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Uttarakhand-January-2026

3 जनवरी: उत्तराखंड माल्टा महोत्सव का शुभारंभ और ‘माल्टा मिशन’ की ऐतिहासिक घोषणा

3 जनवरी 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के राजकीय उद्यान सर्किट हाउस (गढ़ीकैंट) में भव्य ‘उत्तराखंड माल्टा महोत्सव’ का उद्घाटन किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर राज्य भर में माल्टा (Malta – Citrus fruit) के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘माल्टा मिशन’ (Malta Mission) की शुरुआत करने की आधिकारिक घोषणा की गई।

महोत्सव और ‘माल्टा मिशन’ के प्रमुख बिंदु

  • सांस्कृतिक थीम: उद्यान विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव की थीम ‘घाम तापो-नींबू सानो’ रखी गई थी। यह पहाड़ों में सर्दियों की गुनगुनी धूप में बैठकर पहाड़ी नींबू (गलगल) और माल्टा को भांगजीरे के नमक और गुड़ के साथ खाने की प्राचीन सामाजिक परंपरा का प्रतीक है।
  • सब्सिडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): सरकार ने किसानों के हित में माल्टा और गलगल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर दिया है। बागान की स्थापना पर 50%, सूक्ष्म सिंचाई पर 70% से 80% तथा खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) इकाइयों की स्थापना पर 60% तक का अनुदान सरकार द्वारा प्रदान किया जाएगा।
  • भविष्य की योजनाएं: राज्य के माल्टा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जल्द ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी उत्तराखंड माल्टा महोत्सव आयोजित किया जाएगा।
  • पूर्व मिशनों की तर्ज पर विकास: राज्य की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार इससे पूर्व ‘एप्पल मिशन’ (Apple Mission) और ‘कीवी मिशन’ (Kiwi Mission) संचालित कर चुकी है, ‘माल्टा मिशन’ उसी श्रृंखला का नया कदम है।

कृषि और औद्यानिकी विकास का लक्ष्य

इस महोत्सव में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी ने प्रतिभाग किया। उनके अनुसार माल्टा जैसे स्थानीय फलों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी पांच वर्षों में उत्तराखंड पूरे देश में औद्यानिकी (Horticulture) के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाए।

🎯 परीक्षा हेतु रामबाण तथ्य (Exam Points)

  • प्रश्न: उत्तराखंड में ‘माल्टा मिशन’ की घोषणा कब और किसके द्वारा की गई? उत्तर: 3 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा।
  • प्रश्न: ‘घाम तापो-नींबू सानो’ अभियान का संबंध किस क्षेत्र से है? उत्तर: शीतकालीन पर्यटन और पहाड़ी संस्कृति (माल्टा एवं पहाड़ी नींबू को बढ़ावा देने के लिए)।
  • प्रश्न: जनवरी 2026 में आयोजित ‘पहला माल्टा महोत्सव’ कहाँ संपन्न हुआ? उत्तर: राजकीय उद्यान सर्किट हाउस, गढ़ीकैंट (देहरादून) में।
  • प्रश्न: माल्टा और गलगल (पहाड़ी नींबू) के प्रोत्साहन हेतु बागान लगाने पर राज्य सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है? उत्तर: बागान स्थापना पर 50% तथा खाद्य प्रसंस्करण पर 60% तक।

5 जनवरी 2026: नितिन गडकरी की अध्यक्षता में NH परियोजनाओं की समीक्षा बैठक और उत्तराखंड की माँगें

5 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) परियोजनाओं की एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की सड़क अवसंरचना (Road Infrastructure) को सुदृढ़ करने के लिए मजबूती से पैरवी की और बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश बाईपास सहित तीन प्रमुख पर्वतीय NH परियोजनाओं की तत्काल स्वीकृति की मांग रखी।

समीक्षा बैठक के प्रमुख बिंदु

  • ऋषिकेश बाईपास परियोजना (1161 करोड़): मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश शहर को भारी ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने और चारधाम यात्रियों की सुविधा के लिए लगभग 1161 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली ‘ऋषिकेश बाईपास परियोजना’ को जल्द मंजूरी देने का विशेष आग्रह किया।
  • तीन पर्वतीय राष्ट्रीय राजमार्ग: राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों (गढ़वाल और कुमाऊं) में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए तीन नई पर्वतीय NH परियोजनाओं (जिनमें अल्मोड़ा आदि क्षेत्रों के बाईपास शामिल हैं) की सैद्धांतिक स्वीकृति माँगी गई।
  • समयबद्धता और गुणवत्ता पर जोर: समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने NHAI और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में गतिमान सभी सड़क परियोजनाओं को उच्च गुणवत्ता (Quality) के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
  • उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व: बैठक में मुख्यमंत्री धामी के साथ-साथ उत्तराखंड से आने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा और केंद्रीय राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सामरिक और आर्थिक दृष्टिकोण (Mains & Interview Perspective)

उत्तराखंड एक सीमांत (Border) और पर्यटन आधारित राज्य है। ऋषिकेश बाईपास के निर्माण से न केवल दिल्ली-हरिद्वार से आने वाले यातायात का दबाव शहर के अंदर कम होगा, बल्कि चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं का सफर अत्यधिक सुगम हो जाएगा। वहीं, पर्वतीय NH परियोजनाओं के विकास से राज्य में इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) को पंख लगेंगे, पलायन रुकेगा और सामरिक दृष्टि से चीन-नेपाल सीमा तक सैन्य बलों की पहुंच और अधिक मजबूत होगी।

🎯 UKPSC / UKSSSC परीक्षा हेतु रामबाण तथ्य (Exam Points)

  • प्रश्न: 5 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक कहाँ और किसकी अध्यक्षता में आयोजित हुई? उत्तर: भारत मंडपम (नई दिल्ली) में, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में।
  • प्रश्न: समीक्षा बैठक में उत्तराखंड सरकार द्वारा ‘ऋषिकेश बाईपास परियोजना’ की अनुमानित लागत कितनी बताई गई? उत्तर: 1161 करोड़ रुपये।
  • प्रश्न: बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य रूप से किन अवसंरचना परियोजनाओं की स्वीकृति माँगी? उत्तर: ऋषिकेश बाईपास एवं 3 प्रमुख पर्वतीय NH परियोजनाएं।
  • प्रश्न: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में उत्तराखंड से संबंध रखने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री कौन हैं जो इस बैठक में उपस्थित थे? उत्तर: श्री अजय टम्टा।

6 जनवरी 2026: उत्तराखंड में ‘VB-G RAM G’ अधिनियम की व्याख्या – 125 दिन रोजगार और 90:10 वित्तपोषण

6 जनवरी 2026 को उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी ने केंद्र सरकार की ऐतिहासिक ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ (VB-G RAM G) योजना को राज्य के परिप्रेक्ष्य में विस्तार से समझाया। इस नए अधिनियम ने 1 जुलाई 2026 से पूर्ववर्ती ‘मनरेगा’ (MGNREGA) का स्थान ले लिया है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और हिमालयी राज्यों की भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, इस योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं जो राज्य के ग्रामीण विकास और पलायन रोकने में मील का पत्थर साबित होंगे।

