परिचय: चक्रवात क्या है?
चक्रवात एक विशाल, घूमता हुआ तूफान है जो गर्म उष्णकटिबंधीय महासागरों के ऊपर बनता है। यह एक निम्न वायुदाब प्रणाली (Low-Pressure System) है जिसके केंद्र में शांत क्षेत्र होता है और उसके चारों ओर तेज हवाएँ और गरज के साथ बारिश होती है। हवाएँ उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त (counter-clockwise) और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त (clockwise) घूमती हैं।
1. उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने के लिए आवश्यक दशाएँ
एक शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय चक्रवात के निर्माण और विकास के लिए कई वायुमंडलीय और महासागरीय दशाओं का एक साथ होना आवश्यक है:
- गर्म समुद्री सतह: समुद्र की सतह का तापमान 27°C से अधिक होना चाहिए, जो तूफान को नमी और ऊर्जा प्रदान करता है।
- कोरिओलिस बल की उपस्थिति: यह बल पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है और हवाओं को एक चक्र में घुमाने के लिए आवश्यक है। यही कारण है कि चक्रवात भूमध्य रेखा (0°-5° अक्षांश) पर नहीं बनते, क्योंकि वहाँ कोरिओलिस बल नगण्य होता है।
- कम ऊर्ध्वाधर पवन अपरूपण (Weak Vertical Wind Shear): इसका अर्थ है कि वायुमंडल में ऊंचाई के साथ हवा की गति और दिशा में बहुत कम परिवर्तन होना चाहिए, ताकि तूफान की संरचना ऊर्ध्वाधर रूप से विकसित हो सके।
- पहले से मौजूद कमजोर निम्न दाब क्षेत्र: एक मौजूदा कमजोर विक्षोभ चक्रवात के विकास के लिए एक प्रारंभिक बिंदु प्रदान करता है।
- ऊपरी अपसरण (Upper Divergence): समुद्री सतह के पास हवाओं के अभिसरण के ऊपर, क्षोभमंडल की ऊपरी परतों में हवा का बाहर की ओर फैलना आवश्यक है ताकि गर्म हवा ऊपर उठ सके।
2. चक्रवात की संरचना
एक विकसित उष्णकटिबंधीय चक्रवात की तीन मुख्य विशेषताएँ होती हैं:
- चक्रवात की आँख (Eye): यह तूफान का शांत, निम्न दाब वाला केंद्र होता है। यहाँ मौसम अक्सर साफ और हवाएँ हल्की होती हैं।
- अक्षि भित्ति (Eyewall): यह आँख के चारों ओर घने बादलों, सबसे तेज हवाओं और सबसे भारी वर्षा का क्षेत्र है। यह चक्रवात का सबसे विनाशकारी हिस्सा होता है।
- सर्पिल वर्षा बैंड (Spiral Rainbands): ये गरज और वर्षा वाले बादलों के बाहरी बैंड होते हैं जो केंद्र की ओर सर्पिल रूप में घूमते हैं।
3. भारत में चक्रवातों का वर्गीकरण और नामकरण
A. वर्गीकरण (Classification)
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), जो नई दिल्ली में स्थित एक क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) है, हवा की गति के आधार पर निम्न दाब प्रणालियों को वर्गीकृत करता है:
| श्रेणी | हवा की गति (किमी/घंटा) |
|---|---|
| निम्न दाब क्षेत्र (Low Pressure Area) | 31 से कम |
| अवदाब (Depression) | 31 – 49 |
| गहन अवदाब (Deep Depression) | 50 – 61 |
| चक्रवाती तूफान (Cyclonic Storm) | 62 – 88 |
| गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) | 89 – 117 |
| बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) | 118 – 221 |
| सुपर साइक्लोन (Super Cyclone) | 222 से अधिक |
B. नामकरण (Naming)
हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों का नामकरण विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया और प्रशांत के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) के सदस्य देशों द्वारा किया जाता है। इसका उद्देश्य संचार को आसान बनाना और जनता को प्रभावी ढंग से चेतावनी देने में मदद करना है।
नामकरण की प्रक्रिया:
- सदस्य देश: इस पैनल में 13 देश शामिल हैं: भारत, बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन।
- नामों की सूची: प्रत्येक देश नामों की एक सूची प्रदान करता है। 2020 में, 13 देशों में से प्रत्येक ने 13 नामों की एक नई सूची प्रस्तुत की, जिससे कुल 169 नाम बने।
- क्रमिक उपयोग: इन नामों का उपयोग सदस्य देशों के अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम के अनुसार, सूची में दिए गए क्रम में किया जाता है। उदाहरण के लिए, बांग्लादेश द्वारा सुझाए गए नाम के बाद भारत द्वारा सुझाया गया नाम, फिर ईरान, और इसी तरह यह क्रम चलता रहता है।
- सेवानिवृत्ति: यदि कोई चक्रवात बहुत अधिक विनाशकारी होता है, तो उसके नाम को भविष्य में उपयोग से रिटायर (सेवानिवृत्त) कर दिया जाता है ताकि उस आपदा की स्मृति से कोई भ्रम पैदा न हो।
4. भारत के चक्रवात-प्रवण क्षेत्र
भारत की लंबी तटरेखा इसे चक्रवातों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है।
- पूर्वी तट: बंगाल की खाड़ी में बनने वाले चक्रवातों के कारण यह तट अधिक संवेदनशील है। यहाँ चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता दोनों अधिक होती है। प्रमुख प्रभावित राज्य तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल हैं।
- पश्चिमी तट: अरब सागर में चक्रवात कम बनते हैं और वे आमतौर पर कम तीव्र होते हैं। हालांकि, गुजरात और महाराष्ट्र प्रमुख रूप से प्रभावित राज्य हैं।
5. भारत में चक्रवात प्रबंधन
भारत ने चक्रवात प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिससे मृत्यु दर में काफी कमी आई है।
- पूर्वानुमान और चेतावनी: IMD उपग्रहों (जैसे INSAT श्रृंखला), डॉपलर वेदर रडार (DWRs) के एक बड़े नेटवर्क और अन्य उन्नत मॉडलों का उपयोग करके चक्रवातों की निगरानी और सटीक भविष्यवाणी करता है। चेतावनियाँ समय पर जारी की जाती हैं।
- शमन और तैयारी: तटीय क्षेत्रों में बहुउद्देश्यीय चक्रवात आश्रयों का निर्माण, मैंग्रोव वनों का संरक्षण (जो प्राकृतिक अवरोधक के रूप में कार्य करते हैं), और नियमित जागरूकता अभियान चलाना प्रमुख रणनीतियाँ हैं।
- प्रतिक्रिया और बचाव: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) जैसी विशेष टीमें खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए तैनात की जाती हैं। समय पर निकासी चक्रवात प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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