1 फ़रवरी: 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत, केंद्रीय करों में उत्तराखंड का अंश बढ़कर 1.14%
1 फ़रवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश होने के साथ ही संसद में 16वें वित्त आयोग (16th Finance Commission) की रिपोर्ट भी पटल पर रखी गई। इस रिपोर्ट में देवभूमि उत्तराखंड के लिए एक बड़ी सौगात दी गई है। केंद्रीय करों के विभाज्य पूल (Divisible Pool of Central Taxes) में उत्तराखंड की हिस्सेदारी को 15वें वित्त आयोग के 1.118% से बढ़ाकर 1.14 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे राज्य को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जो राज्य के विकास कार्यों में मील का पत्थर साबित होगा।
उत्तराखंड के अंश में वृद्धि के मुख्य कारण और प्रभाव
- वन एवं पारिस्थितिकी (Forest & Ecology) का लाभ: उत्तराखंड के लगभग 71% भूभाग पर वन हैं। राज्य लंबे समय से 'ग्रीन बोनस' की मांग कर रहा था। 16वें वित्त आयोग ने वन क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण के मानकों (Weightage) को विशेष महत्व दिया है, जिसका सीधा लाभ राज्य को मिला है।
- वित्तीय सुदृढ़ीकरण: हिस्सेदारी 1.118% से बढ़कर 1.14% होने से राज्य सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, और सड़क अवसंरचना (खासकर सीमांत क्षेत्रों में) सुधारने के लिए अतिरिक्त केंद्रीय धनराशि प्राप्त होगी।
- पलायन और कठिन भौगोलिक स्थितियां: आयोग ने पर्वतीय राज्यों की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, बुनियादी ढांचे की उच्च लागत और पलायन जैसी विशेष चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस अनुदान में वृद्धि की है।
16वां वित्त आयोग: एक संक्षिप्त अवलोकन (UPSC/UKPSC Mains Perspective)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे का सुझाव देने के लिए वित्त आयोग का गठन किया जाता है। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में गठित 16वें वित्त आयोग की यह रिपोर्ट 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 2030-31 तक के 5 वर्षों के लिए लागू होगी। इस रिपोर्ट में राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation), जनसांख्यिकीय प्रदर्शन (Demographic Performance), और आय के अंतर (Income Distance) को प्रमुख मापदंड बनाया गया है।
🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
1-2 फ़रवरी: केंद्रीय बजट 2026-27 में उत्तराखंड को ऐतिहासिक सौगात, रेल परियोजनाओं हेतु रिकॉर्ड ₹4,769 करोड़ का आवंटन
1 और 2 फ़रवरी 2026 को संसद में पेश किए गए आम बजट (केंद्रीय बजट 2026-27) में देवभूमि उत्तराखंड के रेल नेटवर्क और आधारभूत ढांचे को अभूतपूर्व गति प्रदान की गई है। वित्त मंत्री द्वारा राज्य में चल रही और नई रेल परियोजनाओं के विकास के लिए अब तक का सर्वाधिक ₹4,769 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। यह ऐतिहासिक धनराशि राज्य की कनेक्टिविटी, सामरिक सुरक्षा और पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
बजट आवंटन के मुख्य बिंदु और रेल परियोजनाएं
- ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना (Rishikesh-Karnaprayag Line): इस बहुप्रतीक्षित और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण 125 किमी लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए बजट का एक बड़ा हिस्सा आवंटित किया गया है। इसका लक्ष्य पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित और तीव्र परिवहन सुनिश्चित करना है।
- अमृत भारत स्टेशन योजना (Amrit Bharat Station Scheme): राज्य के प्रमुख रेलवे स्टेशनों (जैसे देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, लालकुआं और हल्द्वानी) को विश्वस्तरीय सुविधाओं, एस्केलेटर, आधुनिक वेटिंग रूम और स्थानीय संस्कृति की झलक के साथ पुनर्विकसित किया जा रहा है।
- वंदे भारत और नई ट्रेनें: बजट आवंटन से राज्य में 'वंदे भारत एक्सप्रेस' (Vande Bharat Express) के नेटवर्क का और विस्तार होगा, जिससे दिल्ली, लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों से उत्तराखंड की दूरी और कम हो जाएगी।
- पूर्ण विद्युतीकरण एवं कवच सुरक्षा: उत्तराखंड के ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क के 100% विद्युतीकरण (Electrification) को सुदृढ़ करने के साथ-साथ दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्वदेशी 'कवच' (Kavach) सुरक्षा प्रणाली के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है।
सामरिक और पर्यटन विकास में मील का पत्थर
