1. परिचय (Introduction)
परिधान उद्योग (Apparel and Garment Industry) वस्त्र मूल्य श्रृंखला (Textile Value Chain) का अंतिम चरण है, जिसमें कपड़ों से पहनने के लिए तैयार वस्त्र (Ready-made Garments) बनाए जाते हैं। यह अत्यधिक श्रम-गहन (Labour-intensive) उद्योग है और भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन और निर्यात की दृष्टि से इसका बहुत महत्व है। यह उद्योग फैशन और बदलते उपभोक्ता रुझानों से बहुत प्रभावित होता है।
2. स्थानीयकरण के कारक (Factors of Localisation)
परिधान उद्योग के केंद्र कुछ विशेष क्षेत्रों में विकसित हुए हैं, जिसके मुख्य कारण हैं:
- कपड़ा मिलों की निकटता: तैयार कपड़े (फैब्रिक) की आसान उपलब्धता।
- कुशल और सस्ता श्रम: सिलाई, कटाई और डिजाइनिंग के लिए कुशल श्रमिकों की आवश्यकता।
- शहरी केंद्र: बड़े घरेलू बाजारों और फैशन केंद्रों तक पहुंच।
- बंदरगाह की सुविधा: आयातित सामान (जैसे बटन, जिपर) और तैयार वस्त्रों के निर्यात के लिए।
- सरकारी नीतियां: परिधान पार्कों (Apparel Parks) और निर्यात प्रोत्साहन क्षेत्रों की स्थापना।
3. भारत के प्रमुख परिधान विनिर्माण केंद्र (Major Garment Manufacturing Hubs in India)
| केंद्र | राज्य | विशेषता |
|---|---|---|
| तिरुपपुर (Tiruppur) | तमिलनाडु | इसे ‘भारत की निटवियर राजधानी’ (Knitwear Capital of India) कहा जाता है। यह सूती होजरी और बुने हुए कपड़ों के निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। |
| बेंगलुरु (Bengaluru) | कर्नाटक | उच्च-फैशन और ब्रांडेड रेडीमेड गारमेंट्स का एक प्रमुख केंद्र। |
| दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) | दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा | घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों के लिए रेडीमेड गारमेंट्स का एक विशाल केंद्र। |
| लुधियाना (Ludhiana) | पंजाब | ऊनी परिधानों और होजरी के लिए प्रसिद्ध है, इसे ‘भारत का मैनचेस्टर’ भी कहा जाता है। |
| मुंबई (Mumbai) | महाराष्ट्र | उच्च-फैशन, डिजाइनर परिधान और फिल्म उद्योग के लिए कपड़ों का एक प्रमुख केंद्र। |
| सूरत (Surat) | गुजरात | सिंथेटिक कपड़ों (पॉलिएस्टर) से बने परिधानों, विशेषकर साड़ियों और ड्रेस सामग्री का सबसे बड़ा केंद्र। |
4. सरकारी पहल (Government Initiatives)
- एकीकृत वस्त्र पार्क योजना (Scheme for Integrated Textile Parks – SITP): विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के साथ टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
- संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (Amended Technology Upgradation Fund Scheme – ATUFS): कपड़ा और परिधान उद्योग में आधुनिक मशीनरी में निवेश के लिए सब्सिडी प्रदान करना।
- उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना: मानव निर्मित फाइबर (MMF) परिधान और तकनीकी वस्त्रों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए।
5. आर्थिक महत्व (Economic Importance)
- रोजगार: यह क्षेत्र प्रत्यक्ष रूप से करोड़ों लोगों को रोजगार देता है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलता है।
- निर्यात: रेडीमेड गारमेंट्स भारत के कुल निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- लघु उद्योगों को बढ़ावा: इस उद्योग में अधिकांश इकाइयाँ MSME क्षेत्र में हैं, जो समावेशी विकास को बढ़ावा देती हैं।
6. चुनौतियाँ (Challenges)
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा: भारत को बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जहाँ श्रम लागत कम है।
- पैमाने की कमी: उद्योग अत्यधिक खंडित है और इसमें बड़ी, एकीकृत मिलों की कमी है।
- फैशन में तेजी से बदलाव: वैश्विक फैशन रुझानों के साथ तालमेल बिठाने और ‘फास्ट फैशन’ की मांगों को पूरा करने की चुनौती।
- मानव निर्मित फाइबर पर निर्भरता: भारत का परिधान उद्योग अभी भी काफी हद तक सूती वस्त्रों पर केंद्रित है, जबकि वैश्विक मांग मानव निर्मित फाइबर (MMF) की ओर बढ़ रही है।
7. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- परिधान उद्योग वस्त्र मूल्य श्रृंखला का अंतिम चरण है।
- यह एक अत्यधिक श्रम-गहन उद्योग है।
- तिरुपपुर को ‘भारत की निटवियर राजधानी’ कहा जाता है।
- लुधियाना ऊनी परिधानों के लिए प्रसिद्ध है।
- सूरत सिंथेटिक वस्त्रों का सबसे बड़ा केंद्र है।
- यह उद्योग महिला रोजगार का एक प्रमुख स्रोत है।