1. परिचय: पठारी महाद्वीप
अफ्रीका को ‘पठारी महाद्वीप’ (Plateau Continent) कहा जाता है क्योंकि इसका अधिकांश भूभाग एक विशाल और प्राचीन पठार है। यह पठार प्राचीन गोंडवानालैंड का हिस्सा है और मुख्य रूप से कठोर, क्रिस्टलीय प्री-कैम्ब्रियन चट्टानों से बना है। इसकी सबसे अनूठी विशेषता महान भ्रंश घाटी (Great Rift Valley) है, जो इसे विच्छेदित करती है। यह पठार दुनिया के सबसे समृद्ध खनिज भंडारों में से एक है।
2. महान भ्रंश घाटी (The Great Rift Valley)
यह अफ्रीकी पठार की सबसे प्रमुख और भूवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण विशेषता है।
- निर्माण: इसका निर्माण एक अपसारी प्लेट सीमा (Divergent Plate Boundary) पर हुआ है, जहाँ सोमाली प्लेट, न्युबियन (अफ्रीकी) प्लेट से धीरे-धीरे अलग हो रही है। इस खिंचाव के कारण भूमि का एक लंबा हिस्सा नीचे धँस गया, जिससे इस भ्रंश घाटी का निर्माण हुआ।
- विस्तार: यह उत्तर में सीरिया से लेकर दक्षिण में मोज़ाम्बिक तक लगभग 6,000 किलोमीटर तक फैली हुई है।
- शाखाएँ और झीलें: इसकी दो मुख्य शाखाएँ हैं – पूर्वी शाखा और पश्चिमी शाखा। दुनिया की कई गहरी झीलें इसी घाटी में स्थित हैं, जैसे तांगानिका, मलावी, और तुर्काना। विक्टोरिया झील इन दोनों शाखाओं के बीच स्थित है।
3. पठार के प्रमुख विभाजन (Major Divisions of the Plateau)
A. इथियोपियाई उच्चभूमि (Ethiopian Highlands)
- इसे ‘अफ्रीका की छत’ भी कहा जाता है। इसका निर्माण ज्वालामुखी लावा के जमाव से हुआ है।
- यह ब्लू नील नदी का उद्गम स्थल है। यहाँ की उपजाऊ मिट्टी कॉफी की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
B. पूर्वी अफ्रीकी पठार (East African Plateau)
- यह युगांडा, केन्या और तंजानिया में फैला हुआ है। विक्टोरिया झील इसी पठार पर स्थित है।
- अफ्रीका की सबसे ऊँची चोटी, माउंट किलिमंजारो (एक निष्क्रिय ज्वालामुखी), इसी क्षेत्र में है।
- यह क्षेत्र अपने सवाना घास के मैदानों और वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है (सेरेनगेटी, मसाई मारा)।
C. दक्षिण अफ्रीकी पठार (South African Plateau)
- इसे हाईवेल्ड (Highveld) के नाम से भी जाना जाता है।
- यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में से एक है, जो सोना (विटवाटरसैंड), हीरे (किम्बरली), और प्लेटिनम के लिए प्रसिद्ध है।
- ड्रैकेंसबर्ग पर्वत इस पठार के पूर्वी किनारे का निर्माण करते हैं।
D. कटंगा पठार (Katanga Plateau)
- यह कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और जाम्बिया में स्थित है।
- यह तांबा और कोबाल्ट के अपने विशाल भंडार के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जिसे ‘कॉपर बेल्ट’ के रूप में जाना जाता है।
4. आर्थिक महत्व (Economic Significance)
- खनिज का भंडारगृह: अफ्रीकी पठार को ‘खनिजों का भंडारगृह’ कहा जाता है। यह सोना, हीरा, प्लैटिनम, क्रोमियम, कोबाल्ट, तांबा, और मैंगनीज का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है।
- जलविद्युत क्षमता: पठार के किनारों पर नदियाँ झरने और रैपिड्स बनाती हैं (जैसे ज़म्बेजी नदी पर विक्टोरिया फॉल्स), जिससे जलविद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं।
- कृषि: इथियोपियाई हाइलैंड्स जैसे कुछ क्षेत्रों में ज्वालामुखी मिट्टी कॉफी और अन्य फसलों के लिए उपजाऊ है, लेकिन पठार के कई हिस्से शुष्क हैं।
- पर्यटन: वन्यजीव सफारी, राष्ट्रीय उद्यान और विक्टोरिया फॉल्स जैसे प्राकृतिक आश्चर्य पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं।
5. सारांश: अफ्रीकी पठार के मुख्य तथ्य
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| उपनाम | पठारी महाद्वीप, खनिजों का भंडारगृह |
| निर्माण | प्राचीन गोंडवानालैंड का हिस्सा, प्री-कैम्ब्रियन शील्ड |
| प्रमुख भू-आकृतिक विशेषता | महान भ्रंश घाटी (Great Rift Valley) |
| प्रमुख उप-विभाग | इथियोपियाई उच्चभूमि, पूर्वी अफ्रीकी पठार, दक्षिण अफ्रीकी पठार |
| प्रमुख झीलें | विक्टोरिया, तांगानिका, मलावी |
| प्रमुख खनिज | सोना, हीरा, प्लैटिनम, तांबा, कोबाल्ट |
| जलविद्युत | ज़म्बेजी (करीबा बांध), नील, कांगो नदियों पर अपार क्षमता |