उत्तराखंड चीन और नेपाल के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करता है, इसलिए सीमांत क्षेत्रों (खासकर चमोली तक) रेलवे की पहुँच सामरिक (Strategic) दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, चारधाम यात्रा और पर्यटन पर निर्भर राज्य की अर्थव्यवस्था को इस मजबूत रेल कनेक्टिविटी से भारी उछाल मिलेगा। तीर्थयात्रियों का सफर सुगम होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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2 फ़रवरी: मुख्यमंत्री द्वारा निर्माण श्रमिकों के कौशल विकास हेतु 'प्रशिक्षण प्रबंधन प्रणाली' (TMS) पोर्टल का शुभारंभ
2 फ़रवरी 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के असंगठित क्षेत्र और विशेषकर निर्माण श्रमिकों (Construction Workers) के उत्थान के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 'प्रशिक्षण प्रबंधन प्रणाली' (Training Management System - TMS) पोर्टल का विधिवत शुभारंभ किया। उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड (UKBOCW) के तत्वावधान में शुरू किया गया यह पोर्टल श्रमिकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने और उनकी आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक अभिनव पहल है।
TMS पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं और लाभ
- कौशल उन्नयन (Skill Upgradation): इस पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को राजमिस्त्री (Mason), प्लंबिंग, इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर और वेल्डिंग जैसे निर्माण कार्यों की आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- ऑनलाइन पंजीकरण सुविधा: अब श्रमिक घर बैठे या अपने मोबाइल के माध्यम से TMS पोर्टल पर आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रमों (Training Programs) के लिए सरलता से अपना पंजीकरण (Registration) कर सकेंगे।
- प्रमाणन और मानदेय (Stipend): प्रशिक्षण पूरा होने के बाद श्रमिकों को एक आधिकारिक प्रमाण पत्र (Certificate) दिया जाएगा। इसके अलावा, प्रशिक्षण अवधि के दौरान उनके दैनिक भरण-पोषण हेतु मानदेय (Stipend) और कार्य करने हेतु 'टूलकिट' भी निःशुल्क प्रदान की जाएगी।
- रोजगार से सीधा जुड़ाव: प्रमाणित श्रमिकों का डेटाबेस तैयार होने से सरकारी व निजी ठेकेदारों (Contractors) को कुशल मैनपावर आसानी से मिल सकेगी, जिससे श्रमिकों की दैनिक मजदूरी और आय में सीधा इजाफा होगा।
असंगठित क्षेत्र का सशक्तिकरण
उत्तराखंड में चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के चलते निर्माण श्रमिकों की भारी मांग है। TMS पोर्टल के लागू होने से राज्य में कुशल मानव संसाधन (Skilled Manpower) स्थानीय स्तर पर ही तैयार होगा। इससे न केवल बाहरी राज्यों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि श्रम कल्याण कानूनों का सही ढंग से पालन सुनिश्चित कर श्रमिकों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाया जा सकेगा।
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3 फ़रवरी: पर्वतारोहण हेतु उत्तराखंड में 83 हिमालयी चोटियां खोली गईं; भारतीय पर्वतारोहियों का शुल्क माफ
3 फ़रवरी 2026 को देवभूमि उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) को एक नया आयाम देते हुए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य के दुर्गम और सीमांत क्षेत्रों में स्थित 83 नई और वर्जिन (Virgin) हिमालयी चोटियों को पर्वतारोहण (Mountaineering) और ट्रैकिंग के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दिया गया है। इसके साथ ही, साहसिक खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए भारतीय पर्वतारोहियों से लिया जाने वाला आरोहण शुल्क (Climbing Fee) पूरी तरह से माफ कर दिया गया है।
निर्णय के प्रमुख बिंदु और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा
- 83 नई चोटियों का विवरण: इनमें से अधिकांश चोटियां गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के उच्च हिमालयी क्षेत्रों (High Altitude Areas) में स्थित हैं, जो अब तक सुरक्षा कारणों या दुर्गमता के चलते पर्वतारोहियों के लिए प्रतिबंधित थीं।
- शुल्क माफी का लाभ: भारतीय पर्वतारोहियों को अब इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन (IMF) के माध्यम से अनुमति लेने पर राज्य सरकार को कोई रॉयल्टी या आरोहण शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि, विदेशी पर्वतारोहियों (Foreign Expeditions) के लिए शुल्क व्यवस्था पूर्ववत लागू रहेगी।
