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वनस्पति और जीव (Flora and Fauna)

परिचय: भारत एक महा-विविधता वाला देश

भारत दुनिया के 17 महा-विविधता (Mega-diverse) वाले देशों में से एक है। अपनी विविध जलवायु, स्थलाकृति और पारिस्थितिक तंत्रों के कारण, यह वनस्पतियों (Flora) और जीव-जंतुओं (Fauna) की एक विशाल श्रृंखला का घर है। वैश्विक भूमि क्षेत्र का केवल 2.4% होने के बावजूद, भारत दुनिया की ज्ञात प्रजातियों का लगभग 7-8% हिस्सा रखता है। भारत को 10 जैव-भौगोलिक क्षेत्रों (Biogeographic Zones) में विभाजित किया गया है, जो इसकी पारिस्थितिक विविधता को दर्शाता है।

1. भारत की वनस्पति (Flora of India)

भारत में पौधों की 47,000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो इसे पौधों की विविधता के मामले में दुनिया में दसवें और एशिया में चौथे स्थान पर रखती हैं। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India – BSI) देश में पादप संसाधनों के सर्वेक्षण और पहचान के लिए जिम्मेदार है।

A. वनस्पति के प्रमुख समूह

  • फूल वाले पौधे (Angiosperms): भारत में लगभग 18,000 प्रजातियाँ फूल वाले पौधों की हैं।
  • गैर-फूल वाले पौधे: इसमें फर्न, शैवाल (algae), कवक (fungi), ब्रायोफाइट्स और लाइकेन जैसे पौधे शामिल हैं।
  • स्थानिक प्रजातियाँ (Endemic Species): लगभग 33% फूल वाले पौधे स्थानिक हैं, यानी वे केवल भारत में पाए जाते हैं। ये मुख्य रूप से उत्तर-पूर्व भारत, पश्चिमी घाट, उत्तर-पश्चिमी हिमालय और अंडमान-निकोबार में केंद्रित हैं। उदाहरण: नीलगिरी तहर का भोजन नीलकुरिंजी।

B. महत्वपूर्ण पादप प्रजातियाँ

  • औषधीय पौधे: भारत प्राचीन काल से ही औषधीय पौधों जैसे तुलसी, नीम, अश्वगंधा, सर्पगंधा (उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए) और अर्जुन (हृदय रोगों के लिए) का घर रहा है।
  • इमारती लकड़ी: सागौन, साल, शीशम और देवदार जैसी लकड़ियाँ आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं।
  • अद्वितीय पुष्प: हिमालयी ब्लू पॉपी, ब्रह्म कमल और नीलकुरिंजी (जो हर 12 साल में एक बार खिलता है) जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ भारत में पाई जाती हैं।

2. भारत के जीव-जंतु (Fauna of India)

भारत में जानवरों की 90,000 से अधिक प्रजातियाँ हैं, जिनमें स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर और कीड़ों की एक विशाल विविधता शामिल है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) देश के जीव-जंतुओं के सर्वेक्षण के लिए जिम्मेदार है।

A. प्रमुख जीव-जंतु

  • स्तनधारी (Mammals): भारत में 400 से अधिक स्तनधारी प्रजातियाँ हैं, जिनमें शामिल हैं:
    • प्रमुख शिकारी: बंगाल टाइगर, एशियाई शेर (केवल गिर में), तेंदुआ, हिम तेंदुआ।
    • बड़ी शाकाहारी: भारतीय हाथी, एक सींग वाला गैंडा, गौर (भारतीय बाइसन)।
    • स्थानिक प्रजातियाँ: नीलगिरि तहर, शेर-पूंछ मकाक, कश्मीरी हिरण (हंगुल)।
  • पक्षी (Birds): भारत में पक्षियों की 1,300 से अधिक प्रजातियाँ हैं। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, साइबेरियन क्रेन और हिमालयन मोनाल जैसी कई प्रजातियाँ यहाँ पाई जाती हैं।
  • सरीसृप और उभयचर: किंग कोबरा, घड़ियाल (जो गंभीर रूप से संकटग्रस्त है), और कई स्थानिक मेंढक प्रजातियाँ (जैसे बैंगनी मेंढक) यहाँ पाई जाती हैं।
  • समुद्री जीव: भारत की लंबी तटरेखा समुद्री कछुओं (जैसे ओलिव रिडले), डॉल्फ़िन, व्हेल और डुगोंग (समुद्री गाय) का घर है।

3. जैव विविधता के लिए खतरे

भारत की समृद्ध जैव विविधता कई खतरों का सामना कर रही है:

  • आवास का विनाश और विखंडन: कृषि, शहरीकरण और औद्योगीकरण के लिए वनों की कटाई सबसे बड़ा खतरा है।
  • अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार: बाघ, हाथी (दांत के लिए), और गैंडे (सींग के लिए) जैसी प्रजातियों का अवैध शिकार एक बड़ी समस्या है।
  • प्रदूषण: जल और वायु प्रदूषण पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
  • आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (Invasive Alien Species): लैंटाना और जलकुंभी जैसी प्रजातियाँ स्थानीय वनस्पतियों को नष्ट कर रही हैं।
  • जलवायु परिवर्तन: बढ़ता तापमान और बदलता मौसम पैटर्न प्रजातियों के वितरण और अस्तित्व को प्रभावित कर रहा है।

4. भारत में वन्यजीव संरक्षण

भारत सरकार ने अपनी समृद्ध जैव विविधता की रक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं:

A. कानूनी ढाँचा

  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: यह पौधों और जानवरों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है। इसमें विभिन्न प्रजातियों को उनकी खतरे की स्थिति के आधार पर अलग-अलग अनुसूचियों में सूचीबद्ध किया गया है।
  • जैव विविधता अधिनियम, 2002: इसका उद्देश्य जैव संसाधनों का संरक्षण, उनके सतत उपयोग और जैविक संसाधनों से होने वाले लाभों का उचित और समान बंटवारा सुनिश्चित करना है।
  • वन संरक्षण अधिनियम, 1980: यह वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग को नियंत्रित करता है।

B. संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क

  • राष्ट्रीय उद्यान (National Parks): यहाँ संरक्षण का स्तर उच्चतम होता है और मानवीय गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध होता है।
  • वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries): ये प्रजाति-विशिष्ट होते हैं और कुछ मानवीय गतिविधियों (जैसे लकड़ी इकट्ठा करना) की अनुमति दे सकते हैं।
  • बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves): ये बड़े क्षेत्र होते हैं जिनमें राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य भी शामिल हो सकते हैं। इनका उद्देश्य संरक्षण के साथ-साथ सतत विकास को बढ़ावा देना है। भारत में 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं।

C. विशेष संरक्षण परियोजनाएँ

  • प्रोजेक्ट टाइगर (1973): बाघों के संरक्षण के लिए एक सफल परियोजना।
  • प्रोजेक्ट एलीफेंट (1992): हाथियों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए।
  • अन्य परियोजनाएँ: प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड, हंगुल संरक्षण परियोजना, गिद्ध संरक्षण परियोजना, और घड़ियाल संरक्षण परियोजना।
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