परिचय: विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity)
विद्युत ऋणात्मकता किसी परमाणु का एक रासायनिक गुण है जो यह दर्शाता है कि जब वह किसी सहसंयोजक बंध (covalent bond) में होता है, तो वह साझे के इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की कितनी क्षमता रखता है। यह एक सापेक्षिक मान है और इसकी कोई इकाई नहीं होती।
इस अवधारणा को सबसे पहले लाइनस पॉलिंग ने 1932 में प्रस्तुत किया था।
विद्युत ऋणात्मकता को प्रभावित करने वाले कारक
1. परमाणु आकार (Atomic Size)
परमाणु का आकार जितना छोटा होता है, नाभिक और साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म के बीच की दूरी उतनी ही कम होती है। इससे नाभिक का आकर्षण बल प्रबल होता है। अतः, परमाणु आकार घटने पर विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है।
2. नाभिकीय आवेश (Nuclear Charge)
नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या बढ़ने से नाभिकीय आवेश बढ़ता है। यह साझे के इलेक्ट्रॉनों को अधिक मजबूती से आकर्षित करता है। अतः, नाभिकीय आवेश बढ़ने पर विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है।
आवर्त सारणी में प्रवृत्ति (Periodic Trends)
आवर्त में (Across a Period)
एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर, परमाणु आकार घटता है और नाभिकीय आवेश बढ़ता है। इन दोनों कारकों के कारण, इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की क्षमता बढ़ती है। अतः, एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर विद्युत ऋणात्मकता बढ़ती है।
समूह में (Down a Group)
एक समूह में ऊपर से नीचे जाने पर, नए कोश जुड़ने के कारण परमाणु आकार बढ़ता है। बढ़े हुए आकार का प्रभाव बढ़े हुए नाभिकीय आवेश से अधिक होता है। अतः, एक समूह में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है।
निष्कर्ष: आवर्त सारणी में सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व फ्लोरीन (F) है, और सबसे कम सीज़ियम (Cs) और फ्रांसियम (Fr) हैं।
कुछ प्रमुख तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता (पॉलिंग पैमाने पर)
| तत्व | प्रतीक | विद्युत ऋणात्मकता | तत्व | प्रतीक | विद्युत ऋणात्मकता |
|---|---|---|---|---|---|
| हाइड्रोजन | H | 2.20 | क्लोरीन | Cl | 3.16 |
| लिथियम | Li | 0.98 | ब्रोमीन | Br | 2.96 |
| सोडियम | Na | 0.93 | आयोडीन | I | 2.66 |
| पोटैशियम | K | 0.82 | सल्फर | S | 2.58 |
| सीज़ियम | Cs | 0.79 | कार्बन | C | 2.55 |
| नाइट्रोजन | N | 3.04 | फास्फोरस | P | 2.19 |
| ऑक्सीजन | O | 3.44 | सिलिकॉन | Si | 1.90 |
| फ्लोरीन | F | 3.98 (सर्वाधिक) | फ्रांसियम | Fr | 0.7 (न्यूनतम) |