1. परिचय (Introduction)
झीलें भूमि से घिरे हुए जल के पिंड हैं। भूवैज्ञानिक दृष्टि से, अधिकांश झीलें अस्थायी (temporary) होती हैं और अंततः तलछट से भर जाती हैं या उनका पानी निकल जाता है। झीलों का निर्माण विभिन्न प्रकार की अंतर्जात (endogenetic) और बहिर्जात (exogenetic) प्रक्रियाओं द्वारा होता है, जो पृथ्वी की सतह पर गड्ढों या बेसिन का निर्माण करती हैं जहाँ पानी जमा हो सकता है।
2. विवर्तनिक प्रक्रियाओं से निर्मित झीलें (Lakes Formed by Tectonic Processes)
इन झीलों का निर्माण पृथ्वी की पपड़ी में गति और विरूपण के कारण होता है।
- भ्रंश घाटी झीलें (Rift Valley Lakes): ये तब बनती हैं जब दो समानांतर भ्रंशों के बीच की भूमि नीचे धँस जाती है, जिससे एक लंबा, संकरा और गहरा बेसिन (ग्रैबेन) बनता है।
उदाहरण: अफ्रीका की महान भ्रंश घाटी की झीलें (जैसे तांगानिका, मलावी), दुनिया की सबसे गहरी झील बैकाल (रूस), और मृत सागर (Dead Sea)। - पपड़ी के मुड़ने से बनी झीलें (Lakes due to Warping): पृथ्वी की पपड़ी के व्यापक रूप से मुड़ने या धँसने से बड़े, उथले बेसिन बन सकते हैं।
उदाहरण: विक्टोरिया झील (अफ्रीका) और कैस्पियन सागर का निर्माण इसी प्रक्रिया से जुड़ा है।
3. ज्वालामुखी प्रक्रियाओं से निर्मित झीलें (Lakes Formed by Volcanic Processes)
- क्रेटर और काल्डेरा झीलें: ये झीलें निष्क्रिय या विलुप्त ज्वालामुखियों के क्रेटर (मुख) या काल्डेरा (विस्तारित मुख) में पानी भरने से बनती हैं।
उदाहरण: लोनार झील (महाराष्ट्र, भारत) – जो एक उल्कापिंड के प्रभाव से भी बनी मानी जाती है, क्रेटर लेक (USA)। - लावा-बाधित झीलें: जब ज्वालामुखी से निकला लावा प्रवाह किसी नदी की घाटी को अवरुद्ध कर देता है, तो उसके पीछे पानी जमा होकर एक झील बन जाती है।
4. हिमनदीय प्रक्रियाओं से निर्मित झीलें (Lakes Formed by Glacial Processes)
हिम युगों के दौरान हिमनदों की अपरदनात्मक और निक्षेपण क्रियाओं ने दुनिया में सबसे अधिक संख्या में झीलों का निर्माण किया है।
- सर्क झीलें या टार्न: ये हिमनद द्वारा खोदे गए कुर्सी के आकार के गड्ढों (सर्क) में बनती हैं।
- मोरेन-बाधित झीलें: जब हिमनद अपने द्वारा लाए गए मलबे (मोरेन) को एक घाटी के मुहाने पर जमा कर देता है, तो यह एक प्राकृतिक बांध के रूप में कार्य करता है, जिससे एक झील बनती है।
उदाहरण: हिमालय की कई झीलें (जैसे नैनीताल, भीमताल)। - केटल झीलें: जब हिमनद के पिघलने के बाद बचे हुए बर्फ के बड़े टुकड़े बजरी और रेत में दब जाते हैं और बाद में पिघलते हैं, तो एक गड्ढा बन जाता है जिसमें पानी भर जाता है।
5. अन्य प्रक्रियाओं से निर्मित झीलें
- नदीय झीलें – गोखुर झीलें (Fluvial Lakes – Oxbow Lakes): ये मैदानी इलाकों में बहने वाली नदियों के विसर्प (meander) के कट जाने से बनती हैं, जिससे एक घोड़े की नाल के आकार की झील रह जाती है।
उदाहरण: गंगा के मैदान में कई गोखुर झीलें पाई जाती हैं। - वायवीय झीलें (Aeolian Lakes): मरुस्थलीय क्षेत्रों में, हवा द्वारा रेत उड़ाने से बने गड्ढों (अपवाहन गर्त) में अस्थायी रूप से पानी भर सकता है। इन्हें प्लाया (Playas) भी कहा जाता है।
- भूस्खलन-निर्मित झीलें: पहाड़ी क्षेत्रों में, भूस्खलन या चट्टानों के गिरने से नदी का मार्ग अवरुद्ध हो सकता है, जिससे अस्थायी झीलें बन जाती हैं।
- मानव निर्मित झीलें (Man-made Lakes): नदियों पर बांध बनाकर बनाए गए जलाशय।
उदाहरण: गोबिंद सागर (भाखड़ा बांध), नागार्जुन सागर।