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पारिस्थितिक अंतःक्रिया और संतुलन

एक पारिस्थितिकी तंत्र केवल जीवों और उनके भौतिक पर्यावरण का संग्रह नहीं है, बल्कि यह अंतःक्रियाओं का एक जटिल जाल है। ये अंतःक्रियाएं (Interactions) ही तय करती हैं कि ऊर्जा और पोषक तत्व कैसे प्रवाहित होते हैं और प्रजातियों की आबादी कैसे नियंत्रित होती है। इन अंतःक्रियाओं के परिणामस्वरूप पारिस्थितिकी तंत्र में एक गतिशील संतुलन बनता है, जिसे पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता (Ecosystem Stability) कहते हैं। यह स्थिरता किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र की बाहरी गड़बड़ी (disturbance) के बावजूद अपनी संरचना और कार्यों को बनाए रखने की क्षमता को दर्शाती है।
प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
  • सहजीविता (Mutualism): दोनों प्रजातियों को लाभ (+,+)। उदाहरण: लाइकेन।
  • सहभोजिता (Commensalism): एक को लाभ, दूसरी अप्रभावित (+,0)। उदाहरण: आम के पेड़ पर ऑर्किड।
  • प्रतिस्पर्धा (Competition): दोनों प्रजातियों को हानि (-,-)।
  • परभक्षण (Predation): एक को लाभ, दूसरे को हानि (+,-)।
  • कीस्टोन प्रजाति (Keystone Species): वह प्रजाति जो अपनी कम संख्या के बावजूद पारिस्थितिकी तंत्र पर एक बड़ा प्रभाव डालती है।
  • विविधता-स्थिरता परिकल्पना (Diversity-Stability Hypothesis): अधिक जैव विविधता वाले पारिस्थितिकी तंत्र आमतौर पर अधिक स्थिर होते हैं।
  • पारिस्थितिकी तंत्र स्थिरता के दो घटक हैं: प्रतिरोध (Resistance) और लचीलापन (Resilience)।

पारिस्थितिक अंतःक्रिया के प्रकार (Types of Ecological Interactions)

जैविक समुदायों में प्रजातियां एक-दूसरे से कई तरह से जुड़ी होती हैं। इन अंतःक्रियाओं को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

1. धनात्मक अंतःक्रिया (Positive Interactions)

इसमें कम से कम एक प्रजाति को लाभ होता है और किसी को भी हानि नहीं होती।

सहजीविता (Mutualism) (+,+)

यह एक ऐसी अंतःक्रिया है जिसमें दोनों सहयोगी प्रजातियों को लाभ होता है। यह संबंध अक्सर इतना गहरा होता है कि दोनों प्रजातियां एक-दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकतीं।
  • लाइकेन (Lichens): यह शैवाल (Algae) और कवक (Fungi) के बीच एक सहजीवी संबंध है। शैवाल प्रकाश संश्लेषण से भोजन बनाता है, जबकि कवक आश्रय और पोषक तत्व प्रदान करता है।
  • माइकोराइजा (Mycorrhiza): उच्च वर्गीय पौधों की जड़ों और कवक के बीच का संबंध।

सहभोजिता (Commensalism) (+,0)

इसमें एक प्रजाति को लाभ होता है जबकि दूसरी प्रजाति न तो लाभान्वित होती है और न ही उसे कोई हानि होती है।
  • आम के पेड़ पर ऑर्किड (Orchid on Mango Tree): ऑर्किड को रहने के लिए जगह मिल जाती है, लेकिन आम के पेड़ पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता।
  • व्हेल की पीठ पर बार्नेकल (Barnacles on Whale): बार्नेकल को आश्रय और भोजन मिलता है, जबकि व्हेल अप्रभावित रहती है।

2. ऋणात्मक अंतःक्रिया (Negative Interactions)

इसमें कम से कम एक प्रजाति को हानि होती है।

शोषण (Exploitation) (+,-)

इसमें एक प्रजाति दूसरे को नुकसान पहुंचाकर लाभ उठाती है।
  • परभक्षण (Predation): एक जीव (परभक्षी) दूसरे जीव (शिकार) को मारकर खाता है। यह प्रकृति में ऊर्जा स्थानांतरण का एक महत्वपूर्ण तरीका है और शिकार की आबादी को नियंत्रित रखता है। उदाहरण: शेर और हिरण, बाज और सांप।
  • परजीविता (Parasitism): एक जीव (परजीवी) दूसरे जीव (मेजबान) के शरीर के अंदर या बाहर रहकर उससे पोषण प्राप्त करता है, जिससे मेजबान कमजोर हो जाता है। उदाहरण: मानव आंत में फीताकृमि, जूँ।

प्रतिस्पर्धा (Competition) (-,-)

जब दो या दो से अधिक जीव एक ही सीमित संसाधन (जैसे भोजन, स्थान, साथी) का उपयोग करते हैं, तो उनके बीच प्रतिस्पर्धा होती है। यह दोनों के लिए हानिकारक है क्योंकि यह उनकी वृद्धि और उत्तरजीविता को कम कर सकती है। गॉस का प्रतिस्पर्धी बहिष्करण सिद्धांत (Gause’s Competitive Exclusion Principle) कहता है कि एक ही संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाली दो प्रजातियां एक साथ नहीं रह सकतीं।

