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प्रमुख झीलें (Major Lakes)

उत्तराखंड, अपनी मनोरम पर्वतीय श्रृंखलाओं और विविध स्थलाकृति के साथ, कई सुंदर और महत्वपूर्ण झीलों (तालों) का घर है। ये झीलें न केवल पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और जल संसाधनों के लिए भी आवश्यक हैं। इन नोट्स में उत्तराखंड की प्रमुख झीलों का जिलावार विवरण प्रस्तुत किया गया है।

उत्तराखंड की प्रमुख झीलें (ताल)

कुछ त्वरित तथ्य (Quick Facts):
  • उत्तराखंड की अधिकांश झीलें कुमाऊँ मंडल में स्थित हैं, जिस कारण नैनीताल को “झीलों का जिला” (Lake District) भी कहा जाता है।
  • यहाँ की झीलें मुख्यतः हिमानी क्रियाओं (Glacial action), भूस्खलन (Landslides) या विवर्तनिक गतिविधियों (Tectonic activities) से निर्मित हुई हैं।
  • डोडीताल (उत्तरकाशी) छह कोनों वाली सुंदर झील है जो ट्राउट मछलियों के लिए प्रसिद्ध है।
  • भीमताल कुमाऊँ क्षेत्र की सबसे बड़ी झील है, जबकि सहस्त्रताल गढ़वाल क्षेत्र की सबसे बड़ी और गहरी झील मानी जाती है।
  • नौकुचियाताल कुमाऊँ की सबसे गहरी झील मानी जाती है, जिसके नौ कोने हैं।
  • रूपकुंड को अपनी रहस्यमयी मानव कंकालों के कारण “कंकाल झील” भी कहा जाता है।
  • अनेक तालों का धार्मिक महत्व भी है, जैसे हेमकुंड, संतोपथ, देवरिया ताल आदि।

चमोली जनपद की प्रमुख झीलें

हेमकुण्ड (लोकपाल झील)

सात हिमाच्छादित चोटियों से घिरी हुई है। इसके किनारे लक्ष्मण जी का प्राचीन मंदिर और प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब स्थित है, जो सिखों का एक प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थल है।

संतोपथ झील

यह एक तीन कोनों वाली (त्रिकोणीय) झील है। मान्यता है कि इसके तीनों कोनों पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने तपस्या की थी। अलकनंदा नदी का उद्गम इसी झील से माना जाता है।

रूपकुण्ड झील

यह झील अपनी रहस्यमयी प्रकृति और किनारे पर पाए जाने वाले प्राचीन मानव कंकालों के लिए प्रसिद्ध है। यह त्रिशूल पर्वत की तलहटी में स्थित है। इसे “कंकाल झील” भी कहा जाता है।

विरही ताल (गौणा झील)

इसका निर्माण 1893 में भूस्खलन के कारण विरही गंगा नदी पर हुआ था। यह झील 1970 में टूट गई थी, जिससे भारी तबाही हुई थी।

अन्य झीलें (चमोली)

सिद्ध ताल, मणिभद्र ताल, नरसिंह ताल, बेनीताल (कर्णप्रयाग-गैरसैंण मार्ग पर), लिंगताल (फूलों की घाटी के मध्य), आछरी ताल (अप्सराओं का ताल), काकभुशुण्डि ताल (हाथी पर्वत के पास, नीले जल वाली), झलताल, सूखाताल, विष्णुताल, मातृका ताल।

टिहरी गढ़वाल जनपद की प्रमुख झीलें

सहस्त्रताल

यह गढ़वाल क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे गहरा ताल माना जाता है। यह कई छोटे-छोटे तालों का समूह है।

यमताल

यह सहस्त्रताल के पास स्थित है और सदैव बर्फ से ढका रहता है।

महासरताल

यह सहस्त्रताल के पास स्थित है और इसे “भाई-बहन का ताल” भी कहा जाता है। इसकी आकृति कटोरेनुमा है।

