1. परिचय: मृदा परिच्छेदिका क्या है?
मृदा परिच्छेदिका (Soil Profile) सतह से लेकर नीचे मूल चट्टान तक मृदा का एक ऊर्ध्वाधर संस्तर (vertical cross-section) है। यह मृदा की विभिन्न परतों को दिखाता है, जिन्हें मृदा संस्तर (Soil Horizons) कहा जाता है। प्रत्येक संस्तर की अपनी अलग भौतिक और रासायनिक विशेषताएँ होती हैं, जैसे रंग, बनावट, और संरचना। एक अच्छी तरह से विकसित मृदा परिच्छेदिका का अध्ययन हमें मृदा के निर्माण, उसकी उर्वरता और उसके गुणों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है।
2. प्रमुख मृदा संस्तर (Major Soil Horizons)
एक परिपक्व मृदा में आमतौर पर निम्नलिखित संस्तर होते हैं, जिन्हें ऊपर से नीचे की ओर व्यवस्थित किया गया है:
O संस्तर (O Horizon)
यह सबसे ऊपरी परत है और मुख्य रूप से कार्बनिक पदार्थों (Organic Matter) से बनी होती है, जैसे गिरी हुई पत्तियाँ, टहनियाँ और अन्य पौधों के अवशेष, जो अपघटन के विभिन्न चरणों में होते हैं। यह वनीय मृदाओं में प्रमुख होती है और ऊपरी हिस्से में ताजा गिरे हुए पदार्थ और निचले हिस्से में पूरी तरह से सड़ा हुआ ह्यूमस (Humus) होता है।
A संस्तर (A Horizon / Topsoil)
इसे शीर्ष मृदा (Topsoil) भी कहा जाता है। यह खनिज कणों और ह्यूमस का मिश्रण है, जो इसे गहरा रंग प्रदान करता है। यह जैविक गतिविधि का मुख्य क्षेत्र है, जहाँ पौधों की अधिकांश जड़ें और सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं। यह पौधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण परत है।
E संस्तर (E Horizon / Zone of Eluviation)
यह एक अपवहन या निक्षालन (Leaching) की परत है, जो A और B संस्तरों के बीच पाई जाती है (यह सभी मृदाओं में मौजूद नहीं होती)। E का अर्थ Eluviation है – यानी ‘बाहर धोना’। पानी इस परत से गुजरते हुए क्ले, लोहा और एल्यूमीनियम ऑक्साइड जैसे खनिजों को घोलकर नीचे की ओर ले जाता है। परिणामस्वरूप, यह परत अक्सर हल्के रंग की और रेतीली होती है। यह पॉडज़ोल जैसी वन मृदाओं में प्रमुख है।
B संस्तर (B Horizon / Subsoil)
इसे अवमृदा (Subsoil) भी कहा जाता है। यह निक्षेपण या संचयन (Accumulation) का क्षेत्र है, जिसे Illuviation कहा जाता है। ऊपरी परतों से निक्षालित होकर आए खनिज और क्ले यहाँ जमा हो जाते हैं। यह परत आमतौर पर सघन, मोटी और ऊपरी परतों की तुलना में हल्के रंग की होती है।
C संस्तर (C Horizon / Parent Material)
इस परत में आंशिक रूप से अपक्षयित मूल चट्टानी पदार्थ होते हैं। यह मृदा के विकास का प्रारंभिक चरण है और इसमें बहुत कम जैविक गतिविधि होती है।
R संस्तर (R Horizon / Bedrock)
यह सबसे निचली परत है, जिसमें कठोर, गैर-अपक्षयित मूल चट्टान (Bedrock) होती है।
3. मृदा संरचना (Soil Structure)
मृदा संरचना मृदा के कणों (रेत, गाद, और क्ले) के प्राकृतिक समुच्चय (aggregates) में व्यवस्थित होने के तरीके को संदर्भित करती है, जिन्हें पेड्स (Peds) कहा जाता है। संरचना मृदा में पानी और हवा के संचलन, जड़ के विकास और कटाव के प्रति प्रतिरोध को बहुत प्रभावित करती है।
संरचना के प्रमुख प्रकार:
- दानेदार (Granular): छोटे, गोल पेड्स। यह संरचना A संस्तर में आम है और कृषि के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है क्योंकि यह पानी और हवा के संचलन के लिए उत्कृष्ट है।
- ब्लॉकी (Blocky): अनियमित, ब्लॉक जैसे पेड्स। यह B संस्तर में आम है और अच्छी जल निकासी प्रदान करती है।
- प्रिज्मीय और स्तंभीय (Prismatic and Columnar): ऊर्ध्वाधर रूप से उन्मुख पेड्स। ये शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के B संस्तर में पाए जाते हैं।
- प्लेटी (Platy): क्षैतिज रूप से व्यवस्थित पतली, सपाट प्लेटें। यह संरचना पानी के ऊर्ध्वाधर प्रवाह को बाधित करती है और अक्सर संकुचित मिट्टी में पाई जाती है।
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