असहभोजिता (Amensalism) (-,0)

एक ऐसी अंतःक्रिया जिसमें एक प्रजाति को हानि होती है, जबकि दूसरी अप्रभावित रहती है।
  • पेनिसिलियम कवक और बैक्टीरिया: पेनिसिलियम पेनिसिलिन नामक रसायन स्रावित करता है जो उसके आस-पास के बैक्टीरिया को मार देता है, जबकि कवक स्वयं अप्रभावित रहता है।

पारिस्थितिकी तंत्र स्थिरता (Ecosystem Stability)

स्थिरता का अर्थ यह नहीं है कि पारिस्थितिकी तंत्र अपरिवर्तित रहता है, बल्कि यह उसकी गड़बड़ी से निपटने की क्षमता है। इसके दो मुख्य पहलू हैं:
  • प्रतिरोध (Resistance): किसी पारिस्थितिकी तंत्र की बाहरी गड़बड़ी (जैसे सूखा, बाढ़, आग) के बावजूद अपनी संरचना और कार्यप्रणाली में परिवर्तन का विरोध करने की क्षमता। एक विविध उष्णकटिबंधीय वर्षावन में उच्च प्रतिरोध होता है।
  • लचीलापन (Resilience): किसी गड़बड़ी के बाद अपनी मूल स्थिति में वापस आने की पारिस्थितिकी तंत्र की क्षमता। घास के मैदानों में आग लगने के बाद जल्दी ठीक होने की उच्च क्षमता होती है, इसलिए वे अधिक लचीले होते हैं।
विविधता-स्थिरता परिकल्पना के अनुसार, जिस पारिस्थितिकी तंत्र में प्रजातियों की विविधता अधिक होती है, वह आमतौर पर अधिक स्थिर होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक जटिल खाद्य जाल में, यदि एक प्रजाति गायब हो जाती है, तो अन्य प्रजातियां उसकी भूमिका निभा सकती हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का पतन नहीं होता।

स्थिरता में कीस्टोन प्रजाति की भूमिका (Role of Keystone Species in Stability)

कीस्टोन प्रजाति वह प्रजाति है जो पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना और कार्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इनकी संख्या कम हो सकती है, लेकिन इनका प्रभाव बहुत अधिक होता है।
  • बाघ (Tiger): एक शीर्ष परभक्षी के रूप में, बाघ शाकाहारी जीवों की आबादी को नियंत्रित करता है। यदि बाघों को हटा दिया जाए, तो शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ जाएगी, जिससे वनस्पति का अत्यधिक विनाश होगा और पूरा पारिस्थितिकी तंत्र ध्वस्त हो सकता है।
  • समुद्री ऊदबिलाव (Sea Otter): यह समुद्री अर्चिन को खाता है। यदि ऊदबिलाव न हों, तो अर्चिन की आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ जाएगी और वे केल्प वनों (Kelp Forests) को नष्ट कर देंगे, जो कई अन्य प्रजातियों के लिए आवास हैं।

मानवीय हस्तक्षेप और पारिस्थितिक स्थिरता पर प्रभाव

मानवीय गतिविधियां प्राकृतिक अंतःक्रियाओं को बाधित कर रही हैं और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को खतरे में डाल रही हैं।
  • आवास विखंडन: सड़कों और शहरों के निर्माण से प्रजातियों के बीच प्राकृतिक संपर्क टूट जाता है।
  • आक्रामक विदेशी प्रजातियों का प्रवेश: भारत में लैंटाना (Lantana camara) और जलकुंभी (Water Hyacinth) जैसी प्रजातियों ने स्थानीय प्रजातियों को विस्थापित कर दिया है, जिससे प्रतिस्पर्धा का संतुलन बिगड़ गया है।
  • प्रदूषण: कीटनाशक जैसे रसायन जैव-आवर्धन (Biomagnification) के माध्यम से खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर जमा हो जाते हैं, जिससे बाज और गिद्ध जैसे पक्षियों की आबादी कम हो गई है।
  • जलवायु परिवर्तन: यह प्रजातियों के प्रवास पैटर्न और प्रजनन चक्र को बदल रहा है, जिससे सहजीवी संबंध (जैसे परागण) बाधित हो रहे हैं।

आगे की राह: संतुलन की बहाली

पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को बनाए रखना मानव कल्याण के लिए आवश्यक है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित प्रबंधन: केवल एक प्रजाति के संरक्षण के बजाय पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और उसकी अंतःक्रियाओं के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना।
  • आवास गलियारों (Habitat Corridors) का निर्माण: खंडित आवासों को जोड़ना ताकि प्रजातियां स्वतंत्र रूप से घूम सकें।
  • आक्रामक प्रजातियों का नियंत्रण: विदेशी आक्रामक प्रजातियों के प्रसार को रोकने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए सख्त नीतियां बनाना।
  • संरक्षण प्रयास: प्रोजेक्ट टाइगर जैसे कार्यक्रम कीस्टोन प्रजातियों की रक्षा करके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिर करने में मदद करते हैं।
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