- स्थानीय रोजगार सृजन: नई चोटियों के खुलने से सीमांत क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं को गाइड (Guide), हाई एल्टीट्यूड पोर्टर (HAP), कुक और होमस्टे संचालक के रूप में प्रत्यक्ष रोजगार के भारी अवसर मिलेंगे।
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस: पर्वतारोहण अभियानों की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए वन विभाग, पर्यटन विभाग और गृह विभाग को मिलाकर एक 'सिंगल विंडो सिस्टम' लागू किया गया है ताकि लालफीताशाही से बचा जा सके।
सामरिक महत्व और पर्यावरण संरक्षण
चीन और नेपाल की सीमाओं से लगे इन पर्वतीय क्षेत्रों में पर्वतारोहण गतिविधियां बढ़ने से न केवल 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' (Vibrant Village Programme) को गति मिलेगी, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में मानवीय उपस्थिति से राष्ट्रीय सुरक्षा (Border Security) भी सुदृढ़ होगी और पलायन पर रोक लगेगी। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने यह अनिवार्य किया है कि सभी पर्वतारोहण अभियान 'इको-ट्रेल' (Eco-trail) नियमों का कड़ाई से पालन करेंगे और अपने साथ ले जाए गए सभी ठोस कचरे (Solid Waste) को वापस लाएंगे, ताकि हिमालय का संवेदनशील पर्यावरण सुरक्षित रहे।
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3 फ़रवरी: उत्तराखंड पर्यटन विभाग की रिपोर्ट - 2025 में रिकॉर्ड 6.03 करोड़ पर्यटकों का आगमन
3 फ़रवरी 2026 को उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) और पर्यटन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देवभूमि उत्तराखंड में पर्यटकों के आगमन ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कुल 6.03 करोड़ (60.3 मिलियन) घरेलू और विदेशी पर्यटकों ने राज्य का भ्रमण किया। यह आंकड़ा राज्य की आर्थिकी (Economy) और पर्यटन उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जो राज्य के बेहतर होते बुनियादी ढांचे और सुरक्षित यात्रा व्यवस्था को दर्शाता है।
पर्यटकों की रिकॉर्ड वृद्धि के मुख्य कारण और प्रभाव
- चारधाम और कांवड़ यात्रा का योगदान: इस 6.03 करोड़ के विशाल आंकड़े में सबसे बड़ा योगदान विश्व प्रसिद्ध 'चारधाम यात्रा' (बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) और हरिद्वार की 'कांवड़ यात्रा' का रहा है। इसके अतिरिक्त कैंची धाम (नीम करौली बाबा) में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने भी कुमाऊं में पर्यटन को नई ऊंचाई दी है।
- बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास: 'ऑल-वेदर रोड' (चारधाम महामार्ग विकास परियोजना) के निर्माण, नई हेलीकाप्टर सेवाओं (UDAN योजना) और कुमाऊं-गढ़वाल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के कारण तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए यात्रा अत्यधिक सुगम और सुरक्षित हुई है।
- होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन: सरकार की 'होमस्टे योजना' (Homestay Scheme) के कारण पर्यटकों का रुझान भीड़भाड़ वाले शहरों से हटकर राज्य के शांत और सीमांत गांवों (Vibrant Villages) की ओर बढ़ा है। इससे ग्रामीण आर्थिकी मजबूत हुई है और रिवर्स माइग्रेशन (Reverse Migration) को बल मिला है।
- विंटर और एडवेंचर टूरिज्म: केवल ग्रीष्मकालीन ही नहीं, बल्कि औली, दयारा बुग्याल (स्कीइंग), और ऋषिकेश (राफ्टिंग और योग) जैसे स्थलों के कारण विदेशी पर्यटकों के आगमन और 'शीतकालीन पर्यटन' (Winter Tourism) में भी भारी उछाल दर्ज किया गया है।
सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) की चुनौती
पर्यटन उत्तराखंड के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का मुख्य आधार है। 6 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आना राज्य के लिए वरदान है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या राज्य की पारिस्थितिकी (Ecology) के लिए एक चुनौती भी है। इसके दृष्टिगत अब राज्य सरकार का मुख्य फोकस 'कैरिंग कैपेसिटी' (Carrying Capacity - वहन क्षमता) के आकलन और सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) को बढ़ावा देने पर है, ताकि हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जा सके।
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7 फ़रवरी: टनकपुर में 'शारदा नदी कॉरिडोर' का ऐतिहासिक शिलान्यास और ₹319 करोड़ की विकास परियोजनाएं