अधिनियम के प्रमुख प्रावधान और उत्तराखंड को लाभ

  • ✦ 125 दिन रोजगार की वैधानिक गारंटी: पूर्ववर्ती मनरेगा में जहाँ ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिलता था, वहीं इस नए ‘वीबी-जी राम जी’ (VB-G RAM G) अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल वैतनिक रोजगार की गारंटी दी गई है।
  • ✦ 90:10 केंद्र-राज्य वित्तपोषण (Funding Pattern): हिमालयी और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए यह योजना अत्यंत लाभकारी है। उत्तराखंड के लिए इसमें 90 प्रतिशत अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाएगा, जबकि मात्र 10 प्रतिशत का वहन राज्य सरकार को करना होगा।
  • ✦ मजदूरी दर में वृद्धि और बेरोजगारी भत्ता: नई व्यवस्था के तहत आधार न्यूनतम मजदूरी दर को बढ़ाकर ₹300 (कुछ राज्यों में ₹400 तक) कर दिया गया है। यदि आवेदन के 15 दिन के भीतर रोजगार नहीं मिलता है, तो श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता (Unemployment Allowance) देने का वैधानिक अधिकार सुरक्षित रखा गया है।
  • ✦ कृषि कार्यों के लिए 60 दिन का विशेष अवकाश: खेती के व्यस्त समय (बुवाई और कटाई) के दौरान योजना के तहत 60 दिन तक कोई कार्य नहीं कराया जाएगा, ताकि किसानों को अपने खेतों के लिए पर्याप्त कृषि श्रमिक मिल सकें और खेती प्रभावित न हो।
  • ✦ तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता: योजना को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीपीएस आधारित निगरानी, ई-केवाईसी (e-KYC), बायोमेट्रिक उपस्थिति और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को अनिवार्य किया गया है।

योजना का मुख्य फोकस और परिसंपत्ति निर्माण

इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य केवल गड्ढे खोदना या अस्थाई कार्य करना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका बुनियादी ढांचे (Livelihood Infrastructure) का निर्माण करना है। इसमें जल संरक्षण (Water Conservation), जलवायु परिवर्तन से बचाव (Climate Resilience), आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन निर्माण और ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। ठेकेदारों और भारी मशीनों का उपयोग इसमें पूरी तरह प्रतिबंधित है।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: VB-G RAM G का पूर्ण रूप (Full Form) क्या है? उत्तर: विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) [Viksit Bharat—Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)]।
प्रश्न: VB-G RAM G अधिनियम ने किस पुरानी योजना का स्थान लिया है और यह देश भर में कब लागू हुआ? उत्तर: इसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का स्थान लिया है और इसे 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
प्रश्न: नए अधिनियम के तहत रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर कितना कर दिया गया है? उत्तर: 125 दिन (प्रति वित्तीय वर्ष, प्रति ग्रामीण परिवार)।
प्रश्न: इस योजना के अंतर्गत उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का वित्तपोषण अनुपात क्या तय किया गया है? उत्तर: 90:10 (90% केंद्र सरकार, 10% राज्य सरकार)।
प्रश्न: कृषि कार्यों में श्रमिकों की कमी न हो, इसके लिए अधिनियम में कितने दिनों के ठहराव (Pause) का प्रावधान किया गया है? उत्तर: कृषि के व्यस्त मौसम (बुवाई-कटाई) के दौरान 60 दिनों का ‘Agricultural Pause’।

8 जनवरी: ICJS 2.0 में उत्तराखंड पुलिस देश में प्रथम और डोभ-श्रीकोट नर्सिंग कॉलेज का ऐतिहासिक नामकरण

8 जनवरी को उत्तराखंड के दृष्टिकोण से दो अति महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। एक ओर जहाँ डिजिटल पुलिसिंग और पारदर्शी न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने वाले ‘इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ (ICJS 2.0) के क्रियान्वयन में उत्तराखंड पुलिस ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रचा है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने मातृशक्ति को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए पौड़ी गढ़वाल स्थित डोभ-श्रीकोट नर्सिंग कॉलेज का नाम राज्य की दिवंगत बेटी ‘अंकिता भंडारी’ के नाम पर रखने का शासनादेश जारी किया है।

ICJS 2.0 में उत्तराखंड पुलिस का राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा

  • ✦ राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, ICJS 2.0 के सफल क्रियान्वयन में उत्तराखंड पुलिस ने 93.46 प्रतिशत का शानदार स्कोर हासिल कर देश के सभी राज्यों को पछाड़ते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है।
  • ✦ ICJS क्या है? ICJS (Inter-Operable Criminal Justice System) केंद्रीय गृह मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य न्याय प्रणाली के प्रमुख स्तंभों— पुलिस (CCTNS), ई-जेल (e-Prisons), ई-न्यायालय (e-Courts) और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (FSL) के डेटा को एक ही डिजिटल प्लेटफार्म पर निर्बाध रूप से एकीकृत (Integrate) करना है।
  • ✦ उत्तराखंड को लाभ: इस उपलब्धि से राज्य में मुकदमों की पेंडेंसी कम होगी, अपराधियों का डेटाबेस तुरंत पुलिस के पास उपलब्ध होगा, और फॉरेंसिक रिपोर्ट सीधे न्यायालयों और थानों तक डिजिटल रूप में पहुंचेगी, जिससे न्याय प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आएगी।

डोभ-श्रीकोट नर्सिंग कॉलेज अब ‘अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज’

उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के सम्मान में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर के पास स्थित डोभ-श्रीकोट के नवनिर्मित राजकीय नर्सिंग कॉलेज का नामकरण आधिकारिक तौर पर ‘अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज’ कर दिया गया है। यह निर्णय न केवल राज्य की मातृशक्ति के प्रति सरकार के सम्मान को दर्शाता है, बल्कि महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक कड़ा संदेश भी समाज को देता है।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: ICJS 2.0 के क्रियान्वयन में हाल ही में किस राज्य की पुलिस ने 93.46 अंकों के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया है? उत्तर: उत्तराखंड पुलिस ने।
प्रश्न: सुरक्षा और न्याय प्रणाली में प्रयुक्त शब्द ‘ICJS’ का पूर्ण रूप (Full Form) क्या है? उत्तर: इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (Inter-Operable Criminal Justice System)।
प्रश्न: हाल ही में राज्य सरकार द्वारा ‘डोभ-श्रीकोट राजकीय नर्सिंग कॉलेज’ का नाम बदलकर किसके नाम पर रखा गया है? उत्तर: अंकिता भंडारी के नाम पर (अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज)।
प्रश्न: नवनिर्मित डोभ-श्रीकोट नर्सिंग कॉलेज उत्तराखंड के किस जिले में स्थित है? उत्तर: पौड़ी गढ़वाल (श्रीनगर के समीप)।
प्रश्न: ICJS प्रोजेक्ट के अंतर्गत पुलिस थानों का कौन सा सिस्टम अन्य न्याय प्रणालियों से जोड़ा जाता है? उत्तर: CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स)।

