1. परिचय (Introduction)
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम 1960 के दशक में डॉ. विक्रम साराभाई के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू हुआ, जिन्हें ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक’ कहा जाता है। इसका प्राथमिक उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग देश के विकास और आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए करना था।
2. प्रमुख संगठन (Key Organisations)
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation – ISRO): यह भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है। इसकी स्थापना 15 अगस्त, 1969 को हुई थी। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। यह अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के तहत काम करता है, जो सीधे भारत के प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है।
- IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र): यह निजी कंपनियों को भारतीय अंतरिक्ष अवसंरचना का उपयोग करने में सक्षम बनाने और बढ़ावा देने के लिए एक एकल-खिड़की, स्वतंत्र, नोडल एजेंसी है।
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NewSpace India Limited – NSIL): यह इसरो की वाणिज्यिक शाखा है, जो भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों के उत्पादों और सेवाओं का विपणन करती है।
3. भारत के प्रक्षेपण यान (Launch Vehicles of India)
प्रक्षेपण यान या ‘रॉकेट’ वे वाहन हैं जिनका उपयोग उपग्रहों को अंतरिक्ष में उनकी कक्षा में स्थापित करने के लिए किया जाता है।
| प्रक्षेपण यान | विवरण |
|---|---|
| PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) | इसे ‘इसरो का वर्कहॉर्स’ (Workhorse of ISRO) कहा जाता है। यह कम पृथ्वी कक्षा (LEO) और सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (SSO) में उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए एक विश्वसनीय और बहुमुखी यान है। चंद्रयान-1 और मंगलयान जैसे ऐतिहासिक मिशन इसी से लॉन्च किए गए थे। |
| GSLV (भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान) | यह भारी उपग्रहों, विशेष रूप से संचार उपग्रहों, को भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO) में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक तीन-चरणीय यान है जिसमें शक्तिशाली क्रायोजेनिक अपर स्टेज (Cryogenic Upper Stage – CUS) होता है। |
| LVM3 (प्रक्षेपण यान मार्क-3) | यह इसरो का सबसे भारी और सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 मिशन इसी से लॉन्च किए गए थे। यह भविष्य के भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (गगनयान) के लिए भी चुना गया है। |
4. भारत के प्रमुख उपग्रह कार्यक्रम (Major Satellite Programmes of India)
- INSAT प्रणाली (भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह): यह दूरसंचार, प्रसारण, मौसम विज्ञान और खोज एवं बचाव कार्यों के लिए बहुउद्देशीय भूस्थिर उपग्रहों की एक श्रृंखला है।
- IRS प्रणाली (भारतीय सुदूर संवेदन): यह पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का एक समूह है, जो संसाधन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन जैसे अनुप्रयोगों के लिए डेटा प्रदान करता है।
- NavIC (नाविक) – भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली: यह संयुक्त राज्य अमेरिका के GPS की तरह भारत की अपनी स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली है, जो सटीक स्थिति और समय संबंधी सेवाएं प्रदान करती है।
5. ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन (Historic Space Missions)
- चंद्रयान-1 (2008): भारत का पहला चंद्र मिशन, जिसने चंद्रमा पर पानी के अणुओं की खोज की।
- मंगलयान (Mars Orbiter Mission – MOM, 2013): भारत अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश और चौथा अंतरिक्ष संगठन बना।
- चंद्रयान-3 (2023): भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बना।
- गगनयान (Gaganyaan): भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, जिसका लक्ष्य 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
6. प्रमुख केंद्र (Major Centres)
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा: यह आंध्र प्रदेश में स्थित भारत का मुख्य रॉकेट लॉन्च सेंटर है।
- विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), तिरुवनंतपुरम: यह प्रक्षेपण यानों के डिजाइन और विकास के लिए प्रमुख केंद्र है।
- यू. आर. राव उपग्रह केंद्र (URSC), बेंगलुरु: यह उपग्रहों के डिजाइन और विकास के लिए प्रमुख केंद्र है।
7. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts for Exams)
- डॉ. विक्रम साराभाई को ‘भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक’ कहा जाता है।
- इसरो (ISRO) का मुख्यालय बेंगलुरु में है।
- श्रीहरिकोटा भारत का मुख्य रॉकेट लॉन्च स्टेशन है।
- PSLV को ‘इसरो का वर्कहॉर्स’ कहा जाता है।
- LVM3 भारत का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है।
- भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश है।
- नाविक (NavIC) भारत की अपनी जीपीएस प्रणाली है।