1. परिचय: सूखा क्या है?
सूखा (Drought) एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जो किसी क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा की एक लंबी अवधि के कारण उत्पन्न होती है, जिससे जल की गंभीर कमी हो जाती है। बाढ़ या भूकंप के विपरीत, सूखा एक धीमी गति से बढ़ने वाली या ‘रेंगती’ (creeping) आपदा है, जिसका कोई स्पष्ट आरंभ या अंत नहीं होता है। यह एक जटिल घटना है जो न केवल पानी की उपलब्धता को प्रभावित करती है, बल्कि कृषि, अर्थव्यवस्था, समाज और पर्यावरण पर भी दूरगामी प्रभाव डालती है।
2. सूखे के प्रकार (Types of Drought)
सूखे को उसके प्रभावों के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है (यह मेन्स परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है)।
A. मौसम विज्ञान संबंधी सूखा (Meteorological Drought)
यह सूखे का सबसे बुनियादी रूप है और इसे केवल वर्षा की कमी के आधार पर परिभाषित किया जाता है। यह तब होता है जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक औसत से कम वर्षा होती है।
B. कृषि सूखा (Agricultural Drought)
यह मिट्टी में नमी की कमी से जुड़ा है, जो फसलों की वृद्धि के लिए अपर्याप्त होती है। यह मौसम विज्ञान संबंधी सूखे के बाद होता है, लेकिन जरूरी नहीं कि यह तुरंत हो। कम वर्षा के साथ-साथ उच्च तापमान और वाष्पीकरण इसे और बढ़ा सकते हैं।
C. जल विज्ञान संबंधी सूखा (Hydrological Drought)
यह तब होता है जब सतही और उपसतही जल स्रोतों (जैसे नदियाँ, झीलें, जलाशय, और भूजल) में पानी का स्तर वर्षा की निरंतर कमी के कारण काफी नीचे चला जाता है। यह अक्सर मौसम विज्ञान संबंधी सूखे के काफी समय बाद प्रकट होता है।
D. सामाजिक-आर्थिक सूखा (Socio-economic Drought)
यह तब होता है जब सूखे की स्थिति पानी, भोजन और ऊर्जा जैसे आर्थिक वस्तुओं की आपूर्ति और मांग को प्रभावित करने लगती है। यह मानव समाज पर सूखे के प्रभाव को दर्शाता है, जैसे खाद्य असुरक्षा, जल विवाद और आय की हानि।
3. सूखे के प्रमुख कारण
A. प्राकृतिक कारण
- वर्षा की कमी: यह सबसे सीधा कारण है, जो अक्सर बड़े पैमाने पर वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर्न में बदलाव के कारण होता है।
- जलवायु पैटर्न: अल नीनो (El Niño) जैसी घटनाएँ दुनिया के कई हिस्सों में, विशेष रूप से भारत और ऑस्ट्रेलिया में, सूखे की स्थिति पैदा कर सकती हैं।
- उच्च तापमान और वाष्पीकरण: उच्च तापमान वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन की दर को बढ़ाता है, जिससे मिट्टी की नमी और सतही जल तेजी से समाप्त हो जाता है।
B. मानवजनित कारण
- अत्यधिक जल उपयोग: कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए सतही और भूजल का अति-दोहन जल स्रोतों पर दबाव डालता है, जिससे सूखे की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
- वनों की कटाई और भूमि उपयोग में परिवर्तन: वनों की कटाई से जल चक्र बाधित होता है, वर्षा कम हो सकती है और मिट्टी की जल धारण क्षमता घट जाती है।
- जलवायु परिवर्तन: वैश्विक तापमान में वृद्धि वर्षा के पैटर्न को बदल रही है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखे की आवृत्ति, तीव्रता और अवधि बढ़ रही है।
4. वैश्विक वितरण और प्रमुख सूखा प्रवण क्षेत्र
- अफ्रीका: साहेल क्षेत्र (अफ्रीका का हॉर्न) दुनिया के सबसे लगातार और गंभीर सूखे वाले क्षेत्रों में से एक है।
- ऑस्ट्रेलिया: यह महाद्वीप अपनी “बूम एंड बस्ट” वर्षा पैटर्न के लिए जाना जाता है और यहाँ गंभीर और लंबे समय तक चलने वाले सूखे आम हैं।
- एशिया: भारत के कई हिस्से (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान), मध्य एशिया और चीन के कुछ हिस्से सूखे के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
- अमेरिका: दक्षिण-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्वोत्तर ब्राजील अक्सर सूखे का सामना करते हैं।