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प्रमुख जनजातियाँ (Major Tribes)

1. परिचय

भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, और इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा यहाँ के आदिवासी समुदाय हैं, जिन्हें अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) के रूप में भी जाना जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या में जनजातीय आबादी का हिस्सा 8.6% है। ये समुदाय अपनी अनूठी भाषाओं, परंपराओं, त्योहारों और जीवन शैली के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करते हैं।

2. भारत की प्रमुख जनजातियाँ: एक क्षेत्रीय अवलोकन

भारत की जनजातियों को उनके निवास स्थान के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है। यहाँ कुछ प्रमुख जनजातियों का विस्तृत विवरण दिया गया है:

मध्य और पूर्वी भारत की जनजातियाँ

जनजाति प्रमुख राज्य भाषा प्रमुख त्योहार और नृत्य अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
गोंड मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा गोंडी (द्रविड़ भाषा परिवार) केशलापुर जात्रा, मड़ई उत्सव।
नृत्य: सैला, करमा।
यह भारत का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है। इनकी ‘घोटुल’ नामक युवा गृह परंपरा प्रसिद्ध है।
भील राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र भीली (इंडो-आर्यन भाषा) भगोरिया हाट (विवाह उत्सव), दीवाली, होली।
नृत्य: घूमर, गैर।
यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा जनजातीय समूह है। ये कुशल धनुर्धर माने जाते हैं।
संथाल झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, असम संथाली सोहराई (फसल उत्सव), बाहा (फूलों का त्योहार)।
नृत्य: संथाली नृत्य।
संथाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है।
मुंडा झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ मुंडारी मागे, सरहुल, करम। बिरसा मुंडा, एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, इसी समुदाय से थे। ये मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं।

पूर्वोत्तर भारत की जनजातियाँ

जनजाति प्रमुख राज्य भाषा प्रमुख त्योहार और नृत्य अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
नागा नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश नागामी (विभिन्न बोलियाँ) हॉर्नबिल महोत्सव, सेकरेनी। यह कई उप-जनजातियों का एक समूह है। अपनी योद्धा परंपरा और विशिष्ट वेशभूषा के लिए जाने जाते हैं।
खासी मेघालय खासी नोंगक्रेम, शाद सुक मिनसिएम। यह एक मातृसत्तात्मक समाज है, जहाँ वंश माँ के नाम से चलता है और संपत्ति सबसे छोटी बेटी को मिलती है।
गारो मेघालय, असम, त्रिपुरा गारो वंगाला (फसल कटाई का त्योहार)। खासी जनजाति की तरह यह भी एक मातृसत्तात्मक समाज है।
भूटिया सिक्किम, पश्चिम बंगाल सिक्किमी, भूटिया, नेपाली लोसर, सागा दावा। ये मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं और अपने कलात्मक ऊनी वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध हैं।

दक्षिण भारत की जनजातियाँ

जनजाति प्रमुख राज्य भाषा प्रमुख त्योहार और नृत्य अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
टोडा तमिलनाडु (नीलगिरी पहाड़ियाँ) टोडा (द्रविड़ भाषा) मोदवेठ (वार्षिक त्योहार)। ये अपनी बहुपति प्रथा (fraternal polyandry) और भैंस पालन के लिए जाने जाते हैं। इनके घर बैरल के आकार के होते हैं।
चेंचू आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा चेंचू (द्रविड़ भाषा) स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा। ये पारंपरिक रूप से शिकारी-संग्राहक समुदाय हैं और जंगलों पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।

द्वीप समूह की जनजातियाँ

जनजाति प्रमुख राज्य भाषा जीवन शैली अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
जारवा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जारवा शिकारी-संग्राहक यह भारत की एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है। बाहरी दुनिया से इनका संपर्क बहुत सीमित है।
सेंटिनलीज उत्तरी सेंटिनल द्वीप (अंडमान) अज्ञात (सेंटिनलीज) शिकारी-संग्राहक यह दुनिया की सबसे अलग-थलग जनजातियों में से एक है। भारत सरकार इनकी निजता की रक्षा करती है और द्वीप पर जाने पर रोक है।

3. जनजातियों से जुड़े रोचक तथ्य

  • संवैधानिक संरक्षण: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित और सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया निर्धारित करता है।
  • PVTGs: भारत में 75 जनजातीय समूहों को “विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह” (Particularly Vulnerable Tribal Groups) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिन्हें अधिक सुरक्षा और समर्थन की आवश्यकता है।
  • जनसंख्या के आधार पर: मध्य प्रदेश में भारत की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है।
  • जनसंख्या प्रतिशत के आधार पर: मिजोरम (लगभग 94.4%) और लक्षद्वीप (लगभग 94.8%) में उनकी कुल जनसंख्या में जनजातियों का प्रतिशत सबसे अधिक है।
  • जनजाति-मुक्त राज्य: पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पुडुचेरी में कोई भी अधिसूचित अनुसूचित जनजाति नहीं है।

4. जनजातीय उत्थान के लिए प्रमुख सरकारी योजनाएँ

भारत सरकार ने अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कई कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं:

  • ट्राइफेड (TRIFED): भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ की स्थापना 1987 में हुई थी। इसका उद्देश्य जनजातीय उत्पादों के विपणन के माध्यम से आदिवासियों का आर्थिक विकास करना है।
  • प्रधानमंत्री वन धन योजना (Van Dhan Yojana): 2018 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य लघु वन उपज (Minor Forest Produce) का मूल्य संवर्धन करके आदिवासियों की आय में सुधार करना है।
  • एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS): दूरदराज के आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए इन स्कूलों की स्थापना की जा रही है।
  • वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act): यह कानून पारंपरिक रूप से जंगल में रहने वाले समुदायों के वन भूमि पर अधिकारों को मान्यता देता है।
  • प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना: जनजातीय आबादी वाले गांवों के एकीकृत विकास के लिए यह योजना शुरू की गई है।

5. निष्कर्ष

भारत के आदिवासी समुदाय देश की सांस्कृतिक विविधता के संरक्षक हैं। उनकी अनूठी परंपराएं, भाषाएं और ज्ञान प्रणालियाँ राष्ट्रीय धरोहर हैं। आधुनिकीकरण और विकास की प्रक्रिया में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इन समुदायों के अधिकारों की रक्षा हो और उनकी विशिष्ट पहचान संरक्षित रहे।

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