12 जनवरी: राष्ट्रीय युवा दिवस पर महिला एवं युवक मंगल दलों का सम्मान तथा ‘स्वामी विवेकानंद कॉरिडोर’ की घोषणा

12 जनवरी 2026 को युगप्रवर्तक स्वामी विवेकानंद जी की जयंती (राष्ट्रीय युवा दिवस) के पावन अवसर पर उत्तराखंड सरकार द्वारा युवाओं और मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्रामीण स्तर पर उत्कृष्ट सामाजिक कार्य करने वाले ‘महिला एवं युवक मंगल दलों’ को राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। इसके साथ ही आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देते हुए राज्य में ‘स्वामी विवेकानंद कॉरिडोर’ विकसित करने की ऐतिहासिक घोषणा की गई।

महिला एवं युवक मंगल दलों का सम्मान और पुरस्कार

  • ✦ राज्य स्तरीय विवेकानंद युवा पुरस्कार: समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान और खेलकूद में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चयनित ‘युवक मंगल दलों’ (YMD) और ‘महिला मंगल दलों’ (MMD) को राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किए गए।
  • ✦ आर्थिक प्रोत्साहन: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले दलों को क्रमशः नकद धनराशि और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता और सामुदायिक विकास को प्रोत्साहित करना है।
  • ✦ युवाओं की भागीदारी: मंगल दलों के माध्यम से राज्य के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन और पलायन रोकने हेतु युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और खेल गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

स्वामी विवेकानंद कॉरिडोर: आध्यात्मिक पर्यटन को नई उड़ान

उत्तराखंड के साथ स्वामी विवेकानंद का गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। इसी धरोहर को सहेजने के लिए सरकार ने ‘स्वामी विवेकानंद कॉरिडोर’ के निर्माण की घोषणा की है। इस कॉरिडोर के तहत स्वामी जी की उत्तराखंड यात्राओं से जुड़े प्रमुख स्थलों और तपस्थलियों— जैसे अल्मोड़ा का ककड़ीघाट (जहाँ उन्हें ज्ञान की अनुभूति हुई थी), मायावती स्थित अद्वैत आश्रम (चंपावत), और देहरादून सहित अन्य उन सभी स्थानों को एक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा जहाँ उन्होंने प्रवास किया था। इससे राज्य में आध्यात्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) प्रतिवर्ष किस तिथि को और किसकी जयंती पर मनाया जाता है? उत्तर: 12 जनवरी को, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के उपलक्ष्य में।
प्रश्न: 12 जनवरी 2026 को उत्तराखंड में ग्रामीण स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने के लिए किन समूहों को सम्मानित किया गया? उत्तर: महिला मंगल दलों (MMD) और युवक मंगल दलों (YMD) को।
प्रश्न: राज्य सरकार ने स्वामी विवेकानंद की तपस्थलियों और प्रवास स्थलों को जोड़कर किस कॉरिडोर को विकसित करने की घोषणा की है? उत्तर: स्वामी विवेकानंद कॉरिडोर।
प्रश्न: स्वामी विवेकानंद को उत्तराखंड के किस स्थान पर पीपल के वृक्ष के नीचे विशेष ज्ञान (Universal Oneness) की अनुभूति हुई थी, जो इस कॉरिडोर का मुख्य हिस्सा है? उत्तर: ककड़ीघाट (अल्मोड़ा)।
प्रश्न: चंपावत जिले में स्थित कौन सा आश्रम ‘स्वामी विवेकानंद कॉरिडोर’ का प्रमुख केंद्र बनेगा, जिसकी स्थापना 1899 में हुई थी? उत्तर: मायावती स्थित ‘अद्वैत आश्रम’।

14 जनवरी 2026: नीति आयोग के ‘निर्यात तैयारी सूचकांक 2024’ में उत्तराखंड छोटे राज्यों में प्रथम

14 जनवरी 2026 को नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा निर्यात तैयारी सूचकांक (Export Preparedness Index – EPI) 2024 जारी किया गया। इस प्रतिष्ठित सूचकांक में उत्तराखंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘छोटे राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों’ की श्रेणी में 52.07 अंकों के साथ संपूर्ण देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि राज्य की मजबूत औद्योगिक नीतियों, व्यापार-अनुकूल बुनियादी ढांचे और सतत आर्थिक विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

EPI 2024 के प्रमुख बिंदु और उत्तराखंड का प्रदर्शन

  • ✦ उत्तराखंड के निर्यात क्षेत्र: राज्य ने कृषि, औषधीय एवं सुगंधित पौधों (MAPs), आयुष, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में निर्यात की अपार संभावनाओं को सशक्त किया है।
  • ✦ सूचकांक की संरचना (4 Pillars): EPI 2024 मुख्य रूप से चार स्तंभों पर आधारित है— 1. निर्यात अवसंरचना (Export Infrastructure), 2. बिज़नेस इकोसिस्टम (सर्वाधिक 40% वेटेज), 3. नीति व शासन (Policy & Governance), और 4. निर्यात प्रदर्शन (Export Performance)। इसे 13 उप-स्तंभों और 70 संकेतकों में बांटा गया है।
  • ✦ बड़े राज्यों में शीर्ष प्रदर्शन: सूचकांक में ‘बड़े राज्यों’ की श्रेणी में महाराष्ट्र ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जिसके बाद क्रमशः तमिलनाडु और गुजरात का स्थान रहा।
  • ✦ अन्य अग्रणी छोटे राज्य: उत्तराखंड के बाद इस श्रेणी में जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव, और गोवा ने बेहतर प्रदर्शन किया है।

आर्थिक विकास और राष्ट्रीय लक्ष्य

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम द्वारा जारी इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य राज्यों और जिलों के स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है। निर्यात को आर्थिक विकास का ‘प्रमुख इंजन’ माना गया है, जो विदेशी मुद्रा अर्जन और व्यापार घाटे को कम करने में सहायक है। यह सूचकांक वर्ष 2030 तक भारत के 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के वस्तु निर्यात लक्ष्य और ‘विकसित भारत @2047’ के महत्वाकांक्षी विजन को प्राप्त करने की दिशा में राज्यों की भूमिका को रेखांकित करता है。

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: 14 जनवरी 2026 को जारी नीति आयोग के ‘निर्यात तैयारी सूचकांक (EPI) 2024’ में छोटे राज्यों की श्रेणी में कौन सा राज्य प्रथम रहा? उत्तर: उत्तराखंड (52.07 अंकों के साथ)।
प्रश्न: निर्यात तैयारी सूचकांक (EPI) का यह कौन सा संस्करण था और इसे पहली बार कब जारी किया गया था? उत्तर: यह चौथा संस्करण है; पहली बार इसे अगस्त 2020 में जारी किया गया था।
प्रश्न: EPI 2024 में ‘बड़े राज्यों’ की श्रेणी में किस राज्य ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है? उत्तर: महाराष्ट्र ने।
प्रश्न: नीति आयोग का यह सूचकांक कितने मुख्य ‘स्तंभों’ (Pillars) पर आधारित है? उत्तर: चार (निर्यात अवसंरचना, व्यापार परितंत्र, नीति व शासन, और निर्यात प्रदर्शन)।
प्रश्न: भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक वस्तु निर्यात (Merchandise Exports) का क्या लक्ष्य निर्धारित किया है? उत्तर: 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर।