7 फ़रवरी 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत जिले के सीमांत नगर टनकपुर में ऐतिहासिक 'शारदा नदी कॉरिडोर' (Sharda River Corridor) और घाट निर्माण कार्यों का विधिवत शिलान्यास किया। इस अवसर पर टनकपुर और बनबसा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कुल ₹319 करोड़ से अधिक की विभिन्न आधारभूत परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। यह महात्वाकांक्षी कॉरिडोर टनकपुर को एक प्रमुख पर्यटन, आध्यात्मिक और वाणिज्यिक केंद्र के रूप में स्थापित करने का कार्य करेगा।
शारदा नदी कॉरिडोर और विकास परियोजनाओं के मुख्य बिंदु
- भव्य रिवरफ्रंट और आरती घाट: हरिद्वार की 'हर की पैड़ी' और साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर शारदा नदी के तटों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। यहाँ नियमित 'शारदा आरती' के लिए विशाल और आकर्षक घाटों का निर्माण किया जा रहा है।
- पर्यटन और आर्थिकी को बूस्ट: विश्व प्रसिद्ध माँ पूर्णागिरी धाम के दर्शनार्थ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु टनकपुर पहुँचते हैं। इस कॉरिडोर के बनने से श्रद्धालु यहाँ अधिक समय बिताएंगे, जिससे स्थानीय व्यापार, होमस्टे, और परिवहन व्यवसाय से जुड़े युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
- बाढ़ सुरक्षा (Flood Protection): मॉनसून के दौरान शारदा नदी के उफान से टनकपुर और बनबसा के सीमांत गांवों को बचाने के लिए आधुनिक और मजबूत तटबंधों (Embankments) का निर्माण इस परियोजना का एक अहम हिस्सा है।
- समग्र शहरी विकास: ₹319 करोड़ के इस वित्तीय पैकेज में केवल कॉरिडोर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सड़कों का चौड़ीकरण, आधुनिक बस टर्मिनल, पेयजल योजनाएं और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) जैसे महत्वपूर्ण जनसुविधा के कार्य भी शामिल हैं।
सामरिक और भौगोलिक महत्व (Mains Perspective)
टनकपुर (जनपद चंपावत) को ऐतिहासिक रूप से 'कुमाऊं का प्रवेश द्वार' (Gateway to Kumaon) कहा जाता है। शारदा नदी (जिसे उद्गम से लेकर टनकपुर तक काली या महाकाली नदी कहा जाता है) भारत और नेपाल के बीच एक मजबूत प्राकृतिक सीमा बनाती है। इस कॉरिडोर और संबंधित अवसंरचना का विकास न केवल धार्मिक पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के तहत सीमांत क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूत कर वहाँ से होने वाले पलायन (Migration) को रोकने में भी एक सामरिक भूमिका निभाएगा।
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9 फ़रवरी: झारखंड को हराकर उत्तराखंड पहली बार रणजी ट्रॉफ़ी के सेमीफ़ाइनल में, रचा इतिहास
9 फ़रवरी 2026 को देवभूमि उत्तराखंड की क्रिकेट टीम ने घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy 2025-26) में एक नया इतिहास रच दिया। जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उत्तराखंड ने झारखंड को एक पारी और 6 रन से करारी शिकस्त देकर पहली बार रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। यह राज्य के क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि बनकर उभरी।
ऐतिहासिक क्वार्टर फाइनल के मुख्य बिंदु
- शानदार प्रदर्शन: झारखंड की पहली पारी (235 रन) और दूसरी पारी (130 रन) के जवाब में उत्तराखंड ने अपनी एकमात्र पारी में 371 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया था।
- प्लेयर ऑफ द मैच: इस ऐतिहासिक मुकाबले में उत्तराखंड के स्टार स्पिनर मयंक मिश्रा को उनके शानदार और घातक गेंदबाजी प्रदर्शन के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' (Player of the Match) चुना गया।
- राज्य क्रिकेट का उदय: 2018-19 में रणजी ट्रॉफी में पदार्पण करने वाली उत्तराखंड की टीम का यह पहला अवसर था जब टीम ने एलीट ग्रुप से होते हुए नॉकआउट स्टेज में इतनी बड़ी जीत दर्ज कर टॉप-4 (सेमीफाइनल) में अपनी जगह पक्की की।
रणजी ट्रॉफी 2025-26: सेमीफाइनल और टूर्नामेंट का अंतिम परिणाम (Final Result)
उत्तराखंड का यह स्वर्णिम सफर सेमीफाइनल में जाकर समाप्त हुआ। 15 से 19 फ़रवरी 2026 तक लखनऊ के इकाना स्टेडियम (Ekana Stadium) में उत्तराखंड और कर्नाटक के बीच खेला गया सेमीफाइनल मुकाबला 'ड्रॉ' (Draw) पर समाप्त हुआ, लेकिन पहली पारी में विशाल बढ़त (कर्नाटक- 736 रन, उत्तराखंड- 233 रन) के आधार पर मजबूत कर्नाटक की टीम ने फाइनल में प्रवेश किया।
टूर्नामेंट का विजेता (Champion): रणजी ट्रॉफी 2025-26 का खिताबी मुकाबला कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर (J&K) के बीच खेला गया। यह फाइनल मैच भी 'ड्रॉ' रहा, लेकिन पहली पारी की बढ़त (J&K: 584 रन, कर्नाटक: 293 रन) के आधार पर जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया!
