेत्रों में जल निकायों का विकास करना और चारे की उपलब्धता में सुधार करना।
- बाड़ लगाना और अवरोधक: संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए सौर ऊर्जा चालित बाड़, खाईं और दीवारों का निर्माण करना। प्रोजेक्ट RE-HAB जैसी नवीन पहलें भी प्रभावी हैं।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली: जानवरों की आवाजाही को ट्रैक करने और स्थानीय समुदायों को समय पर अलर्ट भेजने के लिए रेडियो कॉलर और सेंसर का उपयोग करना।
- सामुदायिक भागीदारी: प्रबंधन रणनीतियों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में स्थानीय समुदायों को शामिल करना। उन्हें संरक्षण के लाभों में भागीदार बनाना (जैसे इको-टूरिज्म)।
- त्वरित और पर्याप्त मुआवजा: नुकसान के लिए समय पर और उचित मुआवजा प्रदान करने से प्रतिशोध की भावना कम हो सकती है और संरक्षण के प्रति समर्थन बढ़ सकता है।