14 जनवरी: उत्तरकाशी में ‘शीतकालीन पर्यटन कॉन्क्लेव’ व माघ मेला आरंभ, और WII देहरादून की जलीय जैव विविधता पहलें

14 जनवरी (मकर संक्रांति) का दिन उत्तराखंड के सांस्कृतिक, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद खास रहा। एक ओर जहाँ उत्तरकाशी में ऐतिहासिक ‘माघ मेला’ (बाड़ाहाट का थौळू) और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘शीतकालीन पर्यटन कॉन्क्लेव’ का भव्य शुभारंभ हुआ, वहीं दूसरी ओर देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) में गंगा और अन्य नदियों के संरक्षण हेतु नई जलीय जैव विविधता (Aquatic Biodiversity) पहलों की शुरुआत की गई।

ऐतिहासिक माघ मेला और शीतकालीन पर्यटन कॉन्क्लेव (उत्तरकाशी)

  • ✦ बाड़ाहाट का थौळू: उत्तरकाशी (प्राचीन नाम- बाड़ाहाट) में मकर संक्रांति के अवसर पर 14 जनवरी से प्रसिद्ध ‘माघ मेला’ शुरू होता है। इस मेले में कंडार देवता, हरि महाराज और सोमेश्वर देवता की डोलियां लाई जाती हैं। यह गढ़वाल क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक और व्यापारिक मेला (Commercial Fair) है, जहाँ पारंपरिक ऊनी वस्त्रों और हस्तशिल्प का भारी व्यापार होता है।
  • ✦ शीतकालीन पर्यटन कॉन्क्लेव: राज्य में विंटर टूरिज्म (Winter Tourism) को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तरकाशी में यह विशेष कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य दयारा बुग्याल (स्कीइंग), हर्षिल घाटी और नेलांग घाटी (गर्टांग गली) को सर्दियों में भी पर्यटकों के लिए एक विश्वस्तरीय ‘विंटर डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करना है।
  • ✦ वाइब्रेंट विलेज और रोजगार: कॉन्क्लेव में सीमांत गांवों (Vibrant Village Programme के तहत) में ‘होमस्टे’ (Homestay) योजनाओं को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को साहसिक पर्यटन व स्वरोजगार से जोड़ने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई।

WII देहरादून: जलीय जैव विविधता (Aquatic Biodiversity) पहल

भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII), चंद्रबनी (देहरादून) ने जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) को बचाने के लिए विशेष शोध और संरक्षण पहल शुरू की है। ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के सहयोग से शुरू की गई इन पहलों का उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों में रहने वाले दुर्लभ जीवों— जैसे गांगेय डॉल्फिन (Gangetic Dolphin), ऊदबिलाव (Otters), कछुओं की विभिन्न प्रजातियों और गोल्डन महाशीर (Golden Mahseer) मछली के प्राकृतिक आवास को संरक्षित करना और उनके प्रजनन को बढ़ावा देना है। यह कदम जलवायु परिवर्तन से निपटने और राज्य के जलीय पर्यावरण संतुलन के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: प्रसिद्ध ‘माघ मेला’ जिसे स्थानीय भाषा में ‘बाड़ाहाट का थौळू’ भी कहा जाता है, राज्य के किस जनपद में लगता है? उत्तर: उत्तरकाशी।
प्रश्न: 14 जनवरी को ‘शीतकालीन पर्यटन कॉन्क्लेव’ (Winter Tourism Conclave) का आयोजन किस जनपद में किया गया? उत्तर: उत्तरकाशी में (हर्षिल, दयारा बुग्याल आदि को विंटर टूरिज्म का केंद्र बनाने हेतु)।
प्रश्न: भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII – Wildlife Institute of India) उत्तराखंड में कहाँ स्थित है? उत्तर: चंद्रबनी, देहरादून (स्थापना: 1982)।
प्रश्न: उत्तरकाशी का प्राचीन नाम क्या है? उत्तर: बाड़ाहाट।
प्रश्न: जलीय जैव विविधता संरक्षण के अंतर्गत उत्तराखंड की नदियों (मुख्यतः काली और कोसी) में पाई जाने वाली किस प्रसिद्ध मछली को ‘हिमालयन महाशीर’ कहा जाता है? उत्तर: गोल्डन महाशीर (Golden Mahseer)।

15 जनवरी: 108 सीमांत गाँवों में स्वास्थ्य सेवाओं हेतु ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ के तहत ITBP के साथ ऐतिहासिक MoU

15 जनवरी 2026 को उत्तराखंड के सुदूर सीमांत क्षेत्रों (Border Areas) में रहने वाले नागरिकों को बेहतर और त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ (Swasth Seema Abhiyan) के अंतर्गत किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के 108 सीमांत गाँवों में मेडिकल सुविधाओं की पहुँच सुनिश्चित करना है।

‘स्वस्थ सीमा अभियान’ और ITBP के साथ समझौते के प्रमुख बिंदु

  • ✦ 108 गाँवों का कवरेज: इस योजना के प्रथम चरण में राज्य के तीन सीमांत जिलों— उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के 108 अति-दुर्गम गाँवों को चिन्हित किया गया है। ये गाँव चीन (तिब्बत) सीमा के निकट स्थित हैं।
  • ✦ ITBP की भूमिका: दुर्गम क्षेत्रों में जहाँ राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की पहुँच सीमित है, वहाँ ITBP के चिकित्सा अधिकारी (Medical Officers) और उनकी बटालियन के अस्पताल ग्रामीणों को ओपीडी (OPD), आपातकालीन चिकित्सा, प्राथमिक उपचार और दवाइयां उपलब्ध कराएंगे।
  • ✦ टेलीमेडिसिन और रेफरल सुविधा: गंभीर बीमारियों की स्थिति में ITBP के संचार नेटवर्क का उपयोग कर ग्रामीणों को ई-संजीवनी (e-Sanjeevani) या टेलीमेडिसिन के जरिए बड़े अस्पतालों के विशेषज्ञों से जोड़ा जाएगा तथा आपातकालीन एयरलिफ्ट/रेफरल में भी मदद मिलेगी।
  • ✦ पलायन पर रोक: स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में सीमांत गाँवों से होने वाले ‘रिवर्स माइग्रेशन’ (पलायन) को रोकना इस अभियान का सबसे बड़ा सामाजिक उद्देश्य है।

