1. परिचय: जलवायु परिवर्तन क्या है?
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) तापमान और मौसम के पैटर्न में दीर्घकालिक बदलाव को संदर्भित करता है। जबकि कुछ बदलाव प्राकृतिक हो सकते हैं, 19वीं सदी के बाद से, मानवीय गतिविधियाँ जलवायु परिवर्तन का मुख्य चालक रही हैं। यह मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) के जलने के कारण है, जो गर्मी को फँसाने वाली ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse Gases – GHGs) का उत्सर्जन करता है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग होती है।
2. जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण
मानवजनित कारण (Anthropogenic Causes)
- जीवाश्म ईंधन का दहन: ऊर्जा, उद्योग और परिवहन के लिए कोयला, तेल और गैस जलाने से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) का उत्सर्जन होता है।
- वनों की कटाई (Deforestation): वन महत्वपूर्ण कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं। पेड़ों को काटने से न केवल यह क्षमता कम हो जाती है, बल्कि संग्रहीत कार्बन भी वायुमंडल में छोड़ दिया जाता है।
- कृषि: पशुधन (विशेष रूप से मवेशी) पाचन के दौरान मीथेन (CH₄) का उत्सर्जन करते हैं। नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों के उपयोग से नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O) का उत्सर्जन होता है।
- औद्योगिक प्रक्रियाएँ: कुछ औद्योगिक अनुप्रयोगों से फ्लोरिनेटेड गैसें (F-gases) निकलती हैं, जो बहुत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं।
3. जलवायु परिवर्तन के प्रमुख प्रभाव
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव दूरगामी और परस्पर जुड़े हुए हैं।
A. बढ़ता तापमान और हीटवेव
वैश्विक औसत तापमान बढ़ रहा है, जिससे अत्यधिक गर्मी की लहरों (Heatwaves) की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हो रही है, जो मानव स्वास्थ्य और कृषि के लिए खतरनाक हैं।
B. पिघलती बर्फ और समुद्र स्तर में वृद्धि
गर्म तापमान के कारण ग्लेशियर और ध्रुवीय बर्फ की चादरें तेजी से पिघल रही हैं। इसके साथ ही, पानी के तापीय विस्तार (Thermal Expansion) के कारण समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, जिससे तटीय शहरों और छोटे द्वीप राष्ट्रों के डूबने का खतरा है।
C. चरम मौसम की घटनाएँ
जलवायु परिवर्तन सूखा, भारी वर्षा, बाढ़, जंगल की आग और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों जैसी चरम मौसम की घटनाओं को अधिक तीव्र और बार-बार होने वाला बना रहा है।
D. महासागरों पर प्रभाव
महासागर अतिरिक्त गर्मी और CO₂ को अवशोषित कर रहे हैं, जिससे महासागरीय अम्लीकरण (Ocean Acidification) और प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) हो रहा है, जो समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को नष्ट कर रहा है।
E. जैव विविधता का नुकसान
तेजी से बदलते जलवायु के अनुकूल होने में असमर्थ कई पौधे और पशु प्रजातियाँ विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं।
4. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और समझौते
- IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change): यह एक वैज्ञानिक निकाय है जो जलवायु परिवर्तन पर नियमित मूल्यांकन रिपोर्ट प्रदान करता है, जो नीति निर्माण के लिए आधार का काम करती है।
- UNFCCC (United Nations Framework Convention on Climate Change): 1992 में अपनाया गया यह मुख्य अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता को स्थिर करना है।
- क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol): इसने विकसित देशों के लिए उत्सर्जन में कमी के लिए बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किए, जो “सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों” के सिद्धांत पर आधारित थे।
- पेरिस समझौता (Paris Agreement, 2015): यह एक ऐतिहासिक समझौता है जिसका लक्ष्य वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2°C से काफी नीचे रखना है, और 1.5°C तक सीमित करने का प्रयास करना है। इसमें सभी देश अपने स्वयं के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions – NDCs) प्रस्तुत करते हैं।