वासुकीताल

यह झील अपने लाल रंग के पानी और नीले कमल के फूलों के लिए प्रसिद्ध है। (नोट: एक वासुकीताल रुद्रप्रयाग में भी है, यह संभवतः भिन्न है या स्थिति को लेकर भ्रम है। पुस्तक में टिहरी के अंतर्गत उल्लेखित है।)

मंसारताल

यह खतलिंग ग्लेशियर के पास स्थित है।

अप्सरा ताल (आछरी ताल)

यह बूढ़ाकेदार के पास स्थित है।

भिलंगताल

यह खतलिंग ग्लेशियर के पास स्थित है।

उत्तरकाशी जनपद की प्रमुख झीलें

डोडीताल

यह 6 कोनों वाली, सुंदर ट्राउट मछलियों के लिए प्रसिद्ध झील है। अस्सी गंगा का उद्गम यहीं से होता है।

केदारताल

यह गंगोत्री के निकट थैलयासागर पर्वत की तलहटी में स्थित है।

नचिकेता ताल

इसके एक कोने पर एक छोटा मंदिर स्थित है। यह उद्दालक ऋषि के पुत्र नचिकेता से संबंधित है।

काणाताल (अंधाताल)

यह जलविहीन ताल है।

फाचकण्डी बया ताल

यह अपने उबलते हुए जल के लिए जाना जाता है।

अन्य झीलें (उत्तरकाशी)

मंगलाछु ताल, खिड़ा ताल, भराड़सर ताल, लामा ताल, देवसाड़ी ताल, रोहितसाड़ा ताल, सरूताल।

नैनीताल जनपद की प्रमुख झीलें (झीलों का जिला)

नैनीताल (त्रि-ऋषि सरोवर)

यह कुमाऊँ की सबसे प्रसिद्ध झील है। स्कंदपुराण में इसे “त्रि-ऋषि सरोवर” कहा गया है। यह सात पहाड़ियों से घिरी है। इसकी खोज 1841 में पी. बैरन ने की थी।

भीमताल

यह कुमाऊँ क्षेत्र की सबसे बड़ी झील है। इसकी आकृति त्रिभुजाकार है और यह कमल व कमल ककड़ी के लिए प्रसिद्ध है। इसके बीच में एक टापू है।

नौकुचियाताल

यह कुमाऊँ क्षेत्र की सबसे गहरी झील मानी जाती है। इसके नौ कोने हैं। यह पक्षियों के निवास के लिए उत्तम है।

सातताल

यह कई छोटी-छोटी झीलों का समूह है, जिनमें राम ताल, सीता ताल, लक्ष्मण ताल, हनुमान ताल, भरत ताल, गरुड़ ताल और सूखा/पूर्ण ताल प्रमुख हैं। नल-दमयंती ताल भी इसी का हिस्सा माना जाता है, जो 5 कोनों वाला है और पौराणिक महत्व रखता है।

खुरपाताल

यह नैनीताल के समीप स्थित है और इसकी आकृति जानवर के खुर के समान है। इसका जल गहरे हरे रंग का है।

अन्य झीलें (नैनीताल)

सूखाताल, सड़ियाताल, हरीशताल, नलताल, गरुड़ताल, लक्ष्मणताल, रामताल, सीताताल, पूर्णाताल।

रुद्रप्रयाग जनपद की प्रमुख झीलें

देवरिया ताल

यह ऊखीमठ-चोपता मार्ग पर स्थित है और केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत आता है। यहाँ से चौखम्बा शिखर का सुन्दर दृश्य दिखता है।

चौराबाड़ी ताल (गांधी सरोवर/सर्वादी ताल)

यह केदारनाथ मंदिर के पास स्थित है। 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियाँ यहाँ विसर्जित की गई थीं, इसलिए इसे गांधी सरोवर भी कहते हैं। 2013 की केदारनाथ आपदा में यह झील टूट गई थी।

