परिचय: चार्ल्स का नियम
चार्ल्स का नियम (Charles’s Law), जिसे 1780 के दशक में जैक्स चार्ल्स द्वारा प्रतिपादित किया गया, एक गैस नियम है जो गैस के आयतन और तापमान के बीच संबंध का वर्णन करता है। यह आदर्श गैस नियमों में से एक है और बॉयल के नियम का पूरक है।
नियम का कथन और सूत्र
कथन: “स्थिर दाब पर, किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन (V) उसके परम तापमान (Absolute Temperature, T) के समानुपाती (directly proportional) होता है।”
इसका अर्थ है कि यदि आप गैस का तापमान बढ़ाते हैं, तो उसका आयतन भी बढ़ेगा, और यदि आप तापमान कम करते हैं, तो आयतन भी घटेगा, बशर्ते दाब और गैस की मात्रा स्थिर रहे।
गणितीय सूत्र
V ∝ T
या, V/T = k (जहाँ k एक नियतांक है)
दो अलग-अलग स्थितियों के लिए, इसे इस प्रकार लिखा जा सकता है:
V₁/T₁ = V₂/T₂
महत्वपूर्ण नोट: इस सूत्र में तापमान हमेशा केल्विन (K) पैमाने पर होना चाहिए।
चार्ल्स के नियम के अनुप्रयोग
- गर्म हवा का गुब्बारा: गुब्बारे के अंदर की हवा को गर्म करने पर वह फैलती है (आयतन बढ़ता है), जिससे उसका घनत्व आसपास की ठंडी हवा से कम हो जाता है और गुब्बारा ऊपर उठता है।
- टायर का दाब: गर्मी के दिनों में, सड़क पर चलने से टायर के अंदर की हवा गर्म हो जाती है। चूंकि टायर का आयतन लगभग स्थिर रहता है, इसलिए तापमान बढ़ने से दाब बढ़ जाता है, जिससे टायर फटने का खतरा रहता है (यह गे-लुसैक के नियम का भी उदाहरण है)।
- बेकिंग: केक या ब्रेड बनाते समय, बैटर में मौजूद हवा के बुलबुले गर्म होने पर फैलते हैं, जिससे केक फूलता है और स्पंजी बनता है।