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भारत की राष्ट्रीय पर्यावरण नीतियां

भारत में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत नीतिगत ढाँचा मौजूद है। ये राष्ट्रीय नीतियां देश के पर्यावरणीय शासन के लिए एक मार्गदर्शक दर्शन और रणनीतिक दिशा प्रदान करती हैं। ये कानूनी अधिनियमों के पूरक के रूप में कार्य करती हैं और विशिष्ट पर्यावरणीय मुद्दों, जैसे वन, जल, और समग्र पर्यावरण संरक्षण, को संबोधित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाती हैं। इन नीतियों का उद्देश्य विकास की अनिवार्यताओं और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के बीच सामंजस्य स्थापित करना है।
प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
  • राष्ट्रीय वन नीति, 1988: इसका लक्ष्य देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 33% वन आवरण के तहत लाना है।
  • राष्ट्रीय पर्यावरण नीति, 2006: यह एक व्यापक नीति है जो सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित है।
  • राष्ट्रीय जल नीति, 2012: यह जल को एक आर्थिक वस्तु के रूप में मानती है और एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन पर जोर देती है।
  • राष्ट्रीय कृषि-वानिकी नीति, 2014: भारत ऐसी नीति बनाने वाला दुनिया का पहला देश बना।
  • राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018: इसका उद्देश्य जैव ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है।

प्रमुख राष्ट्रीय नीतियां (Major National Policies)

1. राष्ट्रीय वन नीति, 1988 (National Forest Policy, 1988)

इस नीति ने 1952 की नीति का स्थान लिया और वन प्रबंधन में एक बड़े बदलाव का प्रतीक बनी, जिसमें संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया और स्थानीय समुदायों की भूमिका को मान्यता दी गई।
  • मुख्य उद्देश्य:
    • पर्यावरणीय स्थिरता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना।
    • देश की प्राकृतिक विरासत, इसके जैविक विविधता और आनुवंशिक पूल का संरक्षण करना।
    • मृदा अपरदन और मरुस्थलीकरण को रोकना।
    • देश के एक-तिहाई (33%) भौगोलिक क्षेत्र को वन या वृक्ष आवरण के तहत लाने का लक्ष्य।
    • वन-आश्रित समुदायों की ईंधन, चारा और अन्य छोटी वन उपज की आवश्यकताओं को पूरा करना।
    • संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management – JFM) के माध्यम से वन प्रबंधन में जन भागीदारी को बढ़ावा देना।

2. राष्ट्रीय पर्यावरण नीति, 2006 (National Environment Policy, 2006)

यह नीति भारत की विभिन्न विकास आकांक्षाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को मुख्यधारा में लाने के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है।
  • मुख्य उद्देश्य:
    • महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संसाधनों का संरक्षण करना।
    • अंतर-पीढ़ीगत (Inter-generational) और अंतरा-पीढ़ीगत (Intra-generational) समानता सुनिश्चित करना।
    • गरीबों के लिए आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करना जो सीधे पर्यावरणीय संसाधनों पर निर्भर हैं।
    • विभिन्न क्षेत्रीय विकास योजनाओं और कार्यक्रमों में पर्यावरणीय चिंताओं को एकीकृत करना।
  • सिद्धांत: यह नीति सतत विकास, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत, और पूर्वोपााय सिद्धांत जैसे मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है।

3. राष्ट्रीय जल नीति, 2012 (National Water Policy, 2012)

यह नीति जल संसाधनों की योजना, विकास और प्रबंधन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करती है।
  • मुख्य विशेषताएं:
    • यह जल को एक सामुदायिक संसाधन से आगे बढ़कर एक आर्थिक वस्तु (Economic Good) के रूप में मानती है, ताकि इसके कुशल उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
    • यह एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन (Integrated Water Resources Management – IWRM) पर जोर देती है, जिसमें नदी बेसिन को योजना और प्रबंधन की मूल इकाई के रूप में माना जाता है।
    • यह जल उपयोग दक्षता को 20% तक बढ़ाने का आह्वान करती है।
    • यह वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को प्राथमिकता देती है।
    • यह एक राष्ट्रीय जल ढाँचा कानून (National Water Framework Law) के निर्माण की सिफारिश करती है।

चुनौतियाँ और महत्व

इन नीतियों ने पर्यावरण शासन के लिए एक मजबूत वैचारिक आधार प्रदान किया है। हालांकि, इनका सफल कार्यान्वयन एक बड़ी चुनौती है। अंतर-मंत्रालयी समन्वय की कमी, अपर्याप्त वित्तीय संसाधन, और जमीनी स्तर पर कमजोर प्रवर्तन कुछ प्रमुख बाधाएँ हैं। इन नीतियों की सफलता काफी हद तक राजनीतिक इच्छाशक्ति, संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और सबसे महत्वपूर्ण, इन प्रक्रियाओं में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है।
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