परिचय: तुंगभद्रा परियोजना
तुंगभद्रा परियोजना दक्षिण भारत की एक प्रमुख अंतर-राज्यीय बहुउद्देशीय परियोजना है। यह कर्नाटक और आंध्र प्रदेश (अब तेलंगाना भी शामिल) राज्यों का एक संयुक्त उपक्रम है। यह परियोजना कृष्णा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी, तुंगभद्रा नदी पर बनाई गई है। इसका निर्माण 1953 में पूरा हुआ था और इसका मुख्य उद्देश्य रायलसीमा के सूखाग्रस्त क्षेत्रों और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में सिंचाई की सुविधा प्रदान करना था।
1. परियोजना के मुख्य घटक
A. तुंगभद्रा बांध (Tungabhadra Dam)
- स्थान: यह कर्नाटक के विजयनगर जिले में होसपेट (Hosapete) के पास मल्लापुरम में स्थित है।
- प्रकार: यह एक सीधा गुरुत्वाकर्षण बांध (Straight Gravity Dam) है जिसका निर्माण पत्थर की चिनाई से किया गया है।
- जलाशय: बांध द्वारा बनाए गए विशाल जलाशय को ‘पंपा सागर’ (Pampa Sagar) के नाम से जाना जाता है। इसका यह नाम रामायण काल में इस क्षेत्र के प्राचीन नाम ‘पंपा’ पर आधारित है।
B. नहर प्रणाली (Canal System)
इस परियोजना से एक व्यापक नहर नेटवर्क निकलता है जो दोनों राज्यों के बड़े क्षेत्रों को सिंचित करता है:
- लेफ्ट बैंक कैनाल (Left Bank Canal): यह कर्नाटक के रायचूर और कोप्पल जिलों को सिंचित करती है।
- राइट बैंक लो लेवल कैनाल (Right Bank Low Level Canal): यह कर्नाटक के बेल्लारी (बल्लारी) और आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिलों को पानी प्रदान करती है।
- राइट बैंक हाई लेवल कैनाल (Right Bank High Level Canal): यह कर्नाटक के बेल्लारी और आंध्र प्रदेश के कुरनूल, अनंतपुर और कडपा जिलों की सिंचाई करती है।
2. परियोजना के उद्देश्य और प्रभाव
तुंगभद्रा परियोजना के निम्नलिखित मुख्य उद्देश्य और प्रभाव हैं:
| उद्देश्य | प्रभाव और महत्व |
|---|---|
| सिंचाई | यह परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य है। इसने कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लगभग 12 लाख एकड़ सूखाग्रस्त क्षेत्र को सिंचित किया है, जिससे यह क्षेत्र ‘कर्नाटक का चावल का कटोरा’ (Rice Bowl of Karnataka) बन गया है। |
| जलविद्युत उत्पादन | बांध के दोनों ओर (कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की तरफ) बिजली घर स्थापित किए गए हैं, जो क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हैं। |
| बाढ़ नियंत्रण | इसने तुंगभद्रा नदी में बाढ़ के प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद की है। |
| अन्य लाभ | परियोजना से मत्स्य पालन, औद्योगिक जल आपूर्ति और पर्यटन (जैसे पंपा सागर के आसपास) को भी बढ़ावा मिला है। |
3. प्रबंधन और चुनौतियाँ
A. प्रबंधन
परियोजना के संचालन, रखरखाव और जल के बंटवारे का प्रबंधन तुंगभद्रा बोर्ड (Tungabhadra Board) द्वारा किया जाता है, जिसमें भारत सरकार के साथ-साथ कर्नाटक और आंध्र प्रदेश/तेलंगाना के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
B. चुनौतियाँ
- गाद (Siltation): समय के साथ, पंपा सागर जलाशय में भारी मात्रा में गाद जमा हो गई है, जिससे इसकी जल भंडारण क्षमता में काफी कमी आई है। यह परियोजना के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
- जल विवाद: कम वर्षा वाले वर्षों में राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर कभी-कभी तनाव उत्पन्न हो जाता है।