माखनलाल चतुर्वेदी: संक्षिप्त परिचय
पंडित माखनलाल चतुर्वेदी हिंदी साहित्य के एक महान कवि, लेखक और पत्रकार थे। उन्हें मुख्य रूप से उनकी देशभक्तिपूर्ण कविताओं के लिए जाना जाता है। हिंदी साहित्य जगत में उन्हें एक भारतीय आत्मा के नाम से भी पुकारा जाता है।
जीवन परिचय और शिक्षा
- उनका जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के बावई ग्राम में हुआ था।
- उनके पिता का नाम नंदलाल चतुर्वेदी था, जो एक अध्यापक थे।
- प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने घर पर ही संस्कृत, बंगला, अंग्रेजी और गुजराती भाषाओं का अध्ययन किया।
- मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने अध्यापन कार्य शुरू किया था।
साहित्यिक योगदान और कृतियाँ
चतुर्वेदी जी की रचनाओं में राष्ट्रप्रेम और स्वाधीनता की भावना कूट-कूट कर भरी थी। उनकी कविताएँ छायावाद और प्रगतिवाद के संधि स्थल पर खड़ी दिखाई देती हैं।
प्रमुख काव्य संग्रह
- हिम किरीटिनी
- हिम तरंगिणी
- युग चरण
- समर्पण
- वेणु लो गूँजे धरा
- मरण ज्वर
गद्य और निबंध
- साहित्य देवता (गद्य काव्य)
- कृष्णार्जुन युद्ध (नाटक)
- अमीर इरादे, गरीब इरादे (निबंध)
- समय के पाँव (संस्मरण)
प्रसिद्ध कविता: पुष्प की अभिलाषा
उनकी कविता पुष्प की अभिलाषा भारतीय साहित्य की कालजयी रचना मानी जाती है, जिसमें एक फूल के माध्यम से राष्ट्र के प्रति बलिदान की भावना को व्यक्त किया गया है।
पत्रकारिता और राजनैतिक जीवन
साहित्य के साथ-साथ पत्रकारिता के माध्यम से भी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संपादन कार्य
- उन्होंने प्रभा पत्रिका का संपादन किया।
- वर्ष 1919 में जबलपुर से कर्मवीर का प्रकाशन प्रारंभ किया।
- उन्होंने गणेश शंकर विद्यार्थी के प्रताप पत्र के साथ भी काम किया।
- असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वे कई बार जेल गए।
सम्मान और पुरस्कार
माखनलाल चतुर्वेदी को उनके अतुलनीय योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।
- 1955 में काव्य संग्रह हिम तरंगिणी के लिए उन्हें साहित्य का प्रथम साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
- भारत सरकार द्वारा उन्हें 1963 में पद्म भूषण से अलंकृत किया गया।
- सागर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. की मानद उपाधि दी।
- राजभाषा हिंदी के विरोध में उन्होंने अपना पद्म भूषण सम्मान वापस लौटा दिया था।
निधन और स्मृति
महान स्वतंत्रता सेनानी और कलम के सिपाही पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का निधन 30 जनवरी 1968 को हुआ। उनकी स्मृति में मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की स्थापना की है। उनके जन्मस्थान बावई का नाम बदलकर अब माखन नगर कर दिया गया है।