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डी ब्रॉग्ली संबंध (De Broglie Relation)

परिचय: डी ब्रोग्ली की परिकल्पना

1924 में, फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लुई डी ब्रोग्ली ने एक क्रांतिकारी परिकल्पना प्रस्तुत की, जिसने पदार्थ की हमारी समझ को बदल दिया। उन्होंने प्रस्तावित किया कि जिस प्रकार प्रकाश में तरंग और कण दोनों के गुण होते हैं (द्वैत प्रकृति), उसी प्रकार द्रव्य के सभी गतिमान कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, गेंद) में भी तरंग प्रकृति होनी चाहिए।

किसी गतिमान कण से संबद्ध तरंग को द्रव्य तरंग (matter wave) या डी ब्रोग्ली तरंग कहा जाता है।

डी ब्रोग्ली संबंध और सूत्र

डी ब्रोग्ली ने एक गतिमान कण के कण गुण (संवेग) और तरंग गुण (तरंगदैर्ध्य) के बीच एक गणितीय संबंध स्थापित किया।

सूत्र की व्युत्पत्ति

डी ब्रोग्ली ने प्लांक के क्वांटम सिद्धांत और आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध को संयुक्त किया:
1. प्लांक का समीकरण: E = hf = hc/λ (फोटॉन के लिए)
2. आइंस्टीन का समीकरण: E = mc² (फोटॉन के लिए)

दोनों समीकरणों को बराबर करने पर:
hc/λ = mc²
h/λ = mc (जहाँ mc फोटॉन का संवेग p है)
λ = h/p

डी ब्रोग्ली ने तर्क दिया कि यह संबंध केवल फोटॉन के लिए ही नहीं, बल्कि किसी भी गतिमान कण के लिए सत्य होना चाहिए।
अतः, एक ‘m’ द्रव्यमान के कण के लिए जो ‘v’ वेग से गति कर रहा है:
λ = h / p = h / mv

डी ब्रोग्ली परिकल्पना का महत्व

  • यह संबंध बताता है कि तरंगदैर्ध्य (λ) संवेग (p) के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
  • भारी वस्तुओं या बहुत तेज गति से चलने वाली वस्तुओं का संवेग बहुत अधिक होता है, इसलिए उनकी तरंगदैर्ध्य इतनी कम होती है कि उसे मापा नहीं जा सकता। यही कारण है कि हम दैनिक जीवन में बड़ी वस्तुओं की तरंग प्रकृति का अनुभव नहीं करते हैं।
  • इलेक्ट्रॉन जैसे सूक्ष्म कणों के लिए, तरंगदैर्ध्य मापने योग्य होती है, जिसकी पुष्टि बाद में डेविसन और जर्मर के प्रयोग द्वारा की गई।

संख्यात्मक उदाहरण

उदाहरण

प्रश्न: 1000 V के विभवांतर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन की डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए। (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m = 9.1 × 10⁻³¹ kg, आवेश e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C)

हल:
जब एक इलेक्ट्रॉन को V वोल्ट से त्वरित किया जाता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा (KE) = eV
KE = (1.6 × 10⁻¹⁹ C) × (1000 V) = 1.6 × 10⁻¹⁶ J

हम जानते हैं कि KE = p²/2m, इसलिए संवेग p = √(2m·KE)
p = √[2 × (9.1 × 10⁻³¹) × (1.6 × 10⁻¹⁶)]
p = √[29.12 × 10⁻⁴⁷] = √[2.912 × 10⁻⁴⁶] ≈ 1.706 × 10⁻²³ kg·m/s

अब, डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य (λ) = h / p
λ = (6.63 × 10⁻³⁴) / (1.706 × 10⁻²³)
λ ≈ 3.88 × 10⁻¹¹ m

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