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10 फ़रवरी: मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोज़गार योजना का शुभारंभ और कुंभ 2027 (हरिद्वार) की तैयारियों की समीक्षा
10 फ़रवरी 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की मातृशक्ति को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोज़गार योजना' (Mukhyamantri Ekal Mahila Swarozgar Yojana) का विधिवत शुभारंभ किया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आगामी हरिद्वार कुंभ (अर्द्ध कुंभ) 2027 के सफल एवं सुरक्षित आयोजन हेतु बुनियादी ढांचे और तैयारियों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक भी संपन्न हुई।
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोज़गार योजना के प्रमुख बिंदु
- लक्षित लाभार्थी (Beneficiaries): इस योजना का लाभ राज्य की उन 'एकल महिलाओं' को मिलेगा जो विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता (Abandoned) हैं या जिनकी आयु 35 वर्ष से अधिक है और उन्होंने विवाह नहीं किया है।
- सब्सिडी और वित्तीय सहायता: अपना स्वयं का व्यवसाय (जैसे- सिलाई, बुनाई, ब्यूटी पार्लर, जनरल स्टोर या खाद्य प्रसंस्करण) शुरू करने के लिए सरकार द्वारा महिलाओं को ₹1 लाख तक के प्रोजेक्ट पर 50% से 75% तक की भारी सब्सिडी (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
- आयु सीमा एवं पात्रता: योजना का लाभ उठाने के लिए महिला की आयु न्यूनतम 25 वर्ष और अधिकतम 45-50 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। साथ ही, महिला का उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
- उद्देश्य: इस योजना का मुख्य लक्ष्य एकल महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना, उन्हें गरीबी रेखा से बाहर निकालना और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए स्वरोज़गार से जोड़ना है।
हरिद्वार कुंभ (अर्द्ध कुंभ) 2027 की तैयारियों की समीक्षा
हरिद्वार में आगामी वर्ष 2027 में 'अर्द्ध कुंभ मेले' का आयोजन होना प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 2027 के कुंभ मेले को 'ग्रीन और क्लीन कुंभ' (Green and Clean Kumbh) के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसके लिए हरिद्वार और ऋषिकेश में नए घाटों का निर्माण, पुराने पुलों का चौड़ीकरण, रिंग रोड का निर्माण और क्राउड मैनेजमेंट (Crowd Management) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक CCTV नेटवर्क स्थापित करने के कार्यों को समय-सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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21 फ़रवरी: देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड में 30वें 'दिव्य कला मेले' का भव्य शुभारंभ
21 फ़रवरी 2026 को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित ऐतिहासिक रेंजर्स ग्राउंड (Rangers Ground) में राष्ट्रीय स्तर के 30वें 'दिव्य कला मेले' (Divya Kala Mela) का शानदार उद्घाटन किया गया। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) द्वारा आयोजित यह महाकुंभ 1 मार्च तक चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के दिव्यांग (Divyangjan) शिल्पकारों, कारीगरों और उद्यमियों के हुनर को एक राष्ट्रीय मंच और बाजार उपलब्ध कराना है।
दिव्य कला मेले के प्रमुख आकर्षण और उद्देश्य
- देशभर के कारीगरों का समागम: इस 30वें संस्करण में उत्तराखंड सहित भारत के 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 100 से अधिक दिव्यांग कारीगरों और उद्यमियों ने अपने स्टॉल लगाए हैं।
- 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा: मेले में मुख्य रूप से हथकरघा (Handloom), हस्तशिल्प (Handicrafts), पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद, जैविक खाद्य पदार्थ, खिलौने, कपड़े और घर की सजावट का बेहतरीन सामान प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखा गया है।
- वित्तीय समावेशन (NDFDC की भूमिका): मेले के दौरान राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (NDFDC) द्वारा दिव्यांग उद्यमियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए रियायती दरों पर ऋण (Loans) और वित्तीय सहायता भी वितरित की जा रही है।
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि यह मेला कला का भी उत्सव है। यहाँ प्रतिदिन शाम को देश के विभिन्न हिस्सों से आए दिव्यांग कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां (Cultural events) दी जा रही हैं।
दिव्यांग सशक्तिकरण की दिशा में एक 'महाकुंभ'
