परिचय: नर्मदा घाटी परियोजना
नर्मदा घाटी परियोजना, नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों पर केंद्रित एक विशाल जल संसाधन परियोजना है। नर्मदा, प्रायद्वीपीय भारत की पश्चिम की ओर बहने वाली सबसे लंबी नदी है। इस परियोजना के अंतर्गत 30 बड़े, 135 मध्यम और 3000 छोटे बांधों की एक श्रृंखला बनाने की परिकल्पना की गई है। यह भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत और सिंचाई परियोजनाओं में से एक होने के साथ-साथ सबसे विवादास्पद परियोजनाओं में से भी एक रही है।
1. परियोजना के प्रमुख बांध
हालांकि इस परियोजना में कई बांध शामिल हैं, लेकिन दो बांध इसके केंद्र में हैं:
A. सरदार सरोवर बांध (Sardar Sarovar Dam)
- स्थान: यह गुजरात के नवगाम के पास स्थित है।
- प्रकार: यह एक ठोस गुरुत्वाकर्षण बांध (Concrete Gravity Dam) है।
- लाभान्वित राज्य: इस परियोजना से चार राज्यों – गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान – को लाभ मिलता है।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य गुजरात के सूखाग्रस्त कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों तथा राजस्थान के बाड़मेर और जालोर जिलों को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराना है।
- नहर प्रणाली: नर्मदा मुख्य नहर दुनिया की सबसे लंबी कंक्रीट-लाइन्ड सिंचाई नहरों में से एक है।
B. इंदिरा सागर बांध (Indira Sagar Dam)
- स्थान: यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नगर के पास स्थित है।
- भूमिका: यह भारत का सबसे बड़ा जलाशय (storage capacity) बनाता है। यह नर्मदा घाटी में एक प्रमुख बांध है जो सरदार सरोवर बांध को विनियमित जल प्रवाह प्रदान करता है।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर जलविद्युत उत्पादन (1000 मेगावाट) और下游 क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है।
2. परियोजना के उद्देश्य और लाभ
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निम्नलिखित व्यापक उद्देश्य हैं:
- सिंचाई (Irrigation): गुजरात और राजस्थान के लाखों हेक्टेयर सूखाग्रस्त और मरुस्थलीय भूमि पर सिंचाई की सुविधा प्रदान करना।
- पेयजल आपूर्ति (Drinking Water): गुजरात के हजारों गांवों और सैकड़ों कस्बों को पीने का पानी उपलब्ध कराना।
- जलविद्युत उत्पादन (Hydroelectric Power): सरदार सरोवर और इंदिरा सागर सहित कई बांधों से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करना।
- बाढ़ नियंत्रण (Flood Control): नर्मदा नदी के निचले इलाकों में बाढ़ के प्रकोप को कम करना।
3. विवाद और नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA)
नर्मदा घाटी परियोजना अपने सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण शुरू से ही شدید विवादों में रही है।
A. नर्मदा बचाओ आंदोलन (Narmada Bachao Andolan – NBA)
यह मेधा पाटकर और बाबा आम्टे जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में एक शक्तिशाली सामाजिक आंदोलन है। इस आंदोलन ने परियोजना से उत्पन्न होने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।
B. आंदोलन द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे
- बड़े पैमाने पर विस्थापन: बांधों के जलाशयों के कारण मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के लाखों लोगों (मुख्य रूप से आदिवासी और किसान) को उनके घरों और जमीनों से विस्थापित होना पड़ा।
- अपर्याप्त पुनर्वास: आंदोलन का मुख्य तर्क यह था कि सरकार के पास विस्थापित लोगों के उचित पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए कोई ठोस नीति नहीं थी।
- पर्यावरणीय विनाश: बांधों के कारण हजारों हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि और मूल्यवान जंगल पानी में डूब गए, जिससे जैव विविधता को भारी नुकसान हुआ।
- लागत-लाभ विश्लेषण पर सवाल: आंदोलनकारियों ने परियोजना के आर्थिक लाभों और सामाजिक-पर्यावरणीय लागतों के सरकार के आकलन पर भी सवाल उठाए।
इन विवादों के कारण परियोजना के काम में कई बार देरी हुई और सुप्रीम कोर्ट को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा।