1. परिचय: बाढ़ क्या है?
बाढ़ (Flood) पानी का एक अतिप्रवाह है जो सामान्य रूप से सूखी भूमि को जलमग्न कर देता है। यह दुनिया भर में सबसे आम और व्यापक प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। बाढ़ तब आती है जब किसी नदी, झील या अन्य जल निकाय में पानी की मात्रा उसकी क्षमता से अधिक हो जाती है और पानी उसके किनारों से बाहर फैल जाता है। यह आपदा जीवन, संपत्ति, कृषि और बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।
2. बाढ़ के प्रमुख कारण
बाढ़ के कारण प्राकृतिक और मानवजनित दोनों हो सकते हैं।
A. प्राकृतिक कारण (Natural Causes)
- अत्यधिक वर्षा: लंबे समय तक या बहुत तीव्र वर्षा नदी प्रणालियों और जल निकासी प्रणालियों पर भारी बोझ डाल सकती है, जिससे बाढ़ आती है। भारत में मानसून के दौरान यह आम है।
- बादल फटना (Cloudbursts): किसी छोटे क्षेत्र में बहुत कम समय में अत्यधिक तीव्र वर्षा, जिससे आकस्मिक बाढ़ (Flash Floods) आती है।
- हिम का पिघलना: वसंत ऋतु में पहाड़ों पर बर्फ का तेजी से पिघलना नदियों में पानी की मात्रा को अचानक बढ़ा सकता है।
- चक्रवात और स्टॉर्म सर्ज: उष्णकटिबंधीय चक्रवातों से जुड़ी भारी वर्षा और स्टॉर्म सर्ज (समुद्र के स्तर में असामान्य वृद्धि) तटीय क्षेत्रों में विनाशकारी बाढ़ का कारण बनते हैं।
- हिमनद झील का फटना (GLOFs): हिमनदों के पिघलने से बनी अस्थायी झीलों के अचानक फटने से निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़ आ सकती है, जैसा कि हिमालयी क्षेत्रों में होता है।
B. मानवजनित कारण (Anthropogenic Causes)
- वनों की कटाई (Deforestation): जंगल मिट्टी को बांधे रखते हैं और पानी को सोखने में मदद करते हैं। वनों की कटाई से सतही अपवाह (Surface Runoff) बढ़ जाता है और मिट्टी का कटाव होता है, जिससे नदियों का तल उथला हो जाता है।
- शहरीकरण: शहरों में कंक्रीट और डामर जैसी अपारगम्य सतहें (Impermeable Surfaces) पानी को जमीन में रिसने से रोकती हैं, जिससे अपवाह की मात्रा और गति बढ़ जाती है और शहरी बाढ़ (Urban Flooding) होती है।
- खराब जल निकासी प्रणाली: शहरों में अपर्याप्त या अवरुद्ध जल निकासी प्रणालियाँ भारी वर्षा को संभालने में विफल रहती हैं।
- बांधों का टूटना: बांधों के संरचनात्मक विफलता या खराब प्रबंधन के कारण अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।
3. बाढ़ के प्रकार (Types of Floods)
A. नदीय बाढ़ (Fluvial / River Floods)
यह सबसे आम प्रकार है, जो तब होता है जब एक नदी या धारा अपने किनारों से ऊपर बहती है। यह धीरे-धीरे विकसित हो सकती है।
B. आकस्मिक बाढ़ (Flash Floods)
यह बहुत कम समय में (आमतौर पर 6 घंटे से कम) तीव्र वर्षा या बादल फटने के कारण होती है। पानी बहुत तेज गति से बहता है और यह अत्यधिक विनाशकारी होती है।
C. शहरी बाढ़ (Urban Floods)
यह शहरी क्षेत्रों में तब होती है जब वर्षा की मात्रा जल निकासी प्रणाली की क्षमता से अधिक हो जाती है।
D. तटीय बाढ़ (Coastal Floods)
यह समुद्र के पानी के कारण होती है, जो मुख्य रूप से स्टॉर्म सर्ज, सुनामी या उच्च ज्वार के कारण होता है।
4. वैश्विक वितरण और प्रमुख बाढ़ प्रवण क्षेत्र
- एशिया: यह दुनिया का सबसे अधिक बाढ़ प्रवण महाद्वीप है। गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन (भारत, बांग्लादेश), यांग्त्ज़ी और पीली नदी बेसिन (चीन), और मेकांग नदी बेसिन (दक्षिण-पूर्व एशिया) मानसून की वर्षा के कारण अत्यधिक संवेदनशील हैं।
- यूरोप: डेन्यूब और राइन जैसी प्रमुख नदियों के किनारे बाढ़ एक आवर्ती समस्या है।
- उत्तरी और दक्षिण अमेरिका: मिसिसिपी और अमेज़ॅन नदी घाटियों में व्यापक नदीय बाढ़ आती है, जबकि कैरेबियन और मैक्सिको की खाड़ी के तटीय क्षेत्र हरिकेन के कारण तटीय बाढ़ के प्रति संवेदनशील हैं।
4. भारत में बाढ़ का वितरण और प्रमुख बाढ़ प्रवण क्षेत्र
- उत्तरी भारत: गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणाली भारत के सबसे अधिक बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में से एक है। बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और पश्चिम बंगाल में मानसूनी वर्षा और हिमालयी नदियों के बहाव के कारण व्यापक बाढ़ आती है।
- पूर्वोत्तर भारत: ब्रह्मपुत्र और इसकी सहायक नदियाँ हर वर्ष बाढ़ लाती हैं। विशेषकर असम में नदीय बाढ़ और तट कटाव बड़ी समस्या है।
- पूर्वी भारत: कोसी, गंडक, सोन और दामोदर नदियों वाले क्षेत्र बाढ़ की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। झारखंड और पश्चिम बंगाल के निचले क्षेत्र भी मानसूनी बाढ़ झेलते हैं।
- पश्चिमी भारत: नर्मदा, ताप्ती और साबरमती नदियों के निम्न मैदानों में बाढ़ देखने को मिलती है। गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्से अचानक बाढ़ (Flash Floods) के लिए जाने जाते हैं।
- दक्षिण भारत: गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदी बेसिनों में हर साल मॉनसून के दौरान बाढ़ का खतरा रहता है। केरल में पश्चिमी घाट और उच्च वर्षा के कारण भूस्खलन और फ्लैश फ्लड सामान्य हैं।
- तटीय क्षेत्र: ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और गुजरात के तटीय भाग चक्रवातों और तूफानी लहरों के कारण गंभीर तटीय बाढ़ का सामना करते हैं।