दिव्य कला मेला 'सबका साथ, सबका विकास' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प का एक जीवंत उदाहरण है। देहरादून में इसका आयोजन राज्य के स्थानीय दिव्यांगजनों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय स्तर के उद्यमियों के साथ काम करने और बाजार की आधुनिक मांग (Market trends) को समझने का अवसर मिल रहा है। यह आयोजन समाज में यह संदेश देता है कि दिव्यांगता किसी की प्रतिभा के आड़े नहीं आ सकती, बशर्ते उन्हें सही मंच और अवसर प्रदान किया जाए।
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22 फ़रवरी: सरकारी योजनाओं की एकल-खिड़की जानकारी हेतु 'मायस्कीम' (myScheme) पोर्टल का शुभारंभ
22 फ़रवरी 2026 को आम नागरिकों तक सरकारी योजनाओं की पहुँच को आसान, सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य में 'मायस्कीम' (myScheme) पोर्टल का आधिकारिक शुभारंभ किया गया। यह ई-गवर्नेंस (e-Governance) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जो एक ही प्लेटफॉर्म (Single-Window) पर नागरिकों को केंद्र और राज्य सरकार की सैकड़ों कल्याणकारी योजनाओं की सटीक जानकारी प्रदान करेगा, जिससे उन्हें अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
मायस्कीम (myScheme) पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं
- पात्रता की जांच (Personalized Eligibility): नागरिक इस पोर्टल पर अपनी सामान्य जानकारी (जैसे- आयु, लिंग, आय, जाति, राज्य आदि) दर्ज करके कुछ ही सेकंड में यह जान सकते हैं कि वे किन-किन सरकारी योजनाओं के लिए पात्र (Eligible) हैं।
- वन-स्टॉप सर्च (One-Stop Discovery): कृषि, समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सभी योजनाओं की जानकारी, आवेदन प्रक्रिया, और आवश्यक दस्तावेजों की सूची अब एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी।
- भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर लगाम: प्रक्रिया के पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी होने से आम जनता को बिचौलियों (Middlemen) से मुक्ति मिलेगी और सही लाभार्थी तक योजना का लाभ सीधा पहुँचेगा।
- डिजिटल एकीकरण: यह पोर्टल योजनाओं को खोजना आसान बनाता है और उपयोगकर्ताओं को संबंधित विभागीय वेबसाइट या 'अपूणी सरकार' पोर्टल पर आवेदन के लिए सीधे रीडायरेक्ट कर देता है।
डिजिटल इंडिया और सुशासन (Good Governance) का उत्कृष्ट मॉडल
उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास 'डिजिटल इंडिया' (Digital India) विजन के अनुरूप है। उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से विषम राज्य में जहाँ दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के नागरिकों को सूचना के अभाव में योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था, वहाँ यह 'मायस्कीम' (myScheme) पोर्टल एक वरदान साबित होगा। यह 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस' के सिद्धांत को धरातल पर उतारते हुए राज्य के सुदूर गांवों में रहने वाले किसानों, महिलाओं और युवाओं को उनके अधिकारों के प्रति सशक्त बनाएगा।
🎯 आगामी परीक्षाओं (UKPSC / UKSSSC) हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
24 फ़रवरी: राज्य में सुरक्षित निर्माण हेतु CSIR-CBRI निदेशक की अध्यक्षता में 14-सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल गठित
24 फ़रवरी 2026 को उत्तराखंड सरकार ने राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में सुरक्षित, आपदा-रोधी और नियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। राज्य के भवन निर्माण उपविधियों (Building By-laws) में व्यापक और वैज्ञानिक संशोधन करने के लिए CSIR-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की के निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय 14-सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल का गठन किया गया है। यह निर्णय जोशीमठ जैसे भू-धंसाव और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न हो रही नई चुनौतियों को देखते हुए लिया गया है।
विशेषज्ञ पैनल का मुख्य उद्देश्य और कार्ययोजना
- आपदा-रोधी निर्माण मानक: पैनल का मुख्य कार्य राज्य की संवेदनशील भौगोलिकता (Seismic Zone IV और V) को ध्यान में रखते हुए भूकंपरोधी और भूस्खलन-रोधी भवन निर्माण के कड़े नियम (Standards) तय करना है।
- पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के लिए अलग नियम: मैदानी जिलों (देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार) और पर्वतीय जिलों के लिए भवन की ऊंचाई (Building Height), ढलान (Slope Cut), और मिट्टी की वहन क्षमता (Carrying Capacity) के आधार पर अलग-अलग नीतियां तैयार की जाएंगी।