सामरिक महत्व और ‘वाइब्रेंट विलेज’ दृष्टिकोण

सीमांत गाँव देश की ‘प्रथम रक्षा पंक्ति’ (First Line of Defense) होते हैं। केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ (Vibrant Villages Programme) के तहत इन गाँवों को ‘देश का अंतिम नहीं, बल्कि पहला गाँव’ माना गया है। ITBP के साथ यह स्वास्थ्य साझेदारी नागरिक-सैन्य सहयोग (Civil-Military Cooperation) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो न केवल सीमावर्ती निवासियों का जीवन स्तर सुधारेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से सीमा पर स्थायी आबादी को भी बनाए रखेगी।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: 15 जनवरी 2026 को उत्तराखंड सरकार ने ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किस सुरक्षा बल के साथ समझौता (MoU) किया है? उत्तर: ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) के साथ।
प्रश्न: इस एमओयू के तहत प्रथम चरण में उत्तराखंड के कितने सीमांत गाँवों को स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान की जाएंगी? उत्तर: 108 सीमांत गाँवों को।
प्रश्न: उत्तराखंड के वे तीन जिले कौन से हैं जो चीन (तिब्बत) के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं और जहाँ ITBP तैनात है? उत्तर: उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़।
प्रश्न: सीमांत गाँवों से पलायन रोकने और उनके समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख योजना कौन सी है? उत्तर: वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Villages Programme)।
प्रश्न: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की स्थापना कब हुई थी? उत्तर: 24 अक्टूबर 1962 (भारत-चीन युद्ध के दौरान)।

16 जनवरी: DPIIT की 5वीं स्टार्टअप रैंकिंग में उत्तराखंड ‘लीडर’ और रुड़की में राष्ट्रीय पैरालंपिक पावरलिफ़्टिंग चैंपियनशिप

16 जनवरी 2026 को उत्तराखंड ने नवाचार (Innovation) और खेल जगत में दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कीं। एक ओर जहाँ केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के DPIIT की ‘5वीं राज्य स्टार्टअप पारितंत्र रैंकिंग’ में उत्तराखंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘लीडर’ (Leader) श्रेणी में अपना स्थान पक्का किया है, वहीं दूसरी ओर हरिद्वार जिले के रुड़की में ‘राष्ट्रीय पैरालंपिक पावरलिफ़्टिंग चैंपियनशिप’ का भव्य शुभारंभ हुआ, जो राज्य में दिव्यांग खेलों (Para-sports) को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

DPIIT की 5वीं राज्य स्टार्टअप पारितंत्र रैंकिंग और उत्तराखंड

  • ✦ ‘लीडर’ राज्य का दर्जा: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी इस रैंकिंग में उत्तराखंड को ‘लीडर’ श्रेणी (Category-B राज्यों में) का सम्मान मिला है। राज्य ने स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल माहौल बनाने, इन्क्यूबेशन सेंटर्स (Incubation Centers) की स्थापना और संस्थागत समर्थन प्रदान करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
  • ✦ नवाचार नीति का प्रभाव: राज्य की ‘उत्तराखंड स्टार्टअप नीति’ के तहत युवाओं को सीड फंडिंग (Seed Funding), पेटेंट पंजीकरण में वित्तीय सहायता और महिला उद्यमियों के लिए विशेष भत्ते का सीधा लाभ इकोसिस्टम को मिला है।
  • ✦ रैंकिंग की श्रेणियां: इस सूचकांक को राज्यों के प्रदर्शन के आधार पर मुख्यतः ‘बेस्ट परफॉर्मर’, ‘टॉप परफॉर्मर’, ‘लीडर’, ‘एस्पायरिंग लीडर’ और ‘इमर्जिंग इकोसिस्टम’ श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।

रुड़की में राष्ट्रीय पैरालंपिक पावरलिफ़्टिंग चैंपियनशिप

खेल और सामाजिक समावेश (Social Inclusion) को प्रोत्साहित करते हुए, रुड़की (जनपद हरिद्वार) में राष्ट्रीय पैरालंपिक पावरलिफ़्टिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश भर के विभिन्न राज्यों से आए दिव्यांग पैरा-एथलीट (Para-athletes) अपनी अद्भुत शारीरिक और मानसिक शक्ति का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। इस भव्य आयोजन से न केवल उत्तराखंड में पैरा-स्पोर्ट्स के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास होगा, बल्कि राज्य के स्थानीय दिव्यांग खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए एक सशक्त मंच और नई प्रेरणा भी प्राप्त होगी।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: हाल ही में जारी DPIIT की 5वीं राज्य स्टार्टअप पारितंत्र रैंकिंग (State Startup Ecosystem Ranking) में उत्तराखंड को किस श्रेणी में रखा गया है? उत्तर: लीडर (Leader) श्रेणी में।
प्रश्न: स्टार्टअप्स की रैंकिंग जारी करने वाली नोडल एजेंसी ‘DPIIT’ का पूर्ण रूप क्या है? उत्तर: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade)।
प्रश्न: उत्तराखंड स्टार्टअप नीति के तहत महिला उद्यमियों, दिव्यांगों और SC/ST वर्ग द्वारा स्थापित स्टार्टअप्स को कितनी सीड फंडिंग (Seed Funding) का प्रावधान है? उत्तर: 7.50 लाख रुपये तक (सामान्य स्टार्टअप्स के लिए यह 5 लाख रुपये है)।
प्रश्न: जनवरी 2026 में ‘राष्ट्रीय पैरालंपिक पावरलिफ़्टिंग चैंपियनशिप’ का आयोजन उत्तराखंड के किस शहर में किया गया? उत्तर: रुड़की (जनपद हरिद्वार) में।
प्रश्न: रुड़की शहर किस नदी के तट पर स्थित है, जहाँ यह राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता आयोजित हो रही है? उत्तर: सोलानी नदी।

21-22 जनवरी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ऋषिकेश एवं हरिद्वार का ऐतिहासिक दौरा (‘कल्याण’ और ‘गायत्री परिवार’ शताब्दी समारोह)

21 और 22 जनवरी 2026 को भारत के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने देवभूमि उत्तराखंड के दो प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक नगरों— ऋषिकेश और हरिद्वार— का महत्वपूर्ण दौरा किया। इस दो दिवसीय प्रवास के दौरान उन्होंने ऋषिकेश में विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस (गोरखपुर) की मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी विशेषांक (Kalyan Shatabdi Ank) का विमोचन किया, वहीं हरिद्वार स्थित शांतिकुंज में ‘अखिल विश्व गायत्री परिवार’ के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग कर सनातन धर्म और भारतीय ज्ञान परंपरा का उद्घोष किया।

ऋषिकेश प्रवास: ‘कल्याण’ पत्रिका का शताब्दी अंक विमोचन

  • ✦ शताब्दी विशेषांक: सनातन धर्म के घर-घर तक प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाने वाली ‘कल्याण’ पत्रिका ने अपने प्रकाशन के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। ऋषिकेश (परमार्थ निकेतन क्षेत्र) में आयोजित भव्य समारोह में अमित शाह जी द्वारा इस ऐतिहासिक ‘शताब्दी विशेषांक’ का लोकार्पण किया गया।
  • ✦ गीता प्रेस का योगदान: इस अवसर पर गृह मंत्री ने भारतीय संस्कारों और जीवन मूल्यों को जीवित रखने में ‘गीता प्रेस, गोरखपुर’ (Gita Press, Gorakhpur) के अद्वितीय योगदान की सराहना की, जो बिना किसी विज्ञापन के करोड़ों पुस्तकें न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध कराता है।
  • ✦ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। इस दौरान भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को दोहराया गया।