वासुकी ताल

यह झील लाल पानी और नीले कमलों के लिए प्रसिद्ध है। यह केदारनाथ के निकट स्थित है।

अन्य झीलें (रुद्रप्रयाग)

बधाणीताल, भैंकताल (अंडाकार), सुखदी ताल, सिद्ध ताल।

चम्पावत जनपद की प्रमुख झीलें

श्यामलाताल

इसके तट पर स्वामी विवेकानन्द आश्रम स्थित है। यह सफेद कमल पुष्पों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ झूला मेला लगता है।

झिलमिल ताल

यह टनकपुर के पास स्थित है और इसकी आकृति गोलाकार है।

बागेश्वर जनपद की प्रमुख झीलें

सुकुण्डा ताल

यह बागेश्वर जनपद में स्थित है।

देहरादून जनपद की प्रमुख झीलें

चन्द्रबाड़ी ताल (गौतम कुण्ड)

यह देहरादून में स्थित है और चन्द्रभागा नदी का उद्गम स्थल माना जाता है।

काँसरो ताल

यह देहरादून के रायवाला के पास स्थित है।

अल्मोड़ा जनपद की प्रमुख झीलें

तड़ागताल

यह अल्मोड़ा के चौखुटिया से लगभग 10 किमी दूर स्थित है।

उत्तराखंड की अपेक्षाकृत कम ज्ञात झीलें (Lesser-Known Lakes of Uttarakhand)

मुख्य झीलों के अतिरिक्त, उत्तराखंड में कई अन्य छोटी और कम प्रसिद्ध झीलें भी हैं जो स्थानीय महत्व रखती हैं और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती हैं। इनमें से कुछ हैं:

लिंगताल (चमोली)

यह फूलों की घाटी के मध्य में स्थित एक छोटी लेकिन सुंदर झील है।

आछरी ताल (चमोली/टिहरी)

इसे अप्सराओं का ताल माना जाता है। चमोली और टिहरी दोनों जिलों में इस नाम से मिलती-जुलती झीलें हैं।

काकभुशुण्डि ताल (चमोली)

यह हाथी पर्वत के पास स्थित है और इसका जल नीला है। यहाँ कौवे (काक) के दर्शन दुर्लभ माने जाते हैं।

झलताल (चमोली)

यह चमोली में स्थित एक छोटी झील है।

मातृका ताल (चमोली)

यह भी चमोली जनपद की एक झील है।

मंगलाछु ताल (उत्तरकाशी)

यह उत्तरकाशी में स्थित है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है।

खिड़ा ताल (उत्तरकाशी)

यह भी उत्तरकाशी की एक अल्पज्ञात झील है।

भराड़सर ताल (उत्तरकाशी)

यह उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित है।

देवसाड़ी ताल (उत्तरकाशी)

यह उत्तरकाशी में स्थित एक अन्य झील है।

रोहितसाड़ा ताल (उत्तरकाशी)

यह भी उत्तरकाशी जनपद में स्थित है।

सरूताल (उत्तरकाशी)

यह उत्तरकाशी के सीमांत क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण ताल है।

नलताल (नैनीताल)

यह नैनीताल जिले की कम प्रसिद्ध झीलों में से एक है।

भैंकताल (रुद्रप्रयाग)

यह अंडाकार झील रुद्रप्रयाग में स्थित है।

सुखदी ताल (रुद्रप्रयाग)

यह रुद्रप्रयाग की एक अन्य छोटी झील है।

ध्यान दें: कुछ छोटी और मौसमी झीलें भी विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाती हैं जिनका उल्लेख व्यापक रूप से नहीं मिलता, परन्तु वे स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

उत्तराखंड की झीलें, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘ताल’ कहा जाता है, राज्य की प्राकृतिक धरोहर हैं। ये न केवल अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं बल्कि जैव विविधता के संरक्षण, जल आपूर्ति और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन झीलों का संरक्षण और संवर्धन राज्य के सतत विकास के लिए अनिवार्य है।

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