परिचय: क्षार धातुएं (Alkali Metals)
क्षार धातुएं आवर्त सारणी के समूह 1 में स्थित तत्वों का एक समूह हैं। इनमें लिथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रूबिडियम (Rb), सीज़ियम (Cs), और फ्रांसियम (Fr) शामिल हैं। इन्हें क्षार धातु इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये जल के साथ अभिक्रिया करके प्रबल क्षार (strong alkalis) बनाती हैं।
भौतिक गुण (Physical Properties)
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: इनके बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns¹ होता है।
- नरम धातुएं: ये बहुत नरम होती हैं और इन्हें चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।
- रंग: ये चांदी जैसी सफेद और चमकदार होती हैं, लेकिन हवा के संपर्क में आने पर जल्दी ही धूमिल हो जाती हैं।
- घनत्व: इनका घनत्व बहुत कम होता है। लिथियम, सोडियम और पोटैशियम पानी से भी हल्के होते हैं।
- गलनांक और क्वथनांक: इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं क्योंकि इनमें केवल एक संयोजी इलेक्ट्रॉन के कारण धात्विक बंधन कमजोर होता है।
- ज्वाला परीक्षण: ये धातुएं और इनके लवण ज्वाला को विशिष्ट रंग प्रदान करते हैं (जैसे, सोडियम – सुनहरा पीला, पोटैशियम – बैंगनी)।
रासायनिक गुण (Chemical Properties)
अपने बाह्यतम कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होने के कारण, क्षार धातुएं अत्यधिक अभिक्रियाशील होती हैं। वे आसानी से अपना एक इलेक्ट्रॉन खोकर +1 आयन बनाती हैं।
प्रमुख अभिक्रियाएं
- जल के साथ अभिक्रिया: ये जल के साथ तेजी से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस और धातु हाइड्रॉक्साइड बनाती हैं। यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है।
2M(s) + 2H₂O(l) → 2MOH(aq) + H₂(g) - वायु के साथ अभिक्रिया: ये वायु में तेजी से धूमिल हो जाती हैं और ऑक्साइड, परॉक्साइड या सुपरऑक्साइड बनाती हैं। इसी कारण इन्हें केरोसिन तेल में रखा जाता है।
- हैलोजन के साथ अभिक्रिया: ये हैलोजन के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करके आयनिक हैलाइड बनाती हैं।
2M + X₂ → 2MX - प्रबल अपचायक: ये प्रबल अपचायक (reducing agents) होती हैं क्योंकि इनकी आयनन एन्थैल्पी बहुत कम होती है।
अभ्यास प्रश्न (MCQs)
1. किस क्षार धातु को केरोसिन तेल में रखा जाता है?
2. समूह 1 में नीचे जाने पर क्षार धातुओं की अभिक्रियाशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है?
3. ज्वाला परीक्षण में कौन सी क्षार धातु किरमिजी लाल (crimson red) रंग देती है?
4. निम्नलिखित में से कौन सा ऑक्साइड, परॉक्साइड और सुपरऑक्साइड, तीनों बनाता है?
5. क्षार धातुओं की आयनन एन्थैल्पी बहुत कम क्यों होती है?