हरिद्वार प्रवास: शांतिकुंज में गायत्री परिवार का शताब्दी समारोह

ऋषिकेश के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने हरिद्वार स्थित शांतिकुंज (Shantikunj) का दौरा किया, जो अखिल विश्व गायत्री परिवार का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय है। यहाँ उन्होंने युग निर्माण योजना के प्रणेता पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी और माता भगवती देवी शर्मा जी के विचारों को नमन करते हुए ‘गायत्री परिवार शताब्दी समारोह’ में भाग लिया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि गायत्री परिवार ने समाज सुधार, व्यसन मुक्ति, नारी सशक्तिकरण और वैज्ञानिक आध्यात्मवाद के क्षेत्र में जो कार्य किया है, वह राष्ट्र निर्माण के लिए एक संजीवनी के समान है। उन्होंने युवाओं से भारत को 2047 तक ‘विश्व गुरु’ बनाने के संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: 21 जनवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देवभूमि उत्तराखंड के किस शहर में ‘कल्याण’ पत्रिका के शताब्दी अंक का विमोचन किया? उत्तर: ऋषिकेश।
प्रश्न: विश्व प्रसिद्ध ‘कल्याण’ पत्रिका का प्रकाशन किस संस्था द्वारा किया जाता है? उत्तर: गीता प्रेस, गोरखपुर (Gita Press)।
प्रश्न: 22 जनवरी को अमित शाह ने ‘अखिल विश्व गायत्री परिवार’ के शताब्दी समारोह में कहाँ प्रतिभाग किया? उत्तर: शांतिकुंज, हरिद्वार में।
प्रश्न: अखिल विश्व गायत्री परिवार (शांतिकुंज, हरिद्वार) के संस्थापक कौन थे? उत्तर: युग निर्माण योजना के प्रणेता पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य।
प्रश्न: हाल ही में किस आध्यात्मिक प्रकाशन संस्था को भारत सरकार द्वारा ‘गांधी शांति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था? उत्तर: गीता प्रेस, गोरखपुर (वर्ष 2021 के लिए)।

25 जनवरी: पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को ‘पद्म भूषण’ और 8 पुलिस व अग्निशमन कर्मियों को गणतंत्र दिवस पदक

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (25 जनवरी) पर भारत सरकार द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों (पद्म पुरस्कारों) और वीरता पदकों की घोषणा की गई। इस वर्ष देवभूमि उत्तराखंड के लिए यह क्षण अत्यंत गौरवशाली रहा, क्योंकि राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री और वयोवृद्ध राजनेता श्री भगत सिंह कोश्यारी को ‘पद्म भूषण’ (Padma Bhushan) से सम्मानित करने का ऐलान किया गया। इसके साथ ही, राज्य में उत्कृष्ट और अदम्य साहस का परिचय देने वाले 8 पुलिस एवं अग्निशमन कर्मियों को राष्ट्रपति के प्रतिष्ठित गणतंत्र दिवस पदकों के लिए चुना गया।

भगत सिंह कोश्यारी को ‘पद्म भूषण’ सम्मान: प्रमुख बिंदु

  • ✦ सम्मान का क्षेत्र: श्री भगत सिंह कोश्यारी को यह देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान सार्वजनिक मामलों (Public Affairs) और राजनीति के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक एवं निस्वार्थ योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
  • ✦ राजनीतिक सफर: ‘भगत दा’ के नाम से लोकप्रिय कोश्यारी जी 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य गठन के बाद राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री (2001-2002) बने थे। इसके अतिरिक्त, वे उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के पहले नेता भी रहे।
  • ✦ राज्यपाल के रूप में सेवाएं: उन्होंने देश के महत्वपूर्ण राज्यों में संवैधानिक पदों को सुशोभित किया है, जिनमें महाराष्ट्र के राज्यपाल (2019-2023) और गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार प्रमुख है।

उत्तराखंड के 8 पुलिस और अग्निशमन कर्मियों को राष्ट्रीय पदक

गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर उत्तराखंड पुलिस विभाग और अग्निशमन (Fire Service) सेवा के 8 वीर और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों/कर्मचारियों को उनके असाधारण समर्पण के लिए सम्मानित किया गया है। इन पुरस्कारों में ‘विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक’ (President’s Police Medal for Distinguished Service) और ‘सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक’ (Police Medal for Meritorious Service) शामिल हैं। यह सम्मान राज्य के सुरक्षा बलों के उच्च मनोबल, कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता और आपदाओं के दौरान उनके द्वारा किए गए त्वरित एवं साहसिक बचाव कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना है।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड के किस पूर्व मुख्यमंत्री को प्रतिष्ठित ‘पद्म भूषण’ सम्मान से नवाजा गया? उत्तर: श्री भगत सिंह कोश्यारी।
प्रश्न: भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण पुरस्कार किस विशिष्ट क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया है? उत्तर: सार्वजनिक मामलों (Public Affairs / Public Life) के क्षेत्र में।
प्रश्न: भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के कौन से (क्रम के) मुख्यमंत्री रहे हैं? उत्तर: दूसरे (नित्यानंद स्वामी के बाद, वर्ष 2001 से 2002 तक)।
प्रश्न: हाल ही में गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्य के कितने पुलिस एवं अग्निशमन कर्मियों को राष्ट्रीय पदकों से सम्मानित करने की घोषणा की गई? उत्तर: 8 कर्मियों को।
प्रश्न: पद्म भूषण सम्मान भारत का कौन से क्रम का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है? उत्तर: तीसरा (भारत रत्न और पद्म विभूषण के बाद)।

27 जनवरी: उत्तराखंड में देश का पहला ‘UCC दिवस’ और UCC (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू

27 जनवरी 2026 को देवभूमि उत्तराखंड ने एक बार फिर ऐतिहासिक और राष्ट्रीय स्तर पर एक नज़ीर पेश की है। राज्य सरकार ने ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code – UCC) के सफल क्रियान्वयन और इसके सामाजिक प्रभाव के उपलक्ष्य में 27 जनवरी को प्रतिवर्ष ‘UCC दिवस’ (UCC Day) के रूप में मनाने की आधिकारिक घोषणा की। इसी महत्वपूर्ण अवसर पर, कानून की व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करने और इसे अधिक सुगम बनाने के लिए राज्य में ‘UCC (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ को भी तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया।

