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आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction)

1. परिचय: आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) क्या है?

आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction – DRR) आपदाओं के कारणों का विश्लेषण और प्रबंधन करने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण है। यह आपदा प्रबंधन के पारंपरिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण पाराडाइम शिफ्ट है, जो आपदा के बाद प्रतिक्रिया और राहत पर ध्यान केंद्रित करता था। DRR का लक्ष्य आपदाओं से पहले भेद्यता को कम करने और क्षमता का निर्माण करने पर है, ताकि खतरों के प्रभाव को कम किया जा सके। यह सतत विकास का एक अभिन्न अंग है, क्योंकि आपदाएं विकास की प्रगति को वर्षों पीछे धकेल सकती हैं।

2. सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (2015-2030)

यह DRR के लिए वर्तमान वैश्विक खाका है, जिसे 2015 में जापान के सेंडाई शहर में अपनाया गया था। इसने ह्योगो फ्रेमवर्क फॉर एक्शन की जगह ली। भारत इस पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में से एक है।

सेंडाई फ्रेमवर्क की चार प्राथमिकताएँ (Four Priorities for Action)

  • 1. आपदा जोखिम को समझना (Understanding disaster risk): जोखिमों का आकलन करने, डेटा एकत्र करने और जोखिम की जानकारी को सभी के लिए सुलभ बनाने पर जोर।
  • 2. जोखिम प्रबंधन के लिए आपदा जोखिम शासन को मजबूत करना (Strengthening disaster risk governance): राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर DRR के लिए जिम्मेदार मजबूत संस्थागत ढांचे का निर्माण।
  • 3. लचीलेपन के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण में निवेश करना (Investing in DRR for resilience): जोखिम कम करने के लिए संरचनात्मक (जैसे-आपदा-रोधी भवन) और गैर-संरचनात्मक (जैसे-प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली) उपायों में सार्वजनिक और निजी निवेश को बढ़ावा देना।
  • 4. प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए आपदा तैयारी को बढ़ाना और पुनर्प्राप्ति में “बेहतर तरीके से वापसी का निर्माण” (Build Back Better) करना: प्रतिक्रिया के लिए तैयारी में सुधार करना और पुनर्प्राप्ति चरण का उपयोग अधिक लचीला समाज बनाने के अवसर के रूप में करना।

3. आपदा प्रबंधन चक्र (The Disaster Management Cycle)

DRR आपदा प्रबंधन चक्र के हर चरण में एकीकृत है, लेकिन इसका मुख्य ध्यान आपदा-पूर्व चरण पर है।

A. आपदा-पूर्व चरण (Pre-disaster Phase)

  • न्यूनीकरण (Mitigation): खतरों के प्रभाव को कम करने के लिए किए गए दीर्घकालिक उपाय।
    उदाहरण: भूकंप-रोधी भवनों का निर्माण, मैंग्रोव लगाना, भूमि उपयोग की योजना बनाना।
  • तैयारी (Preparedness): किसी आपदा की स्थिति में प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया करने की क्षमता का निर्माण।
    उदाहरण: प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करना, आपातकालीन अभ्यास (mock drills) करना, आवश्यक वस्तुओं का भंडारण करना।

B. आपदा के दौरान (During Disaster)

  • प्रतिक्रिया (Response): आपदा के तत्काल बाद जीवन बचाने और बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाने वाली कार्रवाइयाँ।
    उदाहरण: खोज और बचाव अभियान, चिकित्सा सहायता, अस्थायी आश्रय।

C. आपदा-पश्चात चरण (Post-disaster Phase)

  • पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण (Recovery and Reconstruction): समुदायों को सामान्य स्थिति में वापस लाने के प्रयास। इसी चरण में “बिल्ड बैक बेटर” (Build Back Better) का सिद्धांत लागू होता है, जिसका अर्थ है कि पुनर्निर्माण इस तरह से किया जाए कि भविष्य के जोखिमों को कम किया जा सके।

4. भारत में आपदा जोखिम न्यूनीकरण

  • कानूनी ढाँचा: भारत ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 पारित किया, जिसने देश में DRR के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार किया।
  • संस्थागत संरचना: इस अधिनियम के तहत, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), और राज्यों में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMAs) की स्थापना की गई।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF): यह आपदाओं के दौरान विशेष प्रतिक्रिया के लिए एक समर्पित बल है।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP): भारत की पहली राष्ट्रीय योजना 2016 में जारी की गई थी, जो पूरी तरह से सेंडाई फ्रेमवर्क के साथ संरेखित है।
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