परिचय: भारत में सिंचाई की आवश्यकता
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ कृषि काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। हालाँकि, भारत में वर्षा की प्रकृति अनियमित, असमान और मौसमी है, जिसके कारण देश भर में साल भर खेती के लिए सिंचाई अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। सिंचाई न केवल फसलों को पानी की निश्चित आपूर्ति सुनिश्चित करती है, बल्कि यह उच्च उपज देने वाली किस्मों के उपयोग को भी संभव बनाती है, जिससे खाद्य सुरक्षा बढ़ती है।
1. सिंचाई परियोजनाओं का वर्गीकरण
भारत में सिंचाई परियोजनाओं को उनके कृष्य कमांड क्षेत्र (Culturable Command Area – CCA) के आधार पर तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
- वृहद सिंचाई परियोजना (Major Irrigation Project): 10,000 हेक्टेयर से अधिक CCA वाली परियोजनाएँ।
- मध्यम सिंचाई परियोजना (Medium Irrigation Project): 2,000 से 10,000 हेक्टेयर के बीच CCA वाली परियोजनाएँ।
- लघु सिंचाई परियोजना (Minor Irrigation Project): 2,000 हेक्टेयर से कम CCA वाली परियोजनाएँ। इसके अंतर्गत कुएँ, नलकूप, तालाब और ड्रिप सिंचाई शामिल हैं।
2. भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ
स्वतंत्रता के बाद, भारत ने कृषि और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं की शुरुआत की। इनका उद्देश्य सिंचाई के साथ-साथ जलविद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति, मत्स्य पालन और पर्यटन को बढ़ावा देना भी था। भारत के पहले प्रधानमंत्री, जवाहरलाल नेहरू, ने इन परियोजनाओं को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा था।
| परियोजना का नाम | नदी | लाभान्वित राज्य | मुख्य उद्देश्य और महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|---|
| भाखड़ा-नांगल परियोजना | सतलुज | पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश | यह भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है। भाखड़ा बांध (गुरुत्वाकर्षण बांध) दुनिया के सबसे ऊंचे बांधों में से एक है। इसके जलाशय को ‘गोबिंद सागर’ कहा जाता है। |
| दामोदर घाटी निगम (DVC) | दामोदर | झारखंड, पश्चिम बंगाल | यह स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसे अमेरिका की ‘टेनेसी वैली अथॉरिटी’ (TVA) के मॉडल पर बनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण था, क्योंकि दामोदर को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था। |
| हीराकुंड बांध परियोजना | महानदी | ओडिशा, छत्तीसगढ़ | यह दुनिया का सबसे लंबा मिट्टी का बांध (लगभग 25.8 किमी) है। इसका मुख्य उद्देश्य महानदी में बाढ़ को नियंत्रित करना और सिंचाई एवं बिजली उत्पादन करना है। |
| सरदार सरोवर परियोजना | नर्मदा | गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान | यह नर्मदा नदी पर बनी सबसे बड़ी परियोजना है। इसका उद्देश्य गुजरात के सूखाग्रस्त क्षेत्रों और राजस्थान को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराना है। |
| नागार्जुन सागर परियोजना | कृष्णा | आंध्र प्रदेश, तेलंगाना | यह एक चिनाई वाला बांध है, जिसका नाम बौद्ध विद्वान नागार्जुन के नाम पर रखा गया है। यह सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। |
| इंदिरा गांधी नहर परियोजना | सतलुज और ब्यास | राजस्थान, पंजाब, हरियाणा | यह भारत की सबसे लंबी नहर है। इसने राजस्थान के थार मरुस्थल के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में कृषि का विकास संभव बनाया है। इसे ‘राजस्थान की जीवन रेखा’ भी कहा जाता है। |
| कोसी परियोजना | कोसी | बिहार, नेपाल | यह भारत और नेपाल की संयुक्त परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य कोसी नदी, जिसे ‘बिहार का शोक’ कहा जाता है, के विनाशकारी बाढ़ को नियंत्रित करना है। |
| तुंगभद्रा परियोजना | तुंगभद्रा (कृष्णा की सहायक नदी) | कर्नाटक, आंध्र प्रदेश | यह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की एक संयुक्त परियोजना है, जो सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। |