UCC (संशोधन) अध्यादेश 2026 और ‘UCC दिवस’ के प्रमुख बिंदु

  • ✦ पहला UCC दिवस: भारत के इतिहास में उत्तराखंड पहला राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता के लिए एक विशेष दिवस (27 जनवरी) समर्पित किया है। यह दिन महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के पर्व के रूप में मनाया जाएगा।
  • ✦ संशोधन अध्यादेश (Amendment Ordinance) 2026: मूल कानून को अधिक जन-अनुकूल बनाने के लिए इस अध्यादेश को लाया गया है। इसके तहत विवाह, तलाक और लिव-इन संबंधों (Live-in Relationships) की ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया (Registration Process) को तकनीकी रूप से अधिक सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया गया है।
  • ✦ समान अधिकार और सुरक्षा: UCC के लागू होने से राज्य में सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु, बहुविवाह पर रोक, तलाक के समान नियम और पैतृक संपत्ति (Inheritance) में बेटे तथा बेटी को एक समान कानूनी अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं।
  • ✦ जनजातियों को छूट बरकरार: अध्यादेश में भी यह स्पष्ट रखा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत सूचीबद्ध राज्य की अनुसूचित जनजातियों (ST – भोटिया, जौनसारी, राजी, बोक्सा और थारू) की पारंपरिक और सांस्कृतिक प्रथाओं पर यह कानून लागू नहीं होगा।

नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) की दिशा में ऐतिहासिक कदम

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) में देश भर में एक समान नागरिक संहिता लागू करने की अपेक्षा की गई है। स्वतंत्र भारत में इसे धरातल पर उतारने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति द्वारा इसका मसौदा तैयार किया गया था। इस पहले ‘UCC दिवस’ पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोर देते हुए कहा कि यह कानून किसी धर्म, संप्रदाय या आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह बाल विवाह को रोकने, महिलाओं को कानूनी सुरक्षा देने और समाज में लैंगिक समानता (Gender Equality) स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने किस तिथि को प्रतिवर्ष ‘UCC दिवस’ (समान नागरिक संहिता दिवस) के रूप में मनाने की घोषणा की है? उत्तर: 27 जनवरी को।
प्रश्न: स्वतंत्र भारत के इतिहास में ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य कौन सा है? उत्तर: उत्तराखंड।
प्रश्न: उत्तराखंड में UCC का मसौदा (Draft) तैयार करने के लिए किस सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था? उत्तर: जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई (Justice Ranjana Prakash Desai)।
प्रश्न: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद (Article) में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है? उत्तर: अनुच्छेद 44 (भाग-IV, राज्य के नीति निदेशक तत्व)।
प्रश्न: उत्तराखंड के UCC कानून के दायरे से किस समुदाय को पूरी तरह से बाहर (छूट) रखा गया है? उत्तर: राज्य की अनुसूचित जनजातियों (ST) को।

28 जनवरी: उत्तराखंड मंत्रिमंडल द्वारा ‘ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026’ सहित 8 अहम प्रस्तावों को मंजूरी

28 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय (देहरादून) में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की अहम बैठक में कुल 8 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और सतत विकास की दिशा में सबसे बड़ा और दूरगामी निर्णय लेते हुए ‘उत्तराखंड हरित हाइड्रोजन नीति 2026’ (Uttarakhand Green Hydrogen Policy 2026) को आधिकारिक रूप से स्वीकृति प्रदान की गई। इस नीति का उद्देश्य राज्य की अपार जलविद्युत क्षमता (Hydropower potential) का उपयोग कर उत्तराखंड को देश का प्रमुख क्लीन एनर्जी हब बनाना है।

उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 के प्रमुख बिंदु

  • ✦ उत्पादन का लक्ष्य (Target 2030): राज्य सरकार ने इस नई नीति के तहत वर्ष 2030 तक सालाना 100 किलोटन (Kilotonnes) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • ✦ उद्योग का दर्जा एवं सिंगल विंडो क्लीयरेंस: ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्रों को राज्य में औद्योगिक इकाई (Industry) का दर्जा दिया जाएगा। निवेशकों को समय पर सभी आवश्यक मंजूरियां मिल सकें, इसके लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू किया जाएगा।
  • ✦ वित्तीय प्रोत्साहन (Incentives): 31 दिसंबर 2030 से पहले शुरू होने वाली परियोजनाओं को वाणिज्यिक संचालन तिथि (Commercial Operation) से अगले 10 वर्षों तक कर (Tax), सरचार्ज और ट्रांसमिशन शुल्क में भारी छूट मिलेगी। सब्सिडी का निर्णय मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति लेगी।
  • ✦ औद्योगिक उपयोग: ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन से राज्य और देश के स्टील, सीमेंट, उर्वरक (Fertilizer) और रिफाइनरी जैसे बड़े उद्योगों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में भारी कमी आएगी।

नवाचार और रोजगार को गति

उत्तराखंड में ग्रीन हाइड्रोजन नीति लागू होने से न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति आएगी, बल्कि नई तकनीक, अनुसंधान, और ग्रीन एनर्जी आधारित स्टार्ट-अप्स (Start-ups) को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भरता कम करने के लिए यह ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ (National Green Hydrogen Mission) के अनुरूप राज्य सरकार का एक बड़ा रणनीतिक कदम है, जो युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित करेगा।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: उत्तराखंड मंत्रिमंडल द्वारा ‘उत्तराखंड हरित हाइड्रोजन नीति’ को कब मंजूरी दी गई? उत्तर: 28 जनवरी 2026 को।
प्रश्न: इस नीति के तहत राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष कितनी ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ के उत्पादन का लक्ष्य रखा है? उत्तर: 100 किलोटन (100 Kilotonnes) वार्षिक।
प्रश्न: नई नीति के अनुसार राज्य में स्थापित होने वाले ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्रों को कौन सा दर्जा प्रदान किया जाएगा? उत्तर: उद्योग का दर्जा (Industry Status)।
प्रश्न: ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ का निर्माण मुख्य रूप से किस प्रक्रिया द्वारा किया जाता है? उत्तर: पानी (H2O) के इलेक्ट्रोलिसिस (Electrolysis) द्वारा, जिसमें अक्षय ऊर्जा (सौर, पवन या जलविद्युत) का उपयोग होता है।
प्रश्न: ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत दी जाने वाली सब्सिडी के निर्धारण हेतु गठित समिति की अध्यक्षता कौन करेगा? उत्तर: राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary)।

29 जनवरी: ‘विंग्स इंडिया 2026’ (हैदराबाद) में उत्तराखंड बना ‘विमानन पारितंत्र प्रोत्साहन हेतु सर्वश्रेष्ठ राज्य’

29 जनवरी 2026 को नागरिक उड्डयन क्षेत्र के एशिया के सबसे बड़े कार्यक्रम ‘विंग्स इंडिया 2026’ (Wings India 2026) का आयोजन बेगमपेट एयरपोर्ट, हैदराबाद में किया गया। इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर उत्तराखंड को नागरिक उड्डयन अवसंरचना के विकास और कनेक्टिविटी के लिए ‘विमानन पारितंत्र प्रोत्साहन हेतु सर्वश्रेष्ठ राज्य’ (Best State for Promoting Aviation Ecosystem) के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह देवभूमि के लिए एक बड़ी उपलब्धि है जो पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में हवाई संपर्क (Air Connectivity) के अभूतपूर्व विकास को दर्शाती है।

