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समुद्रों में नवीनतम अनुसंधान और प्रौद्योगिकी (Latest Research and Technology in Seas)

1. परिचय: सागरों के अन्वेषण का नया युग

सागर, जो सदियों से रहस्य और अन्वेषण का विषय रहे हैं, अब प्रौद्योगिकी की प्रगति के कारण एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। रोबोटिक्स, सैटेलाइट ओशनोग्राफी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और जेनेटिक इंजीनियरिंग जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियाँ हमें सागरों को पहले से कहीं अधिक गहराई से समझने और उनके संसाधनों का सतत रूप से उपयोग करने में सक्षम बना रही हैं। यह अनुसंधान ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

2. गहरे समुद्र के अन्वेषण में प्रौद्योगिकी

A. मानवयुक्त और रोबोटिक वाहन

गहरे समुद्र के उच्च दबाव और अंधेरे वातावरण का अध्ययन करने के लिए विशेष वाहनों का उपयोग किया जाता है।

  • मानवयुक्त सबमर्सिबल (Manned Submersibles): ये पनडुब्बियाँ वैज्ञानिकों को सीधे गहरे समुद्र में ले जाती हैं। भारत का “समुद्रयान मिशन” इसी का एक हिस्सा है, जिसके तहत “मत्स्य 6000” नामक वाहन तीन मनुष्यों को 6000 मीटर की गहराई तक ले जाएगा।
  • ROVs और AUVs: रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROVs) को सतह पर मौजूद जहाज से नियंत्रित किया जाता है, जबकि ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (AUVs) पूर्व-निर्धारित मिशनों पर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। इनका उपयोग समुद्र तल का मानचित्रण करने, नमूने एकत्र करने और पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स जैसे खनिजों का पता लगाने के लिए किया जाता है।

B. ध्वनिक प्रौद्योगिकी (Acoustic Technology)

SONAR (साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग) का उपयोग करके, वैज्ञानिक समुद्र तल के विस्तृत 3D नक्शे बना सकते हैं (जिसे बाथिमेट्री कहा जाता है), मछली के झुंड का पता लगा सकते हैं, और समुद्र के नीचे की भूवैज्ञानिक संरचनाओं का अध्ययन कर सकते हैं।

3. सैटेलाइट ओशनोग्राफी और निगरानी

उपग्रह हमें सागरों की सतह और गतिशीलता का एक वैश्विक, वास्तविक समय का दृश्य प्रदान करते हैं।

  • समुद्री प्रदूषण की निगरानी: उपग्रह तेल रिसाव का पता लगा सकते हैं और उनके फैलाव को ट्रैक कर सकते हैं। वे पानी में क्लोरोफिल की सांद्रता को मापकर पोषक तत्व प्रदूषण और हानिकारक शैवाल प्रस्फुटन की निगरानी भी कर सकते हैं।
  • अवैध मछली पकड़ने पर नज़र रखना: वेसल मॉनिटरिंग सिस्टम (VMS) और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) उपग्रहों का उपयोग करके, अधिकारी अवैध, असूचित और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने वाली नौकाओं की पहचान और ट्रैकिंग कर सकते हैं।

4. समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और जीनोमिक्स

यह एक उभरता हुआ क्षेत्र है जिसमें अपार संभावनाएं हैं।

  • जीन मैपिंग और बायोप्रोस्पेक्टिंग: वैज्ञानिक समुद्री जीवों के DNA का विश्लेषण करके नई प्रजातियों की खोज कर रहे हैं और ऐसे अद्वितीय यौगिकों की पहचान कर रहे हैं जिनका उपयोग नई दवाओं, एंटीबायोटिक्स और कैंसर-रोधी एजेंटों के विकास में किया जा सकता है।
  • पर्यावरणीय DNA (eDNA): जीव अपने पर्यावरण में DNA के निशान (जैसे त्वचा कोशिकाएं) छोड़ते हैं। वैज्ञानिक अब पानी के नमूनों से इस eDNA का विश्लेषण करके यह पता लगा सकते हैं कि उस क्षेत्र में कौन-कौन सी प्रजातियाँ मौजूद हैं, बिना उन्हें पकड़े।

5. सतत उपयोग और ऊर्जा के लिए प्रौद्योगिकी

  • अपतटीय नवीकरणीय ऊर्जा: पारंपरिक अपतटीय पवन टरबाइनों के अलावा, अब फ्लोटिंग विंड फार्म विकसित किए जा रहे हैं जो गहरे पानी में स्थापित किए जा सकते हैं। तरंग ऊर्जा कन्वर्टर्स और ज्वारीय टरबाइन भी स्वच्छ ऊर्जा के आशाजनक स्रोत हैं।
  • सतत जलीय कृषि (Sustainable Aquaculture): पुनःपरिसंचारी जलीय कृषि प्रणाली (RAS) और एकीकृत बहु-पोषी जलीय कृषि (IMTA) जैसी प्रौद्योगिकियाँ अपशिष्ट को कम करती हैं और मछली पालन के पर्यावरणीय प्रभाव को सीमित करती हैं।
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