ADVERTISEMENT
Gyan Pragya
No Result
View All Result
  • Quiz
  • Polity
  • Geography
  • Economics
  • Science
  • Uttarakhand
  • GK
  • History
  • Environment
  • Hindi
Gyan Pragya
No Result
View All Result

पर्यावरण नीति उपकरण: विनियमन का ढाँचा

पर्यावरण नीति उपकरण वे साधन हैं जिनका उपयोग सरकारें और नियामक निकाय पर्यावरण पर मानव गतिविधियों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए करती हैं। ये उपकरण व्यवहार को बदलने, प्रदूषण को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। कोई भी एक उपकरण सभी समस्याओं के लिए उपयुक्त नहीं होता; इसलिए, अक्सर एक प्रभावी पर्यावरण प्रबंधन रणनीति बनाने के लिए विभिन्न उपकरणों के संयोजन का उपयोग किया जाता है। इन उपकरणों को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है: कमांड-एंड-कंट्रोल, बाजार-आधारित, और स्वैच्छिक उपकरण।
प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
  • कमांड-एंड-कंट्रोल (CAC): प्रदूषण को नियंत्रित करने का एक सीधा नियामक दृष्टिकोण, जिसमें मानक निर्धारित किए जाते हैं।
  • बाजार-आधारित उपकरण (MBI): प्रदूषण को कम करने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन का उपयोग करते हैं।
  • पिगोवियन टैक्स (Pigouvian Tax): नकारात्मक बाह्यताओं (जैसे प्रदूषण) को ठीक करने के लिए लगाया गया कर। कार्बन टैक्स इसका एक उदाहरण है।
  • कैप-एंड-ट्रेड: एक उत्सर्जन व्यापार योजना जहाँ कुल उत्सर्जन पर एक ‘कैप’ (सीमा) होती है और कंपनियां उत्सर्जन परमिट का ‘ट्रेड’ (व्यापार) कर सकती हैं।
  • PAT योजना (Perform, Achieve and Trade): भारत में ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए एक बाजार-आधारित तंत्र, जो ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देता है।

नीति उपकरणों के प्रकार

1. कमांड-एंड-कंट्रोल (Command-and-Control – CAC) उपकरण

यह पर्यावरण विनियमन का पारंपरिक दृष्टिकोण है। इसमें सरकार प्रदूषण के लिए मानक निर्धारित करती है और नियमों का पालन न करने वालों के लिए दंड का प्रावधान करती है।
  • विशेषताएं:
    • यह सभी प्रदूषकों के लिए एक समान नियम लागू करता है।
    • यह परिणामों की निश्चितता प्रदान करता है, बशर्ते कि निगरानी और प्रवर्तन प्रभावी हो।
  • उदाहरण:
    • उद्योगों के लिए उत्सर्जन मानकों का निर्धारण (जैसे, एक बिजली संयंत्र प्रति घंटे कितनी SO2 उत्सर्जित कर सकता है)।
    • प्रौद्योगिकी मानकों का निर्धारण (जैसे, सभी कारों में कैटेलिटिक कन्वर्टर्स का होना अनिवार्य)।
    • प्रदूषणकारी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना।
  • कमियां: यह लागत-प्रभावी नहीं हो सकता है क्योंकि यह विभिन्न फर्मों की प्रदूषण कम करने की अलग-अलग लागतों पर विचार नहीं करता है। यह निर्धारित मानक से परे नवाचार या प्रदूषण में कमी के लिए कोई प्रोत्साहन प्रदान नहीं करता है।

2. बाजार-आधारित उपकरण (Market-Based Instruments – MBIs)

