प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
- टुंड्रा: इसे ‘वृक्षहीन भूमि’ भी कहते हैं। इसकी मुख्य विशेषता स्थायी तुषार (Permafrost) है।
- टैगा (बोरियल वन): यह विश्व का सबसे बड़ा स्थलीय बायोम है, जिसमें शंकुधारी (Coniferous) वृक्ष पाए जाते हैं।
- उष्णकटिबंधीय वर्षावन: इनमें पृथ्वी की सर्वाधिक जैव विविधता पाई जाती है और इन्हें ‘पृथ्वी के फेफड़े’ (Lungs of the Planet) कहा जाता है।
- प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs): इन्हें ‘समुद्र के वर्षावन’ (Rainforests of the Sea) कहा जाता है। ये कोरल ब्लीचिंग से गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं।
- एश्चुअरी (Estuary): यह मीठे और खारे पानी का संगम स्थल है, जो अत्यधिक उत्पादक होता है।
- मरुस्थल: इसकी पहचान कम वर्षा (25 सेमी से कम) से होती है, न कि केवल उच्च तापमान से। लद्दाख एक ठंडा मरुस्थल है।
स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Terrestrial Ecosystems)
1. टुंड्रा बायोम (Tundra Biome)
यह आर्कटिक क्षेत्र और ऊंचे पहाड़ों की चोटियों पर पाया जाता है। यहां की जलवायु अत्यधिक ठंडी और शुष्क होती है। मिट्टी की ऊपरी परत के नीचे स्थायी रूप से जमी हुई परत को पर्माफ्रॉस्ट कहते हैं। यहां छोटी झाड़ियाँ, काई (mosses), और लाइकेन जैसी वनस्पतियाँ उगती हैं। रेनडियर, आर्कटिक लोमड़ी और ध्रुवीय भालू यहाँ के प्रमुख जीव हैं।2. टैगा या बोरियल वन (Taiga or Boreal Forest)
यह टुंड्रा के दक्षिण में, उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के उप-आर्कटिक क्षेत्रों में फैला हुआ है। यहां लंबी, ठंडी सर्दियाँ और छोटी गर्मियाँ होती हैं। चीड़ (Pine), स्प्रूस (Spruce) और देवदार (Fir) जैसे शंकुधारी वृक्षों की प्रधानता होती है। लिंक्स, भेड़िये, और भालू जैसे जीव पाए जाते हैं।3. शीतोष्ण पर्णपाती वन (Temperate Deciduous Forest)
यह पूर्वी उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और पूर्वी एशिया में पाया जाता है। यहाँ चार स्पष्ट ऋतुएँ होती हैं। ओक, मेपल, और बीच जैसे चौड़ी पत्ती वाले पेड़ पाए जाते हैं, जो शरद ऋतु में अपनी पत्तियां गिरा देते हैं। हिरण, गिलहरी, और भालू यहाँ आम हैं।4. उष्णकटिबंधीय वर्षावन (Tropical Rainforest)
यह भूमध्य रेखा के पास के क्षेत्रों में पाया जाता है, जैसे अमेज़ॅन बेसिन और कांगो बेसिन। यहाँ वर्ष भर उच्च तापमान और भारी वर्षा होती है। यह पृथ्वी का सबसे घना और जैव विविधता वाला बायोम है। यहाँ लंबे पेड़ एक सघन वितान (Canopy) बनाते हैं। बंदर, जगुआर, और विभिन्न प्रकार के पक्षी और कीड़े पाए जाते हैं।5. सवाना (Savanna)
यह उष्णकटिबंधीय घास के मैदान हैं जिनमें कहीं-कहीं पेड़ भी पाए जाते हैं। यह अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका में विस्तृत हैं। यहाँ एक शुष्क और एक आर्द्र मौसम होता है। शेर, हाथी, जिराफ, और जेब्रा जैसे बड़े स्तनधारी जीव यहाँ की विशेषता हैं।6. शीतोष्ण घास के मैदान (Temperate Grasslands)
इन्हें उत्तरी अमेरिका में प्रेयरी (Prairies), यूरेशिया में स्टेपी (Steppes), और दक्षिण अमेरिका में पम्पास (Pampas) कहा जाता है। यहाँ वर्षा कम होती है और वृक्ष नहीं उगते। बाइसन और प्रेयरी डॉग जैसे जीव पाए जाते हैं।7. मरुस्थल (Desert)
यह वे क्षेत्र हैं जहाँ बहुत कम वर्षा होती है। यह गर्म (जैसे सहारा) या ठंडे (जैसे गोबी, लद्दाख) हो सकते हैं। नागफनी (Cacti) जैसे पौधे और ऊँट तथा सरीसृप जैसे जीव पाए जाते हैं जो शुष्क परिस्थितियों के अनुकूल होते हैं।जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystems)
1. अलवणीय जल पारिस्थितिकी तंत्र (Freshwater Ecosystems)
- स्थिर जल (Lentic): इसमें झीलें और तालाब शामिल हैं। इनमें पोषक तत्वों के स्तर के आधार पर ओलिगोट्रॉफिक (कम पोषक) और यूट्रोफिक (उच्च पोषक) जैसी श्रेणियां होती हैं।
- बहता जल (Lotic): इसमें नदियाँ और झरने शामिल हैं। पानी का निरंतर प्रवाह इनकी मुख्य विशेषता है।
2. संक्रमणकालीन जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Transitional Aquatic Ecosystems)
- एश्चुअरी (Estuary): यह वह स्थान है जहाँ नदियाँ समुद्र से मिलती हैं। मीठे और खारे पानी के मिश्रण के कारण यहाँ पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिससे यह अत्यधिक उत्पादक और मत्स्य पालन के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है।
- मैंग्रोव (Mangroves): यह तटीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले नमक-सहिष्णु वन हैं। भारत में सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है। ये सुनामी और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं से तट की रक्षा करते हैं।
3. लवणीय जल या समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystems)
- महासागर (Oceans): यह पृथ्वी का सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र है। इसे विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है, जैसे नेरिटिक (तटीय) और ओशनिक (खुला समुद्र)।
- प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs): ये गर्म, उथले और साफ पानी में कोरल पॉलीप्स द्वारा बनाए गए कंकालों से बनती हैं। ये समुद्री जैव विविधता के हॉटस्पॉट हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्री अम्लीकरण (Ocean Acidification) और कोरल ब्लीचिंग इनके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।