1. परिचय (Introduction)
सरसों (Mustard), जिसे ‘रेपसीड-सरसों’ समूह में शामिल किया जाता है, मूंगफली के बाद भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण तिलहन फसल है। यह उत्तर भारत में खाना पकाने के तेल का मुख्य स्रोत है। यह ब्रैसिसेकी (Brassicaceae) परिवार से संबंधित है।
2. जलवायु आवश्यकताएँ (Climatic Requirements)
- तापमान: यह एक शीतोष्ण फसल है जिसे ठंडी और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। इसके लिए आदर्श तापमान 10°C से 25°C के बीच होता है। पाला (Frost) इसकी फसल के लिए, विशेषकर फूल आने के समय, बहुत हानिकारक होता है।
- वर्षा: इसे 25 सेमी से 40 सेमी की कम वर्षा की आवश्यकता होती है। यह मुख्य रूप से सिंचित और असिंचित दोनों स्थितियों में उगाई जाती है।
- मिट्टी: हल्की से भारी दोमट मिट्टी (Light to heavy loamy soil) इसके लिए सबसे उपयुक्त है।
3. प्रमुख उत्पादक राज्य (Major Producing States)
- राजस्थान (सबसे बड़ा उत्पादक)
- मध्य प्रदेश
- हरियाणा
- उत्तर प्रदेश
- पश्चिम बंगाल
4. फसल मौसम (Crop Season)
सरसों भारत की एक प्रमुख रबी फसल है।
- बुवाई का समय: सितंबर के अंत से अक्टूबर तक।
- कटाई का समय: फरवरी से मार्च तक।
5. उन्नत किस्में (High Yielding Varieties)
- पूसा बोल्ड, पूसा जयकिसान
- वरुणा (T-59), क्रांति
- आरएच-30
6. कृषि प्रथाएँ (Agricultural Practices)
सरसों को अक्सर गेहूँ, जौ, और चने के साथ मिश्रित फसल के रूप में उगाया जाता है। इसे एफिड्स (aphids) जैसे कीटों से बचाने के लिए उचित देखभाल की आवश्यकता होती है। फसल पकने पर इसके पौधों को काटकर सुखाया जाता है और फिर थ्रेसिंग करके बीजों को अलग किया जाता है।
7. उत्पादन और उपज (Production and Yield)
- उत्पादन: भारत दुनिया में रेपसीड-सरसों के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है।
- महत्व: यह भारत की खाद्य तेल सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
8. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- सरसों एक रबी फसल और भारत की दूसरी मुख्य तिलहन फसल है।
- इसके लिए ठंडी और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है, और पाला हानिकारक है।
- राजस्थान भारत का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक राज्य है।
- भारत दुनिया में रेपसीड-सरसों के प्रमुख उत्पादकों में से एक है।
9. अन्य महत्वपूर्ण तथ्य (Other Important Facts)
- सरसों अनुसंधान निदेशालय (Directorate of Rapeseed-Mustard Research) भरतपुर, राजस्थान में स्थित है।
- सरसों के तेल का उपयोग मुख्य रूप से खाना पकाने और अचार बनाने में किया जाता है।
- तेल निकालने के बाद बची हुई खली (Oil cake) पशुओं के लिए एक पौष्टिक चारा है।
- इसके कोमल पत्तों का उपयोग ‘सरसों का साग’ बनाने के लिए किया जाता है, जो उत्तर भारत में एक लोकप्रिय व्यंजन है।