ये उपकरण फर्मों और व्यक्तियों को अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार के लिए आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करते हैं। वे ‘प्रदूषक भुगतान करता है’ सिद्धांत को लागू करते हैं।
  • विशेषताएं:
    • ये लागत-प्रभावी होते हैं क्योंकि ये फर्मों को सबसे कम लागत वाले तरीके से प्रदूषण कम करने की अनुमति देते हैं।
    • ये निरंतर नवाचार और प्रदूषण में कमी के लिए प्रोत्साहन प्रदान करते हैं।
  • उदाहरण:
    • प्रदूषण कर (Carbon Tax): सरकार प्रदूषण की प्रत्येक इकाई पर कर लगाती है। यह प्रदूषण को महंगा बनाकर फर्मों को उत्सर्जन कम करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
    • उत्सर्जन व्यापार योजना (Emissions Trading Scheme – ETS): सरकार कुल स्वीकार्य उत्सर्जन (कैप) की एक सीमा निर्धारित करती है और कंपनियों को उत्सर्जन परमिट आवंटित करती है। जो फर्में आसानी से अपने उत्सर्जन को कम कर सकती हैं, वे अपने अतिरिक्त परमिट उन फर्मों को बेच सकती हैं जिनके लिए कमी करना अधिक महंगा है। भारत की PAT योजना इसका एक सफल उदाहरण है।
    • सब्सिडी: सरकार पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी या सौर पैनल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन।

3. स्वैच्छिक और सूचना-आधारित उपकरण

ये उपकरण व्यवहार को प्रभावित करने के लिए सार्वजनिक दबाव, नैतिक जिम्मेदारी और सूचना के प्रसार का उपयोग करते हैं।
  • उदाहरण:
    • इको-लेबलिंग: यह उपभोक्ताओं को उन उत्पादों की पहचान करने में मदद करता है जो पर्यावरण के अनुकूल हैं (जैसे भारत में ‘इकोमार्क’ योजना)।
    • सार्वजनिक प्रकटीकरण: कंपनियों को अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन (जैसे उत्सर्जन डेटा) का खुलासा करने की आवश्यकता होती है, जिससे सार्वजनिक और निवेशक दबाव बनता है।
    • स्वैच्छिक समझौते: उद्योग स्वेच्छा से अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह

प्रत्येक उपकरण की अपनी ताकत और कमजोरियां होती हैं। कमांड-एंड-कंट्रोल दृष्टिकोण को लागू करना आसान हो सकता है लेकिन यह महंगा होता है। बाजार-आधारित उपकरण अधिक कुशल होते हैं लेकिन उन्हें डिजाइन और मॉनिटर करना जटिल हो सकता है, और वे करों के कारण राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय हो सकते हैं। भारत में, एक मिश्रित दृष्टिकोण सबसे प्रभावी है, जहाँ विभिन्न उपकरणों का उपयोग एक-दूसरे के पूरक के रूप में किया जाता है। एक प्रभावी नीति मिश्रण के लिए मजबूत निगरानी प्रणाली, पारदर्शी डेटा और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
Previous Post

भारत में पर्यावरण संस्थान और तंत्र

Next Post

नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन

Next Post

नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन

कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस: जीवाश्म ईंधन

आपदाओं के प्रकार: प्राकृतिक और मानव निर्मित

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

🎯

चुनौती स्वीकार करें!

टॉपिक पढ़ लिया? अब देखें कि आपको कितना याद है। अभी टेस्ट दें और अपना स्कोर जानें।

क्विज अभी शुरू करें

क्या परीक्षा के नाम से हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं?

December 15, 2025

क्या आपका दिमाग भी पढ़ाई में धोखा देता है?

December 13, 2025

UPSC और PCS की तैयारी में एआई का सही उपयोग कैसे करें?

December 13, 2025

हिंदी व्याकरण में वाक्य रचना और उपवाक्य

November 30, 2025

जनजातीय गौरव दिवस: 15 नवंबर | भगवान बिरसा मुंडा की गाथा

November 15, 2025

हिंदी व्याकरण: उपसर्ग और प्रत्यय के भेद

October 9, 2025
  • Contact us
  • Disclaimer
  • Terms of Service
  • Privacy Policy
: whatsapp us on +918057391081 E-mail: setupragya@gmail.com
No Result
View All Result
  • Quiz
  • Static Gk
  • Polity
  • Hindi
  • Geography
  • Economics
  • General Science
  • Uttarakhand
  • History
  • Environment
  • Computer
  • Contact us

© 2024 GyanPragya - ArchnaChaudhary.