पुरस्कार के मुख्य आधार और उत्तराखंड की उपलब्धियां

  • ✦ ‘उड़ान’ (UDAN) योजना का सफल क्रियान्वयन: राज्य ने ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (RCS-UDAN) योजना के तहत देहरादून (जौलीग्रांट), पंतनगर, और पिथौरागढ़ (नैनी सैनी) जैसे हवाई अड्डों के साथ-साथ कई छोटे हेलीपोर्ट्स को सफलतापूर्वक एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा है।
  • ✦ हेलीपोर्ट नेटवर्क का विस्तार: चारधाम यात्रा, पर्यटन और आपदा प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा गौचर, चिन्यालीसौड़, मुनस्यारी, सहस्रधारा और अल्मोड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर आधुनिक हेलीपोर्ट्स का निर्माण एवं संचालन किया जा रहा है।
  • ✦ एयरोस्पेस एवं विमानन नीतियां: उत्तराखंड सरकार ने विमानन और एयरोस्पेस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए निवेशकों के अनुकूल नीतियां लागू की हैं, साथ ही एयर एंबुलेंस (Air Ambulance) सेवाओं को भी मजबूत किया है।
  • ✦ आयोजक: ‘विंग्स इंडिया’ कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) और फिक्की (FICCI) द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।

पर्यटन और सामरिक दृष्टि से महत्व

उत्तराखंड जैसे सीमांत और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में नागरिक उड्डयन का विकास केवल पर्यटन (विशेषकर चारधाम यात्रा) के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा (सामरिक महत्व) और त्वरित आपदा राहत कार्यों के लिए भी जीवन रेखा (Lifeline) का कार्य करता है। यह राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य को भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन और विमानन उद्योग (Aviation Industry) में एक प्रमुख ‘हब’ के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: 29 जनवरी 2026 को आयोजित ‘विंग्स इंडिया 2026’ में उत्तराखंड को कौन सा प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला? उत्तर: विमानन पारितंत्र प्रोत्साहन हेतु सर्वश्रेष्ठ राज्य (Best State for Promoting Aviation Ecosystem)।
प्रश्न: एशिया के सबसे बड़े नागरिक उड्डयन कार्यक्रम ‘विंग्स इंडिया 2026’ का आयोजन कहाँ किया गया? उत्तर: बेगमपेट हवाई अड्डा, हैदराबाद (तेलंगाना) में।
प्रश्न: सीमांत जिले पिथौरागढ़ में स्थित प्रमुख हवाई पट्टी / एयरपोर्ट का क्या नाम है, जिसे उड़ान योजना के तहत सक्रिय किया गया है? उत्तर: नैनी-सैनी एयरपोर्ट (Naini Saini Airport)।
प्रश्न: ‘विंग्स इंडिया’ का आयोजन नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर कौन सी संस्था करती है? उत्तर: FICCI (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री)।
प्रश्न: केंद्र सरकार की ‘UDAN’ योजना का पूर्ण रूप क्या है? उत्तर: उड़े देश का आम नागरिक (Ude Desh ka Aam Nagrik – Regional Connectivity Scheme)।

30 जनवरी: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत 484 शिविरों में 3.89 लाख लोगों को सेवाएँ

30 जनवरी 2026 को उत्तराखंड सरकार के महत्वाकांक्षी जन-पहुंच कार्यक्रम ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ ने सुशासन (Good Governance) की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ने वाले इस महाभियान के अंतर्गत राज्य के सभी 13 जनपदों में 484 बहुउद्देश्यीय शिविर लगाए गए, जिनमें 3.89 लाख से अधिक नागरिकों को उनके गाँव और वार्ड स्तर पर ही विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ एवं सेवाओं का त्वरित समाधान प्रदान किया गया।

अभियान के प्रमुख बिंदु और उपलब्धियां

  • ✦ स्पॉट रेजोल्यूशन (त्वरित समाधान): इन शिविरों में मुख्य रूप से आय, जाति, मूल निवास प्रमाण-पत्रों का निर्माण, किसान सम्मान निधि की ई-केवाईसी (e-KYC), समाज कल्याण पेंशन की स्वीकृति और आयुष्मान कार्ड जैसे अति-महत्वपूर्ण दस्तावेज मौके पर ही बनाकर दिए गए।
  • ✦ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच (Last Mile Delivery): मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों पर ‘सरकार आपके द्वार’ की तर्ज पर यह पहल शुरू की गई है, ताकि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के उन लोगों को तहसील या जिला मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, जो आर्थिक या शारीरिक रूप से कमजोर हैं।
  • ✦ उच्चाधिकारियों की सीधी भागीदारी: इन शिविरों की अध्यक्षता स्वयं जिलाधिकारियों (DMs), मुख्य विकास अधिकारियों (CDOs) और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने की। अधिकारियों ने मौके पर ही जनता की शिकायतों को सुना और उनका निस्तारण किया।
  • ✦ पारदर्शिता और मॉनिटरिंग: शिविरों में प्राप्त और निस्तारित शिकायतों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘CM हेल्पलाइन 1905’ के माध्यम से लाभार्थियों से सीधे फीडबैक (Cross verification) लिया जा रहा है।

सुशासन और उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौती

उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी राज्य में विकास की सबसे बड़ी बाधा प्रशासनिक तंत्र तक आम जनमानस की पहुँच का कठिन होना है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम इस खाई को पाटने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। इससे न केवल जनता के समय और धन की बचत हो रही है, बल्कि सरकारी मशीनरी की जवाबदेही (Accountability) और कार्यप्रणाली में भी अभूतपूर्व तेजी आई है। यह पहल ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को धरातल पर उतारने का उत्कृष्ट मॉडल है।

🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न: 30 जनवरी 2026 को उत्तराखंड में 484 शिविर लगाकर 3.89 लाख लोगों को किस अभियान के तहत सेवाएं प्रदान की गईं? उत्तर: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत।
प्रश्न: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर: सरकारी योजनाओं और सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक (Last mile delivery) और उनके द्वार पर पहुँचाना।
प्रश्न: उत्तराखंड में जन-शिकायतों के त्वरित समाधान और फीडबैक तंत्र के लिए कौन सी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन कार्यरत है? उत्तर: CM हेल्पलाइन 1905 (CM Helpline 1905)।
प्रश्न: भारत में ‘सुशासन दिवस’ (Good Governance Day) प्रतिवर्ष किस राजनेता की जयंती के अवसर पर और किस तिथि को मनाया जाता है? उत्तर: 25 दिसंबर को (पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर)।
प्रश्न: ‘सरकार आपके द्वार’ की तर्ज पर शुरू किए गए इस कार्यक्रम का सबसे अधिक लाभ किस भौगोलिक क्षेत्र को प्राप्त होता है? उत्तर: राज्य के दूरस्थ, दुर्गम और पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रों को।
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