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नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधन

संसाधन वे पदार्थ या वस्तुएं हैं जिनका उपयोग मानव अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा करने के लिए करता है। प्रकृति में उनकी पुनःपूर्ति की दर के आधार पर, इन संसाधनों को मोटे तौर पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है: नवीकरणीय (Renewable) और अनवीकरणीय (Non-renewable)। यह वर्गीकरण सतत विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की रणनीतियों को आकार देने के लिए मौलिक है। एक स्थायी भविष्य की ओर संक्रमण के लिए इन दोनों प्रकार के संसाधनों की विशेषताओं, लाभों और सीमाओं को समझना महत्वपूर्ण है।
प्रारंभिक परीक्षाओं के लिए त्वरित तथ्य (Quick Facts for Prelims)
  • नवीकरणीय संसाधन: वे संसाधन जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मानव जीवनकाल में पुनः भर दिए जाते हैं (जैसे सौर, पवन)।
  • अनवीकरणीय संसाधन: वे संसाधन जिनका भंडार सीमित है और बनने में लाखों वर्ष लगते हैं (जैसे कोयला, पेट्रोलियम)।
  • भारत का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य: भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
  • जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels): कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस को जीवाश्म ईंधन कहा जाता है क्योंकि वे प्राचीन जैविक पदार्थों के अपघटन से बनते हैं।
  • परमाणु ऊर्जा: ईंधन (यूरेनियम) अनवीकरणीय है, लेकिन प्रक्रिया को कभी-कभी ‘स्वच्छ’ माना जाता है क्योंकि यह ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करती है।

नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resources)

[Image of wind turbines and solar panels] नवीकरणीय संसाधन वे हैं जो प्राकृतिक रूप से समय के साथ फिर से भर जाते हैं या अटूट होते हैं। उन्हें अक्सर ‘स्वच्छ’ या ‘हरित’ ऊर्जा के रूप में संदर्भित किया जाता है क्योंकि वे बहुत कम या कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं करते हैं।

प्रमुख प्रकार और उदाहरण

  • सौर ऊर्जा (Solar Energy): सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊर्जा। इसका उपयोग फोटोवोल्टिक (PV) सेल के माध्यम से सीधे बिजली बनाने या पानी गर्म करने के लिए किया जा सकता है।
  • पवन ऊर्जा (Wind Energy): हवा की गतिज ऊर्जा का उपयोग करके टर्बाइनों को घुमाकर बिजली उत्पन्न की जाती है।
  • जलविद्युत (Hydropower): बहते पानी (नदियों) की ऊर्जा का उपयोग करके टर्बाइनों को चलाकर बिजली का उत्पादन।
  • बायोमास (Biomass): जैविक पदार्थ जैसे कृषि अपशिष्ट, लकड़ी और गोबर से प्राप्त ऊर्जा।
  • भूतापीय ऊर्जा (Geothermal Energy): पृथ्वी के भीतर की गर्मी से प्राप्त ऊर्जा।

लाभ और हानियाँ

  • लाभ: पर्यावरण के अनुकूल, कम परिचालन लागत, ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि, और स्थायी स्रोत।
  • हानियाँ: आंतरायिकता (Intermittency) (जैसे, सौर और पवन ऊर्जा हमेशा उपलब्ध नहीं होती), उच्च प्रारंभिक स्थापना लागत, और कुछ मामलों में बड़े भूमि क्षेत्र की आवश्यकता।

अनवीकरणीय संसाधन (Non-renewable Resources)

अनवीकरणीय संसाधन वे हैं जिनका भंडार सीमित है और जिनकी खपत की दर उनके निर्माण की दर से बहुत अधिक है। एक बार समाप्त हो जाने पर, उन्हें मानव समय-सीमा में बदला नहीं जा सकता।

प्रमुख प्रकार और उदाहरण

  • कोयला (Coal): एक ठोस जीवाश्म ईंधन जिसका उपयोग मुख्य रूप से बिजली उत्पादन और इस्पात निर्माण में किया जाता है।
  • पेट्रोलियम (Petroleum): एक तरल जीवाश्म ईंधन जिसे गैसोलीन, डीजल और अन्य उत्पादों में परिष्कृत किया जाता है।
  • प्राकृतिक गैस (Natural Gas): एक गैसीय जीवाश्म ईंधन, जो मुख्य रूप से मीथेन से बना होता है, जिसका उपयोग हीटिंग और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
  • परमाणु ईंधन (Nuclear Fuels): यूरेनियम और प्लूटोनियम जैसे तत्व जिनका उपयोग परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में विखंडन के माध्यम से ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।

लाभ और हानियाँ

  • लाभ: उच्च ऊर्जा घनत्व, स्थापित और विश्वसनीय प्रौद्योगिकी, और अपेक्षाकृत कम पूंजी लागत (परमाणु को छोड़कर)।
  • हानियाँ: वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जलवायु परिवर्तन में प्रमुख योगदानकर्ता, संसाधन का क्षरण और समाप्त होना, और भू-राजनीतिक तनाव।

संसाधन प्रबंधन और एक स्थायी भविष्य की ओर संक्रमण

अनवीकरणीय संसाधनों पर अत्यधिक निर्भरता ने गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा कर दिए हैं। इसलिए, एक सतत भविष्य के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर एक व्यवस्थित संक्रमण अनिवार्य है।
  • चुनौतियाँ: इस संक्रमण में वित्तीय निवेश, प्रौद्योगिकी विकास, ग्रिड एकीकरण, और ऊर्जा भंडारण समाधान (जैसे बैटरी) जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियाँ शामिल हैं।
  • भारत की भूमिका: भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की स्थापना और अपने महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के माध्यम से इस संक्रमण में एक वैश्विक नेता के रूप में खुद को स्थापित किया है।
  • आगे की राह: ऊर्जा दक्षता को अधिकतम करने, चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को अपनाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने वाली नीतियों को लागू करने की आवश्यकता है। व्यक्तिगत स्तर पर, सचेत उपभोग और जीवन शैली में बदलाव (मिशन LiFE) भी इस संक्रमण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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