- ग्रीन और सस्टेनेबल बिल्डिंग: नई उपविधियों में 'ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट', वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), और सीवेज व ड्रेनेज सिस्टम की उचित व्यवस्था को भवन का नक्शा पास कराने के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा।
- CSIR-CBRI की भूमिका: रुड़की स्थित CBRI भवन निर्माण तकनीकों पर शोध करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था है। इसके निदेशक की तकनीकी विशेषज्ञता से राज्य के भवन निर्माण कानूनों को एक मजबूत वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग आधार प्राप्त होगा।
अनियोजित शहरीकरण पर रोक (Mains Perspective)
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ता अनियोजित शहरीकरण (Unplanned Urbanization) और पर्यटन का बढ़ता दबाव राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर भारी पड़ रहा है। संकरी सड़कों पर बड़े होटल, बिना ड्रेनेज के निर्माण और ढलानों पर अत्यधिक कंक्रीट के कारण प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है। यह 14-सदस्यीय पैनल इन्हीं खामियों को दूर कर एक ऐसा मास्टर ड्राफ्ट (Master Draft) तैयार करेगा, जो विकास और पर्यावरण (Development and Environment) के बीच एक स्थायी संतुलन स्थापित कर सके।
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25 फ़रवरी: राज्य मंत्रिमंडल द्वारा 28 प्रस्ताव स्वीकृत- ₹1.11 लाख करोड़ का बजट, UCC संशोधन विधेयक और 3 फास्ट-ट्रैक कोर्ट
25 फ़रवरी 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय (देहरादून) में उत्तराखंड मंत्रिमंडल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के विकास, कानून-व्यवस्था और आगामी वित्तीय वर्ष की रूपरेखा तय करते हुए कुल 28 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का विशाल बजट, समान नागरिक संहिता (UCC) को अधिक प्रभावी बनाने वाला संशोधन विधेयक और महिलाओं व बच्चों को त्वरित न्याय दिलाने हेतु फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना जैसे ऐतिहासिक फैसले शामिल हैं।
मंत्रिमंडल के प्रमुख निर्णय और उनकी विस्तृत जानकारी
- ₹1.11 लाख करोड़ का राज्य बजट: कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग ₹1.11 लाख करोड़ के विशाल बजट प्रस्ताव (Annual Financial Statement) को मंजूरी दे दी है। यह बजट अब आगामी विधानसभा सत्र में पटल पर रखा जाएगा। इस बजट में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सृजन पर विशेष फोकस रखा गया है।
- UCC (संशोधन) विधेयक 2026: हाल ही में राज्य में लागू हुए 'समान नागरिक संहिता' (UCC) के व्यावहारिक क्रियान्वयन को और अधिक सुगम बनाने के लिए कैबिनेट ने 'UCC संशोधन विधेयक' को मंजूरी दी है। इसके तहत विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप के ऑनलाइन पंजीकरण (Registration) से जुड़ी कुछ तकनीकी खामियों और व्यावहारिक अड़चनों को दूर किया जाएगा।
- 3 नए फास्ट-ट्रैक न्यायालयों (Fast-Track Courts) की स्थापना: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों (विशेषकर दुष्कर्म और POCSO एक्ट के मामलों) की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 3 नए 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट' स्थापित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई है।
- सेवा नियमावली और अन्य फैसले: इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न विभागों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और पुलिस) की सेवा नियमावलियों (Service Rules) में संशोधन, नई पर्यटन परियोजनाओं और कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े कई अन्य प्रस्तावों को भी सर्वसम्मति से पारित किया गया।
त्वरित न्याय और वित्तीय सशक्तिकरण की दिशा में कदम
उत्तराखंड सरकार का यह 28-सूत्रीय एजेंडा राज्य के सर्वांगीण विकास का प्रतिबिंब है। एक ओर जहाँ 1.11 लाख करोड़ का बजट राज्य की मजबूत होती आर्थिकी (Economy) को दर्शाता है, वहीं 3 नए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन राज्य में महिला सुरक्षा और 'जीरो टॉलरेंस ऑन क्राइम' (Zero Tolerance on Crime) की नीति को सुदृढ़ करता है। इसके साथ ही, UCC में आवश्यकतानुसार संशोधन कर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वह कानून को जनता के लिए जटिल नहीं, बल्कि सुगम बनाना चाहती है।
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27 फ़रवरी: टनकपुर में 'माँ पूर्णागिरि मेला 2026' का भव्य उद्घाटन और कोटद्वार में राज्य पक्षी महोत्सव का शुभारंभ
