परिचय: विलयन की सांद्रता
किसी विलयन में विलेय की मात्रा के आधार पर उसे वर्गीकृत किया जा सकता है। विलेयता (Solubility) किसी दिए गए तापमान पर 100 ग्राम विलायक में घुल सकने वाली विलेय की अधिकतम मात्रा होती है। इसी विलेयता के आधार पर विलयनों को संतृप्त, असंतृप्त और अतिसंतृप्त में बांटा जाता है।
विलयन के प्रकार
1. असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution)
परिभाषा: एक ऐसा विलयन जिसमें किसी निश्चित तापमान पर विलेय की और अधिक मात्रा घोली जा सकती है, उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं।
- इसमें विलेय की मात्रा संतृप्तता स्तर से कम होती है।
- उदाहरण: एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी घोलने पर बना विलयन। आप इसमें और चीनी घोल सकते हैं।
2. संतृप्त विलयन (Saturated Solution)
परिभाषा: एक ऐसा विलयन जिसमें किसी निश्चित तापमान पर विलेय की अधिकतम संभव मात्रा घुली हुई हो और अधिक विलेय घोलना संभव न हो, उसे संतृप्त विलयन कहते हैं।
- इस अवस्था में, घुलने की दर और क्रिस्टलीकरण की दर के बीच एक गतिशील संतुलन (dynamic equilibrium) स्थापित हो जाता है।
- उदाहरण: पानी में लगातार चीनी घोलते रहने पर एक समय ऐसा आता है जब चीनी घुलना बंद हो जाती है और नीचे बैठने लगती है। उस समय बना विलयन संतृप्त होता है।
3. अतिसंतृप्त विलयन (Supersaturated Solution)
परिभाषा: यह एक अस्थायी अवस्था है जिसमें एक विलयन में किसी निश्चित तापमान पर उसकी संतृप्तता स्तर से भी अधिक विलेय घुला हुआ होता है।
- इसे आमतौर पर एक संतृप्त विलयन को गर्म करके और अधिक विलेय घोलने के बाद उसे सावधानीपूर्वक बिना हिलाए ठंडा करके बनाया जाता है।
- यह बहुत अस्थिर होता है। थोड़ा सा हिलाने पर या विलेय का एक क्रिस्टल डालने पर अतिरिक्त विलेय तुरंत क्रिस्टलीकृत हो जाता है।
- उदाहरण: चाशनी (चीनी का गाढ़ा घोल) एक अतिसंतृप्त विलयन का उदाहरण है।