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Letter writing

पत्र-लेखन नोट्स (PCS परीक्षा हेतु) – प्रारूप, प्रकार और उदाहरण

पत्र-लेखन (राज्य PCS परीक्षा विशेष)

परिचय: पत्र-लेखन का महत्व

पत्र-लेखन एक ऐसी कला है जिसके माध्यम से विचारों, सूचनाओं और आदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है। राज्य प्रशासनिक सेवाओं (PCS) में इसका विशेष महत्व है क्योंकि सरकारी कामकाज का एक बड़ा हिस्सा लिखित पत्राचार पर ही निर्भर करता है। यह परीक्षा अभ्यर्थी की भाषा पर पकड़, विचारों की स्पष्टता, तथ्यों की शुद्धता और प्रारूप की सही समझ को परखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

पत्रों के प्रकार

PCS परीक्षा के दृष्टिकोण से पत्र मुख्य रूप से औपचारिक (Formal) प्रकृति के होते हैं। ये पत्र सरकारी, अर्ध-सरकारी, व्यावसायिक संस्थानों या अधिकारियों को लिखे जाते हैं। इनकी भाषा शिष्ट, स्पष्ट, नियमबद्ध और तटस्थ होती है।

प्रमुख औपचारिक पत्रों के प्रकार एवं प्रारूप

1. शासकीय पत्र (Official Letter)

उद्देश्य: एक सरकारी कार्यालय से दूसरे कार्यालय, विभाग या मंत्रालय को सरकारी काम से भेजना।
शैली: पूर्णतः औपचारिक, अन्य पुरुष (Third Person) में लिखा जाता है (इसमें ‘मैं’ या ‘हम’ का प्रयोग नहीं होता)।

[विभाग/मंत्रालय का नाम] [कार्यालय का नाम व पता] पत्रांक: …………………. दिनांक: ………………… प्रेषक, (नाम) (पदनाम) (पता) सेवा में, (पदनाम) (कार्यालय का नाम) (पता) विषय: ……………………………………………………. महोदय/महोदया, उपर्युक्त विषय के संदर्भ में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि …………….. ………………………………………………………………… ………………………………………………………………… भवदीय, (हस्ताक्षर) (नाम) (पदनाम) संलग्नक: (यदि कोई हो तो सूची) प्रतिलिपि सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित: (यदि आवश्यक हो) 1. … 2. …

2. अर्ध-शासकीय पत्र (Demi-Official Letter – D.O. Letter)

उद्देश्य: जब कोई अधिकारी किसी अन्य अधिकारी से व्यक्तिगत स्तर पर किसी विषय पर ध्यान आकर्षित करना, विचार-विमर्श करना या जानकारी लेना चाहता है।
शैली: आत्मीय और व्यक्तिगत, उत्तम पुरुष (First Person – ‘मैं’) में लिखा जाता है। संबोधन ‘प्रिय श्री/श्रीमती’ और समापन ‘आपका सद्भावी’ आदि होता है।

[प्रेषक अधिकारी का नाम एवं पदनाम] [कार्यालय का पता] अर्ध-शासकीय पत्र संख्या (D.O. No.): ……….. दिनांक: …………….. प्रिय श्री/श्रीमती [अधिकारी का उपनाम], कृपया इस विभाग के पत्र संख्या ….. दिनांक ….. का स्मरण करें, जो …………. विषय से संबंधित है। इस संबंध में मैं आपका ध्यान व्यक्तिगत रूप से इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि… ………………………………………………………………… आशा है आप इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर इसे शीघ्र निस्तारित करेंगे। सादर। आपका सद्भावी, (हस्ताक्षर) (प्रेषक अधिकारी का नाम) सेवा में, श्री/श्रीमती [प्राप्तकर्ता का नाम] [पदनाम] [कार्यालय का पता]

3. परिपत्र (Circular)

उद्देश्य: जब कोई सूचना या आदेश एक साथ कई अधीनस्थ कार्यालयों या कर्मचारियों को भेजना होता है।
शैली: औपचारिक और सीधी। इसमें संबोधन और अधोलेख नहीं होता, यह सीधे विषय से शुरू होता है।

[कार्यालय का नाम] [पता] परिपत्र संख्या: ……………. दिनांक: ………………. विषय: ……………………………………………………. इस विभाग के सभी अधीनस्थ कार्यालयों/कर्मचारियों को सूचित किया जाता है कि शासन के आदेशानुसार …………………………………………………… ………………………………………………………………… यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। (हस्ताक्षर) (नाम) (पदनाम) प्रतिलिपि निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित: 1. (कार्यालय/विभाग का नाम) 2. (कार्यालय/विभाग का नाम) 3. …

4. अधिसूचना (Notification)

उद्देश्य: सरकारी नियमों, आदेशों, नियुक्तियों, स्थानांतरण, अवकाश आदि की जानकारी आम जनता या संबंधित व्यक्तियों तक पहुँचाना। इसे सरकारी राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित किया जाता है।
शैली: अन्य पुरुष में, निश्चित प्रारूप में। यह राष्ट्रपति या राज्यपाल की ओर से जारी की जाती है।

[भारत/राज्य सरकार] [मंत्रालय/विभाग का नाम] नई दिल्ली/लखनऊ, दिनांक: ……………. अधिसूचना संख्या …………………. : भारत के संविधान के अनुच्छेद …. द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति/राज्यपाल, श्री/श्रीमती ……………….. को दिनांक ………… से ……………….. के पद पर नियुक्त करते हैं। आज्ञा से, (हस्ताक्षर) (नाम) (पदनाम – सचिव/संयुक्त सचिव)

पत्र-लेखन में ध्यान रखने योग्य बातें

  • प्रारूप (Format): पत्र का प्रारूप बिल्कुल सटीक होना चाहिए। प्रेषक, पाने वाले का पता, दिनांक, विषय, संबोधन, और समापन का स्थान निर्धारित होता है।
  • भाषा (Language): भाषा सरल, स्पष्ट, शिष्ट और व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध होनी चाहिए। प्रशासनिक शब्दावली का यथासंभव प्रयोग करें।
  • संक्षिप्तता (Brevity): पत्र में अनावश्यक विस्तार से बचें। अपनी बात को कम से कम शब्दों में और सटीक ढंग से कहें।
  • तथ्यात्मकता (Factual): पत्र में दिए गए तथ्य, आँकड़े और संदर्भ (जैसे पिछले पत्र का क्रमांक) पूरी तरह सही होने चाहिए।
  • पूर्णता (Completeness): पत्र अपने आप में पूर्ण होना चाहिए, ताकि उसे समझने के लिए किसी अन्य स्रोत की आवश्यकता न पड़े।

निष्कर्ष

PCS परीक्षा में पत्र-लेखन में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए नियमित अभ्यास अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक प्रकार के पत्र के प्रारूप को कंठस्थ करें और उसकी भाषा-शैली के सूक्ष्म अंतर को समझें। स्पष्टता, संक्षिप्तता और शुद्धता ही इस खंड में सफलता की कुंजी है।

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