27 फ़रवरी 2026 को देवभूमि उत्तराखंड में आस्था और प्रकृति संरक्षण का एक अनूठा संगम देखने को मिला। चंपावत जिले के टनकपुर क्षेत्र में उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध 'माँ पूर्णागिरि मेले' (Maa Purnagiri Mela) का विधिवत उद्घाटन किया गया, जो 15 जून तक चलेगा। वहीं दूसरी ओर, पौड़ी गढ़वाल जिले के भाबर क्षेत्र कोटद्वार में 'कोटद्वार पक्षी महोत्सव' (Kotdwar Bird Festival) का शुभारंभ हुआ, जिसका उद्देश्य राज्य की समृद्ध एवियन (Avian) जैव विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
माँ पूर्णागिरि मेला 2026: उत्तर भारत का प्रमुख धार्मिक समागम
- ऐतिहासिक महत्व: माँ पूर्णागिरि शक्तिपीठ भारत के 108 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यताओं के अनुसार, यहाँ सती माता की 'नाभि' (Navel) गिरी थी। यह मंदिर अन्नपूर्णा चोटी पर स्थित है।
- लंबी अवधि का मेला: यह मेला होली के बाद शुरू होकर लगभग तीन महीने (15 जून तक) चलता है। इस वर्ष भी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और नेपाल से लगभग 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।
- सुरक्षा और जनसुविधाएं: इस बार मेले में प्लास्टिक को पूरी तरह प्रतिबंधित (Zero Plastic Zone) किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टनकपुर से ठुलीगाड़ और भैरव मंदिर तक ई-रिक्शा और बेहतर पैदल मार्ग की व्यवस्था की गई है।
कोटद्वार पक्षी महोत्सव: ईको-टूरिज्म को बढ़ावा
कोटद्वार (जिसे गढ़वाल का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है) के सनेह (Saneh) और लालढांग (Laldhang) वन क्षेत्रों में 'कोटद्वार पक्षी महोत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। लैंसडाउन वन प्रभाग (Lansdowne Forest Division) के इस क्षेत्र में पक्षियों की 300 से अधिक दुर्लभ प्रजातियां (जैसे- ग्रेट हॉर्नबिल, हिमालयन बुलबुल, और पैराडाइज फ्लाईकैचर) पाई जाती हैं। इस महोत्सव में देशभर से पक्षी विशेषज्ञ (Ornithologists), वन्यजीव फोटोग्राफर और प्रकृति प्रेमी हिस्सा ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को 'बर्ड गाइड' (Bird Guide) के रूप में प्रशिक्षित कर उन्हें इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) के माध्यम से स्वरोजगार प्रदान करना है।
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28 फ़रवरी: राष्ट्रव्यापी HPV टीकाकरण अभियान का शुभारंभ, राज्य स्तरीय कार्यक्रम हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में
28 फ़रवरी 2026 (राष्ट्रीय विज्ञान दिवस) के अवसर पर देश की बेटियों को सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) से सुरक्षित करने के लिए 'राष्ट्रव्यापी HPV टीकाकरण अभियान' की ऐतिहासिक शुरुआत की गई। उत्तराखंड में इस महाभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ राजकीय मेडिकल कॉलेज (सुशीला तिवारी अस्पताल), हल्द्वानी (नैनीताल) से किया गया। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कदम है, जिसका उद्देश्य भारत को भविष्य में सर्वाइकल कैंसर मुक्त बनाना है।
अभियान के प्रमुख बिंदु और 'सर्वावैक' (CERVAVAC) वैक्सीन
- लक्षित आयु वर्ग (Target Age Group): इस अभियान के प्रथम चरण में 9 से 14 वर्ष की आयु की सभी किशोरियों (स्कूल जाने वाली और स्कूल न जाने वाली दोनों) को शामिल किया गया है। सरकारी स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों पर यह टीका बिल्कुल मुफ्त लगाया जा रहा है।
- स्वदेशी वैक्सीन 'CERVAVAC': अभियान में मुख्य रूप से भारत की पहली स्वदेशी qHPV (Quadrivalent Human Papillomavirus) वैक्सीन 'सर्वावैक' का उपयोग किया जा रहा है। इसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII), पुणे और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की भूमिका: राज्य स्तरीय नोडल केंद्र के रूप में हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज कुमाऊं मंडल में वैक्सीन के कोल्ड चेन प्रबंधन (Cold Chain Management) और मेडिकल स्टाफ के प्रशिक्षण का मुख्य हब (Hub) बनाया गया है।
- संयुक्त टास्क फोर्स: शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए शिक्षा विभाग, महिला बाल विकास (आंगनबाड़ी) और स्वास्थ्य विभाग (ASHA कार्यकत्रियों) की एक संयुक्त टीम गठित की गई है जो घर-घर जाकर जागरूकता फैला रही है।
सर्वाइकल कैंसर: एक गंभीर चुनौती और समाधान
भारत में महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) के बाद सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसके कारण प्रतिवर्ष हजारों महिलाओं की असामयिक मृत्यु हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर उन कुछ गिने-चुने कैंसरों में से एक है जिसे टीकाकरण (HPV Vaccine) द्वारा लगभग पूरी तरह से रोका जा सकता है। 9-14 वर्ष की आयु में (यौन जीवन शुरू होने से पहले) यह टीका लगने पर इसका प्रभाव (Efficacy) सर्वाधिक होता है और यह 90% से अधिक सुरक्षा प्रदान करता है।